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चीन के एकाधिकार को मिलेगी चुनौती: रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी शुरू, भारत में किन खनिजों का बढ़ेगा उत्पादन?
Thu, 16 Jul 2026 04:34 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 16 Jul 2026 04:34 AM IST
सार
केंद्र सरकार ने लिथियम, टाइटेनियम, टंगस्टन, रेयर अर्थ तत्वों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों सहित 20 रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी का आठवां चरण शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तथा उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
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चीन को चुनौती देने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/प्रिंट
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विस्तार
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और रणनीतिक खनिजों पर चीन की मजबूत पकड़ के बीच भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को लिथियम, टाइटेनियम, टंगस्टन, दुर्लभ मृदा तत्व (रेयर अर्थ), गैलियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम और मोलिब्डेनम समेत 20 रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी के आठवें चरण की शुरुआत की। नौ राज्यों में फैले इन ब्लॉकों की नीलामी को रक्षा, उच्च प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से गेमचेंजर माना जा रहा है।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत करते हुए कहा कि इन खनिजों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से भारत की आयात निर्भरता घटेगी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की भूमिका मजबूत होगी। इन रणनीतिक खनिजों का उपयोग लड़ाकू विमान, मिसाइल, पनडुब्बी, बख्तरबंद वाहन, रडार, सेमीकंडक्टर, नाइट विजन सिस्टम, सैन्य संचार उपकरण, रक्षा उपग्रह, स्टील्थ तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और उर्वरक उद्योग में होता है।
घरेलू स्तर पर इनकी उपलब्धता से तेजस जैसे स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के निर्माण को गति मिलेगी। इस नीलामी में टाइटेनियम, लिथियम और टंगस्टन के अलावा मोलिब्डेनम, ग्रेफाइट, फॉस्फोराइट, दुर्लभ मृदा तत्व, वैनेडियम, गैलियम, पोटाश, सेसियम और रूबिडियम जैसे कई बहुमूल्य खनिज शामिल हैं। आधुनिक सैन्य तकनीक और उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण में इन रणनीतिक खनिजों की भूमिका रीढ़ जैसी है।
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आयात निर्भरता होगी कम
भारत अब तक अपनी कई रणनीतिक जरूरतों के लिए इन खनिजों के आयात पर निर्भर रहा है। नई नीलामी के बाद घरेलू उत्पादन बढ़ने से रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला अधिक सुरक्षित होगी और किसी युद्ध, वैश्विक संकट या प्रतिबंध की स्थिति में सैन्य उत्पादन प्रभावित होने की आशंका कम होगी। साथ ही भारत भविष्य में रणनीतिक खनिजों का विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेगा।
वैश्विक आपूर्ति में है चीन का दबदबा
फिलहाल पूरी दुनिया में रणनीतिक खनिजों पर नियंत्रण स्थापित करने को लेकर एक मौन युद्ध जारी है। ऐसे में भारत की इस पहल के गहरे सामरिक मायने हैं। दुर्लभ मृदा तत्वों, गैलियम और ग्रेफाइट जैसे कई महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर फिलहाल चीन का दबदबा है। चीन पूर्व में ताइवान और पश्चिमी देशों के साथ तनाव के दौरान इन खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर इसे एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर चुका है। भारत में स्वदेश स्थित ब्लॉकों की नीलामी इस चीनी खतरे के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करेगी।
मजबूत होगी सैन्य निगरानी क्षमता
