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MEA: अफ्रीका-एशिया के कई देशों में भारत पहली बार तैनात करेगा रक्षा राजनयिक, बदलते वैश्विक समीकरण के चलते फैसला
Wed, 10 Apr 2024 09:38 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 10 Apr 2024 09:38 PM IST
सार
भारत पहली बार रणनीतिक संबंधों का विस्तार करने की अपनी व्यापक नीति के तहत अफ्रीकी और एशिया के कई देशों में रक्षा राजनयिक को तैनाती करेगा। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की अफ्रीकी देशों के साथ नजदीकियां बढ़ी हैं।
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विदेश मंत्रालय
- फोटो : ANI
विस्तार
पहली बार प्रमुख क्षेत्रों के साथ भारत रणनीतिक संबंधों का विस्तार करने की अपनी व्यापक नीति पहले के तहत इथियोपिया, मोजाम्बिक, आइवरी कोस्ट, फिलीपींस, आर्मेनिया और पोलैंड समेत कई देशों में रक्षा राजनयिक नियुक्त करेगा। यह कदम नए भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच आया है।
छोटे अफ्रीकी देशों में भारत रक्षा राजनयिक नियुक्त करेगा
मामले से जुड़े विशेषज्ञों की मानें, भारत छोटे अफ्रीकी देश जिबूती के लिए एक नए रक्षा राजनयिक की भी नियुक्ति कर रहा है, जो लाल सागर और अदन की खाड़ी के आस-पास एक प्रमुख समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है और ये सैन्य अड्डों के लिए एक बेशकीमती स्थान माना जाता है। जिबूती में नए रक्षा राजनयिक द्वीप राष्ट्र में पद संभालने वाले दूसरे व्यक्ति होंगे।
विदेश नीति की प्राथमिकताओं को रखा गया ध्यान में
सूत्रों की मानें तो, भारत मॉस्को में अपने दूतावास और लंदन में उच्चायोग में सैन्य अधिकारियों की टीमों की संख्या को तर्कसंगत बनाने की योजना बना रही है। भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं और जनशक्ति के इस्तेमाल के कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन दोनों देशों में तैनात कुछ रक्षा राजनयिक को युक्तिसंगत प्रक्रिया के हिस्से के रूप में कही और तैनात किया जाना तय है।
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत उठाता रहा अफ्रीका के मुद्दे
विशेषज्ञों की मुताबिक, अफ्रीकी देशों में रक्षा राजनयिकों की नियुक्ति करने का फैसला अफ्रीकी महाद्वीप के साथ रणनीतिक भागीदारी का विस्तार करने की भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। कई अफ्रीकी देशों ने पहले ही भारतीय सैन्य प्लेटफार्मों, उपकरणों और हार्डवेयर की खरीद में रुचि दिखाई है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ग्लोबल साउथ या विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीकी महाद्वीप की चिंताओं, चुनौतियों और आकांक्षाओं को उजागर करते हुए खुद को एक अग्रणी आवाज के रूप में स्थापित कर रहा है।
भारत की अफ्रीकी देशों से बढ़ रही नजदीकियां
अफ्रीकी देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के चीन के लगातार कोशिशों के बीच अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत के संबंधों में नजदीकियां देखी गई हैं। 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने को 2023 में दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह की भारत की अध्यक्षता के प्रमुख मील के पत्थर के रूप में देखा गया था।
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छोटे अफ्रीकी देशों में भारत रक्षा राजनयिक नियुक्त करेगा
मामले से जुड़े विशेषज्ञों की मानें, भारत छोटे अफ्रीकी देश जिबूती के लिए एक नए रक्षा राजनयिक की भी नियुक्ति कर रहा है, जो लाल सागर और अदन की खाड़ी के आस-पास एक प्रमुख समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है और ये सैन्य अड्डों के लिए एक बेशकीमती स्थान माना जाता है। जिबूती में नए रक्षा राजनयिक द्वीप राष्ट्र में पद संभालने वाले दूसरे व्यक्ति होंगे।
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विदेश नीति की प्राथमिकताओं को रखा गया ध्यान में
सूत्रों की मानें तो, भारत मॉस्को में अपने दूतावास और लंदन में उच्चायोग में सैन्य अधिकारियों की टीमों की संख्या को तर्कसंगत बनाने की योजना बना रही है। भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं और जनशक्ति के इस्तेमाल के कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन दोनों देशों में तैनात कुछ रक्षा राजनयिक को युक्तिसंगत प्रक्रिया के हिस्से के रूप में कही और तैनात किया जाना तय है।
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत उठाता रहा अफ्रीका के मुद्दे
विशेषज्ञों की मुताबिक, अफ्रीकी देशों में रक्षा राजनयिकों की नियुक्ति करने का फैसला अफ्रीकी महाद्वीप के साथ रणनीतिक भागीदारी का विस्तार करने की भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। कई अफ्रीकी देशों ने पहले ही भारतीय सैन्य प्लेटफार्मों, उपकरणों और हार्डवेयर की खरीद में रुचि दिखाई है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ग्लोबल साउथ या विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीकी महाद्वीप की चिंताओं, चुनौतियों और आकांक्षाओं को उजागर करते हुए खुद को एक अग्रणी आवाज के रूप में स्थापित कर रहा है।
भारत की अफ्रीकी देशों से बढ़ रही नजदीकियां
अफ्रीकी देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के चीन के लगातार कोशिशों के बीच अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत के संबंधों में नजदीकियां देखी गई हैं। 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने को 2023 में दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह की भारत की अध्यक्षता के प्रमुख मील के पत्थर के रूप में देखा गया था।