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चिंता: कंपनियों का एकाधिकार तोड़े भारत वरना अगला संकट होगा और भयावह, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की बड़ी चेतावनी

Sun, 07 Dec 2025 08:37 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 07 Dec 2025 08:37 AM IST
सार

इंडिगो संकट ने दिखा दिया कि भारत में एयरलाइन बाजार का अत्यधिक केंद्रीकरण भविष्य में पूरे हवाई तंत्र के लिए खतरा बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और आईसीएओ ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते संरचनात्मक सुधार नहीं हुए, तो परिचालन संकट, पायलट थकान, स्टाफिंग गेप और टिकट अस्थिरता लगातार बढ़ेंगे, जिससे सुरक्षा और उपभोक्ता हितों पर गंभीर असर पड़ेगा।

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India must break up corporate monopolies otherwise the next crisis will be even more devastating
इंडिगो विमान। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

इंडिगो संकट ने उजागर कर दिया है कि विमानन क्षेत्र का अत्यधिक केंद्रीकरण भविष्य में पूरे हवाई तंत्र को खतरे में डाल सकता है। अंतराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत ने समय रहते संरचनात्मक सुधार नहीं किए तो आने वाला दशक परिचालन संकट, पायलट थकान, स्टाफिंग गैप और टिकट मूल्य-अस्थिरता के कारण लगातार तनाव में रहेगा। अंतरराष्ट्रीय विमानन संस्थाएं चिंता जताई रही हैं कि एयरलाइन बाजार का अत्यधिक केंद्रीकरण उसे सिंगल प्वाइंट फेल्योर में बदल देता है, जहां एक कंपनी की आंतरिक समस्याएं पूरे राष्ट्रीय नेटवर्क को प्रभावित कर देती हैं।

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अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इंटरनेशनल सिविल एवियशन ऑर्गेनाइजेशन (आईसीएओ) ने अपनी फ्रेमवर्क गाइडलाइन्स में स्पष्ट किया है कि किसी देश में एक एयरलाइन की बाजार हिस्सेदारी बहुत अधिक होने पर उसकी परिचालन विफलता से सुरक्षा जोखिम, फेयर अस्थिरता और उपभोक्ता हानि कई गुना बढ़ जाती है।
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प्रतिस्पर्धा की कमी का नकारात्मक असर
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी रिपोर्ट में रेखांकित किया कि बाजारों में प्रतिस्पर्धा की कमी टिकट मूल्य निर्धारण पर नकारात्मक असर डालती है। एयरलाइन की परिचालन में कमजोरियां राष्ट्रीय-स्तर के संकट में बदल जाती हैं। एशिया पेसिफिक रीजनल ऑफिस ने रिपोर्ट में कहा कि तेजी से विस्तार और अपर्याप्त पायलट–क्रू सप्लाई किसी भी बड़े नेटवर्क को अनियंत्रित अव्यवस्था में ढकेल देती है।
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तत्काल यह करने की सलाह

  • आईसीएओ का सुझाव है कि बड़े एयरपोर्टों पर स्लॉट नियंत्रण मोनोपोली को बढ़ावा देता है।
  • स्लॉट शेयरिंग और उपयोग नहीं तो खोने का नियम (यूज इट आर लूज इट रूल) लागू होने से नई एयरलाइंस को प्रवेश सरल हो जाता है।
  • आईएटीए के अनुसार, यदि मध्यम और छोटी एयरलाइंस का विकास होगा तो मोनोपोली स्वतः कमजोर होगी। भारतीय बाजार में अब भी टियर-2 और 3 रूट्स पर प्रतिस्पर्धा बहुत कम है।


एशिया पेसिफिक रीजनल ऑफिस की चेतावनी
इतना ही नहीं एशिया पेसिफिक रीजनल ऑफिस ने चेतावनी दी है कि भारत में पायलट उत्पादन क्षमता मांग की आधी भी नहीं है। इस कमी से बड़ी एयरलाइनें और अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं, क्योंकि छोटी एयरलाइंस प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर पातीं। यदि भारतीय उपभोक्ता को देरी, रद्दीकरण और गलत सूचना पर स्वचालित क्षतिपूर्ति मिलेगी, तो एयरलाइंस बिना तैयारी के संचालन चलाने से बचेंगी। यह कदम मोनोपोली मानसिकता को तोड़ता है।

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