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Drone: ड्रोन पर पांच परीक्षणों में कामयाबी हासिल करने वाला भारत पहला देश, हर अध्ययन के बाद तैयार हो रही एसओपी

Sun, 15 Oct 2023 05:08 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 15 Oct 2023 05:08 AM IST
सार

जानकारी के अनुसार, भारत में पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल कर साल 2020 व 2021 में कोरोना टीके और दवाओं को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाया गया। इसमें सफलता के बाद सरकार ने चार और नए कामों के लिए ड्रोन परीक्षण का फैसला लिया। इसके तहत वैज्ञानिकों की टीम भी गठित हुई।

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India is first country to succeed in five tests on drones SOP being prepared after each study
Drone - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत ने दुनिया में पहली बार ड्रोन के जरिए प्राथमिक अस्पतालों तक रक्त पहुंचाने व टीबी की इलाज अवधि को कम करने में कामयाबी हासिल की है। अब तक पांच परीक्षणों में कामयाबी हासिल करने वाला यह दुनिया का इकलौता देश है।

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ग्रामीण, खासकर दुर्गम स्थल के निवासियों में टीबी की इलाज अवधि को कम करने में ड्रोन ने अहम भूमिका निभाई है। यह दो पायलट प्रोजेक्ट सरकार की उस चार लेयर नीति का हिस्सा हैं जिसे ड्रोन परीक्षण के लिए कुछ ही समय पहले अनुमति दी गई। अब केंद्र की ओर से राज्यों के मार्गदर्शन के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में ड्रोन प्रयोग के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।

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अप्रैल माह में शुरू हुआ ट्रायल
जानकारी के अनुसार, भारत में पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल कर साल 2020 व 2021 में कोरोना टीके और दवाओं को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाया गया। इसमें सफलता के बाद सरकार ने चार और नए कामों के लिए ड्रोन परीक्षण का फैसला लिया। इसके तहत वैज्ञानिकों की टीम भी गठित हुई। इनका पहला कार्य एक से दूसरे अस्पताल तक रक्त पहुंचाना था। रक्त में प्लेटलेट्स सहित सभी घटकों को नुकसान पहुंचाए बगैर ड्रोन से आपूर्ति के लिए दिल्ली और नोएडा को चुना गया। इस साल अप्रैल माह में ट्रायल शुरू हुआ जिसके परिणाम हाल ही में जारी हुए हैं।

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दूसरा परीक्षण तेलंगाना के यद्रादी इलाके में इसी साल शुरू हुआ। यहां के दूरदराज गांव से टीबी संदिग्ध मरीज का सैंपल लेकर बड़े अस्पताल में जांच के लिए ड्रोन से भेजा गया। एक ही दिन में सैंपल जाने के बाद शाम तक रोगी को रिपोर्ट आई और तीन माह की दवाएं भी ड्रोन से प्राप्त हुईं। तीन से चार महीने तक रोज यह अभ्यास किया गया। इसके आंकड़े वैज्ञानिकों तक पहुंच गए हैं।

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुमित अग्रवाल ने बताया, ‘भारत में ऐसे कई गांव हैं, जहां से जिले तक पहुंचने में लोगों को 20 से 30 घंटे तक का समय लगता है। इसी समय को कम करने, आखिरी छोर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, मरीज की तुरंत जांच व इलाज शुरू करने के लिए ड्रोन की एक बड़ी भूमिका सामने आई है।’

टीबी पर सबसे अनूठा प्रयोग
डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि टीबी और ड्रोन को लेकर यह अनूठा प्रयोग है। एक गांव में आशा कर्मचारी किसी संदिग्ध को टीबी की जांच कराने की सलाह देती है तो अमूमन बड़े शहर तक जाने और जांच कराने में कम से कम तीन-चार दिन का समय लगता है। साथ ही उसका खर्च भी बढ़ता है। इसके अलावा, जांच कराने के लिए वह अपना मन बनाने में भी समय लेता है। तीन से चार महीने तक चलने वाले इस ड्रोन परीक्षण में इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखा गया और अब हमारे पास प्रारंभिक आंकड़े हैं। इनका हमारी टीम अध्ययन कर रही है। फिलहाल इतना काफी है कि दुर्गम स्थल या ग्रामीणों में ड्रोन के जरिए टीबी की इलाज अवधि को कम करने में कामयाबी मिली है।

आज केलांग रवाना होंगे वैज्ञानिक
जानकारी मिली है कि ड्रोन के बाकी दो परीक्षण के लिए दिल्ली से वैज्ञानिकों का दल शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के केलांग के लिए रवाना होगा। लाहौल स्पीति जिला स्थित सात से आठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और केलांग जिला अस्पताल के बीच ड्रोन परीक्षण होगा। यह पूरा इलाका दुर्गम है जहां हवा का दबाव भी कम रहता है।

अब तक सिर्फ परीक्षण ही क्यों?
इस सवाल पर डॉ. सुमित अग्रवाल ने कहा कि ड्रोन पूरी दुनिया के लिए नया है। कई देश इसका दूसरे क्षेत्रों में इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन भारत मानवता और हर किसी तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दे रहा है। इसके लिए पहले वैज्ञानिक तथ्य, अध्ययन और दिशा निर्देश जरूरी हैं। अलग अलग विषयों के साथ अब तक कई अध्ययन हो चुके हैं। जल्द ही बाकी परिणाम भी हमारे हाथ में होंगे इसके बाद भारत अपने स्वास्थ्य क्षेत्र में ड्रोन का प्रयोग आगे बढ़ा सकता है।

ड्रोन ने 20 हजार खुराक पहुंचाईं
ड्रोन ने पायलट परीक्षण में 2020-2021 में 20 हजार टीकों की खुराक दुर्गम स्थानों तक पहुंचाई। अब तक यह आंकड़े सार्वजनिक नहीं थे लेकिन वैज्ञानिकों का अध्ययन जारी हुआ है। इसमें ड्रोन को दुर्गम स्थानों पर किन-किन तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, इसके बारे में भी पूरी जानकारी है। अंडमान, लक्षद्वीप, नागालैंड, मिजोरम जैसे इलाकों में वैज्ञानिकों का यह अध्ययन आसान नहीं था। ड्रोन ने सभी चुनौतियों को पूरा किया।

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