टाइटेनियम और टंगस्टन का उपयोग लड़ाकू विमानों के इंजन, बख्तरबंद वाहनों, पनडुब्बियों और मिसाइलों के वॉरहेड बनाने में होता है। घरेलू स्तर पर इनकी उपलब्धता से भारत के तेजस जैसे स्वदेशी सैन्य प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में मदद मिलेगी। nगैलियम और वैनेडियम जैसे खनिज आधुनिक रडार, सेमीकंडक्टर, नाइट-विजन उपकरणों और सैन्य संचार प्रणालियों के निर्माण के लिए जरूरी हैं।
घरेलू खनन से सेना की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। जबकि दुर्लभ मृदा तत्वों का उपयोग रक्षा उपग्रहों, सटीक मार करने वाली युद्धक सामग्री और स्टील्थ तकनीक में होता है। इनके भंडार मिलने से भारत की अंतरिक्ष आधारित सैन्य निगरानी क्षमताएं मजबूत होंगी।
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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत करते हुए कहा कि इन खनिजों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से भारत की आयात निर्भरता घटेगी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की भूमिका मजबूत होगी। इन रणनीतिक खनिजों का उपयोग लड़ाकू विमान, मिसाइल, पनडुब्बी, बख्तरबंद वाहन, रडार, सेमीकंडक्टर, नाइट विजन सिस्टम, सैन्य संचार उपकरण, रक्षा उपग्रह, स्टील्थ तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और उर्वरक उद्योग में होता है।
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घरेलू स्तर पर इनकी उपलब्धता से तेजस जैसे स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के निर्माण को गति मिलेगी। इस नीलामी में टाइटेनियम, लिथियम और टंगस्टन के अलावा मोलिब्डेनम, ग्रेफाइट, फॉस्फोराइट, दुर्लभ मृदा तत्व, वैनेडियम, गैलियम, पोटाश, सेसियम और रूबिडियम जैसे कई बहुमूल्य खनिज शामिल हैं। आधुनिक सैन्य तकनीक और उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण में इन रणनीतिक खनिजों की भूमिका रीढ़ जैसी है।
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आयात निर्भरता होगी कम
भारत अब तक अपनी कई रणनीतिक जरूरतों के लिए इन खनिजों के आयात पर निर्भर रहा है। नई नीलामी के बाद घरेलू उत्पादन बढ़ने से रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला अधिक सुरक्षित होगी और किसी युद्ध, वैश्विक संकट या प्रतिबंध की स्थिति में सैन्य उत्पादन प्रभावित होने की आशंका कम होगी। साथ ही भारत भविष्य में रणनीतिक खनिजों का विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेगा।
वैश्विक आपूर्ति में है चीन का दबदबा
फिलहाल पूरी दुनिया में रणनीतिक खनिजों पर नियंत्रण स्थापित करने को लेकर एक मौन युद्ध जारी है। ऐसे में भारत की इस पहल के गहरे सामरिक मायने हैं। दुर्लभ मृदा तत्वों, गैलियम और ग्रेफाइट जैसे कई महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर फिलहाल चीन का दबदबा है। चीन पूर्व में ताइवान और पश्चिमी देशों के साथ तनाव के दौरान इन खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर इसे एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर चुका है। भारत में स्वदेश स्थित ब्लॉकों की नीलामी इस चीनी खतरे के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करेगी।
मजबूत होगी सैन्य निगरानी क्षमता
टाइटेनियम और टंगस्टन का उपयोग लड़ाकू विमानों के इंजन, बख्तरबंद वाहनों, पनडुब्बियों और मिसाइलों के वॉरहेड बनाने में होता है। घरेलू स्तर पर इनकी उपलब्धता से भारत के तेजस जैसे स्वदेशी सैन्य प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में मदद मिलेगी। nगैलियम और वैनेडियम जैसे खनिज आधुनिक रडार, सेमीकंडक्टर, नाइट-विजन उपकरणों और सैन्य संचार प्रणालियों के निर्माण के लिए जरूरी हैं।
घरेलू खनन से सेना की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। जबकि दुर्लभ मृदा तत्वों का उपयोग रक्षा उपग्रहों, सटीक मार करने वाली युद्धक सामग्री और स्टील्थ तकनीक में होता है। इनके भंडार मिलने से भारत की अंतरिक्ष आधारित सैन्य निगरानी क्षमताएं मजबूत होंगी।