अंतरिक्ष पर नजरें: आज भारत के पहले ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट की लॉन्चिंग, सूचनाएं लेकर वहीं योजना भी बनेंगी
आज भारत के पहले ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट की लॉन्चिंग है। इस कवायद के सफल होने पर अंतरिक्ष में ही डाटा प्रोसेस करने वाले चुनिंदा देशों की कतार में भारत भी शामिल होगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत अब अंतरिक्ष से सिर्फ सूचनाएं नहीं लेगा, वहीं पर योजना भी बनाएगा।
विस्तार
कैलिफोर्निया के वांडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से भारत आज अपना पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट लॉन्च करेगा। इससे भारत अब अंतरिक्ष में ही डाटा प्रोसेस करने वाले अमेरिका, चीन, जापान जैसे चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो अब तक हमें अंतरिक्ष से भारी संख्या में जानकारियां मिलती थीं, जिन पर ग्राउंड स्टेशन पर घंटों व कई दिनों तक शोध व विश्लेषण (डाटा प्रोसेस) कर हम अपनी योजनाएं बनाते थे।
लॉन्चिंग स्पेसएक्स के रॉकेट से होगी
अब यह सैटेलाइट हवा में रहते हुए ही डाटा को प्रोसेस कर लेगा और सिर्फ काम की सटीक सूचना ही भेजेगा, जिससे भारत अपनी रणनीति भी अंतरिक्ष में ही तैयार कर लेगा और ग्राउंस स्टेशन से उस पर फैसले व कार्रवाई होेगी। हैदराबाद स्थित भारतीय स्पेस स्टार्टअप टेक मी2 स्पेस के एमओआई-1ए सैटेलाइट की लॉन्चिंग स्पेसएक्स के रॉकेट से होगी। इस सैटेलाइट में एनवीडिया जैसे ताकतवर एज-कंप्यूटिंग प्रोसेसर औरएआई चिप्स लगाए गए हैं। यह अंतरिक्ष में ही सुपर-फास्ट कंप्यूटिंग पावर के साथ डाटा प्रोसेस में सक्षम है।
अमेरिका, चीन और जापान की टक्कर में भारत
अब तक स्पेस-बेस्ड क्लाउड डाटा सेंटर और इन-ऑर्बिट प्रोसेसिंग की तकनीक पर मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियां (जैसे स्पेसएक्स) या चीन और जापान की सरकारी एजेंसियां ही काम कर रही थीं। इस सफल लॉन्च के साथ भारत भी अंतरिक्ष में अपना 'डाटा सेंटर' बनाने वाले देशों के एलीट क्लब में शामिल हो जाएगा।
इन क्षेत्रों में दिखेंगे क्रांतिकारी बदलाव
- कृषि और किसान: सटीक पूर्वानुमान से किसानों का मुनाफा बढ़ेगा और जोखिम कम होगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
- आपदा प्रबंधन: नया एआई सैटेलाइट आपदा की तस्वीरों का त्वरित विश्लेषण कर ग्राउंड स्टेशन को सटीक जानकारी देगा और तुरंत बचाव कार्य शुरू होगा।
- राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना: समुद्र में घूम रहे दुश्मन के जहाजों या सीमाओं पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की लाखों तस्वीरें भेजने के बजाय, एआई सैटेलाइट केवल उन तस्वीरों को फिल्टर करके भारतीय सेना को भेजेगा जिनमें असल खतरा छिपा है।
- स्मार्ट सिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर: शहरों में अचानक बढ़ रहे अवैध कब्जों या जंगलों की कटाई का सटीक डाटा स्थानीय प्रशासन को मिलेगा।
- जहाजरानी और लॉजिस्टिक्स: यह समुद्र में जहाजों के रूट को आसान बनाने और तूफानों की सटीक जानकारी देकर व्यापार सुगम बनाएगा।
कंटेनराइज्ड एआई तकनीक पर काम करेगा सैटेलाइट
यह सैटेलाइट कंटेनराइज्ड एआई तकनीक पर काम करेगा। यह मोबाइल एप्स की तरह सॉफ्टवेयर को छोटे-छोटे सुरक्षित डिब्बों (कंटेनर्स) में बंद कर देता है। जैसे मोबाइल में हम अपने फोन में जरूरत के हिसाब से नया ऐप डाउनलोड या अपडेट कर लेते हैं, ठीक वैसे ही वैज्ञानिक जमीन पर बैठे-बैठे अंतरिक्ष में तैर रहे सैटेलाइट के अंदर नए एआई मॉडल्स को कंटेनर्स में भेज सकते हैं। इस सैटेलाइट में लगे एनवीडिया ओरिन जैसे पावरफुल मिनी-कंप्यूटर और एआई चिप अंतरिक्ष में वैसे ही डाटा प्रोसेस करेंगे, जैसे धरती पर मौजूद बड़े-बड़े डेटा सेंटर करते हैं।
लिए जाएंगे रियलटाइम फैसले
जब सैटेलाइट को भारी-भरकम कच्चे डेटा को धरती पर डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा, तो इंटरनेट बैंडविड्थ और भारी डाउनलोडिंग कॉस्ट की भी बचत होगी। इसस कई अहम क्षेत्रों में रियल-टाइम में फैसले लेना संभव होगा।