भारत-फ्रांस की नौसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास, चीन को संदेश
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भारत और फ्रांस की नौसेना ने विमानवाहक पोत ‘चार्ल्स डे गॉले’ के साथ हिंद महासागर में शुक्रवार को सबसे बड़ा युद्धाभ्यास किया। रणनीतिक रूप से अहम हिंद महासागर के समुद्री मार्गों पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं। चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और दक्षिण चीन सागर में दबदबे से भारत और फ्रांस चिंतित हैं। ऐसे में इतने व्यापक युद्धाभ्यास को चीन को संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
फ्रांसीसी पोत की कमान संभाल रहे रियर एडमिरल ओलिवर लेबास ने कहा, ‘यह युद्धाभ्यास 2001 में शुरू हुए अभियान का अब तक का सबसे बड़ा अभ्यास है। हमें लगता है कि हम इस क्षेत्र में स्थिरता ला सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए काफी मायने रखता है। एशिया, यूरोप और खाड़ी देशों के बीच ज्यादातर समुद्र के जरिये ही होता है। हिंद महासागर में भारत का पारंपरिक दबदबा चीन के बढ़ते प्रभाव का सामना कर रहा है। चीन ने समुद्री मार्गों के करीब युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती की है। ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ के साथ चीन ने कॉमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा नेटवर्क बनाया है, जिसका भारत ने हमेशा से विरोध किया है।
फ्रांसीसी नौसेना के हेड रियर एडमिरल दिदिर मालटरे ने कहा कि हिंद महासागर में चीन आक्रामक नहीं है, लेकिन दक्षिण चीन सागर में स्थिति अलग है। दरअसल फ्रेंच अधिकारी का इशारा दक्षिण चीन सागर में चीन के दावों को लेकर पड़ोसी देशों के साथ उपजे विवाद पर था। चीन द्वारा नए सिल्क रोड व्यापार गलियारे का निर्माण, जिसमें हिंद महासागर भी शामिल है, एक रणनीति है जो मुख्य तौर पर आर्थिक से ज्यादा किसी और उद्देश्य को लेकर है। अगले 10 से 15 साल में ऐसे हालात बन सकते हैं, जिससे तनाव पैदा हो सकता है।
दोनों देशों के 6-6 युद्धपोत और पनडुब्बियां ले रही हिस्सा
गोवा के तट पर 17वें सालाना युद्धाभ्यास में भाग लेने वाला करीब 42,000 टन का फ्रांसीसी युद्धपोत ‘चार्ल्स डि गॉले’ कुल 12 युद्धपोतों और पनडुब्बियों में से एक है। भारत और फ्रांस के 6-6 युद्धपोत और पनडुब्बियां इसमें भाग ले रही हैं।
#WATCH: French fighter aircraft Rafale being recovered onboard French Navy's aircraft carrier FNS Charles de Gaulle, during ongoing Indo-French naval exercise 'Varuna', in the Arabian Sea. pic.twitter.com/pZe4dNtyXZ
— ANI (@ANI) May 10, 2019