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पवन ऊर्जा के उत्पादन में दुनिया में चौथे नंबर पर है भारत, इस राज्य का सबसे बेहतर प्रदर्शन

Tue, 21 Aug 2018 03:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Aug 2018 03:19 PM IST
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India is on 4th position in Wind power, performance of Karnataka is better than other states

ऊर्जा उत्पन्न करने के वैकल्पिक स्त्रोतों के उपयोग की दिशा में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है। एक अध्ययन के मुताबिक जिस गति से भारत में इस ओर ध्यान दिया जा रहा है उससे साल 2050 तक बिजली के स्त्रोंतो पर निर्भता काफी कम होने वाली है। इस दिशा में अगर राज्यों की बात करें तो देश का कर्नाटक इस दिशा में सबसे आगे है। मार्च 2018 तक राज्य द्वारा स्थापित कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 12.3 गीगावाट हो गई है।

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देश में कोयला आधारित बिजली संयत्रों पर कम ध्यान दिया जा रहा है। साल 2017 में भी इससे तीन गुना ज्यादा वृद्धि अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में हुई है। इससे कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम होती जा रही है। सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी की रिपोर्ट के मुताबिक अक्षय ऊर्जा के विकास के लिए देश के अन्य राज्य भी भरसक प्रयास कर रहे हैं। साल 2017 में तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, पंजाब और उत्तराखंड ने केवल अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए बैंक से ऋण लिए और कोयला आधारित परियोजनाओं के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
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कर्नाटक ने की 5 गीगावाट की बढ़ोतरी

अव्वल स्थान पर रहने वाले राज्य कर्नाटक ने साल 2017-18 में अपनी क्षमता में 5 गीगावाट की बढ़ोतरी की है। जिससे यह देश में सबसे ज्यादा अक्षय ऊर्जा का उत्पादन करने वाला राज्य बन गया है। इस राज्य ने साल 2018 में वायु से चलने वाले उपकरणों से उत्पादित बिजली की रिवर्स नीलामी शुरू करने की घोषणा भी की है। इसके लिए अधिकतम सीमा प्रति किलोवाट के हिसाब से 3.45 रुपये तय की गई है। अब अन्य राज्य भी कर्नाटक से सीख लेकर इस ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

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बढ़ेंगी नौकरियां

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इस पर काउंसिल ऑफ एनर्जी, एन्वायरर्मेंट एंट वाटर (सीईईई) ने एक अध्ययन भी किया है। जिसके मुताबिक क्लीन एनर्जी पर जो भारत द्वारा योजना तैयार की गई है उससे आने वाले 10 सालों में देश में तकरीबन 12 लाख नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। जिनमें से 10 लाख से ज्यादा सोलर पावर के क्षेत्र में पैदा होंगी। इसके अलावा विंड पावर से आने वाले 7 सालों में करीब 2 लाख नौकरियों के आने की उम्मीद है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र और जमीन की गर्मी से बिजली पैदा होने वाले क्षेत्र में भी नई नौकरियां निकलेंगी। क्योंकि सरकार अब जमीन की गर्मी से बिजली पैदा करने की ओर भी काम कर रही है।

विशेषज्ञों ने बताया कर्नाटक क्यों है पहले स्थान पर

कर्नाटक के इस ओर अच्छा प्रदर्शन करने पर विशेषज्ञों का कहना है कि इस राज्य के लोग स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों मुद्दों पर पूरा ध्यान देते हैं। जिससे यहां का राजनीति नेतृत्व प्रभावित हुआ है और अपने प्रयासों से यह राज्य प्रथम स्थान पर आया है। इसके साथ ही एक अन्य कारण है सोलर एनर्जी के दामों में आने वाली गिरावट। जो कि कोयल से काफी सस्ता पड़ता है। जिस कारण यहां कोयले के मुकाबले सोलर एनर्जी पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

दुनिया में चौथे नंबर पर है भारत

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का स्थान चौथा है। इस दिशा में पहले स्थान पर चीन है, दूसरे स्थान पर अमेरिका और तीसरे पर जर्मनी है। पवन ऊर्जा के इतिहास की बात करें को इसकी स्थापना भारत में साल 1986 में हुई थी। सबसे पहले कुछ पवन ऊर्जा संयंत्र महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में 55 मेगावाट के साथ लनाए गए थे। बाद में इन बिजली संयंत्रों की संख्या बढ़ती गई। बता दें इन सभी परियोजनाओं को नई और नवीन ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा संचालित किया गया है। मंत्रालय ने अब लक्ष्य रखा है कि साल 2022 तक क्षमता 60 लाख मेगावाट तक पहुंच सकती है। फिलहाल पवन ऊर्जा की स्थापना क्षमता लगभग 24,759 मेगावाट है जो कि देश के दक्षिण, पश्चिम और उत्तरी क्षेत्रों में फैली हुई है।

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