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Tuberculosis: अब सिर्फ 35 रुपये में करा सकेंगे टीबी की जांच; भारत ने खोजी विश्व में सबसे सस्ती जांच तकनीक

Wed, 03 Jul 2024 04:58 AM IST
विशांत श्रीवास्तव परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Wed, 03 Jul 2024 04:58 AM IST
सार

भारत ने दुनिया की सबसे सस्ती टीबी की जांच की जांच करने की तकनीक खोजी है। इसमें सिर्फ 35 रुपये का खर्च आएगा।

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India has discovered the world's cheapest TB test, it will cost only Rs 35.
टीबी - फोटो : ani

विस्तार

भारत ने विश्व में सबसे सस्ती टीबी जांच तकनीक की खोज की है। महज 35 रुपये में मरीज की लार से डीएनए लेकर टीबी वायरस का पता लगाया जा सकता है। यह तकनीक शुरुआती लक्षण में ही संक्रमण की पहचान कर सकती हैकरीब दो घंटे में 1500 से ज्यादा नमूनों की एक साथ जांच करने वाली यह तकनीक इतनी सरल है कि इसे किसी गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने क्रिस्पर आधारित दो तकनीक को खोजा है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस का पता लगाने में पूरी तरह सक्षम हैं। इनमें से एक ग्लो टीबी पीसीआर किट है जिसकी मदद से मरीज के नमूने से डीएनए को अलग किया जा सकता है। वहीं दूसरी तकनीक रैपिड ग्लो डिवाइस है जो एक इनक्यूबेटर है और डीएनए में मौजूद वायरस की पहचान करता है। आईसीएमआर ने इन दोनों तकनीक को बाजार में ले जाने के लिए प्राइवेट कंपनियों से प्रस्ताव मांगा है। इसमें स्पष्ट किया है कि तकनीक पर मालिकाना अधिकार आईसीएमआर के पास सुरक्षित रहेगा। इन्हें पेटेंट कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इनके उत्पादन में सहयोग के लिए आईसीएमआर ने एक टीम का गठन भी किया है।
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आईसीएमआर के अनुसार, टीबी एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है जिसके प्रभावी रोग प्रबंधन के लिए सटीक और तीव्र जांच तकनीक होना बहुत जरूरी है। अभी भारत में पारंपरिक जांच तकनीक हैं जो कल्चर आधारित होने के साथ मरीज के लक्षण के 42 दिन में कराई जाती है। इसमें माइक्रोस्कोपी और न्यूक्लिक एसिड-आधारित विधियों का सहयोग लिया जाता है जो काफी समय तेती है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आईसीएमआर और आरएमआरसीएनई डिब्रूगढ़ के शोधकर्ताओं ने मिलकर क्रिस्पर आधारित टीबी जांच तकनीक खोजी है।
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एक बार में 1,500 नमूनों की जांच
आईसीएमआर ने बताया कि ग्लो टीबी पीसीआर किट काफी तेजी से काम करती है। करीब 1.5 से 2.5 घंटे के बीच यह मरीज की लार से डीएनए को अलग करने में सक्षम है। करीब 35 रुपये इसकी लागत है, जो तीन चरणीय डीएनए को अलग कर देती है। इसके बाद रैपिड ग्लो डिवाइस का काम रहता है, जो एक बार में 1,500 नमूने की जांच कर सकती है। 


चीन-अमेरिका में भी जांच कराना महंगा
आईसीएमआर ने बताया कि अभी तक दुनिया भर में टीबी जांच को लेकर जो तकनीक हैं उनमें सबसे सस्ती 35 रुपये वाली है। यहां तक कि चीन और अमेरिका में भी टीबी जांच कराना इससे काफी महंगा है। लागत के साथ यह समय को भी बचाती है और एक बार में हजार से ज्यादा संदिग्ध मरीजों में वायरस की पुष्टि करने की क्षमता रखती है।
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