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भारत का रक्षा कारोबार: ईरान में जंग के बीच खाड़ी में विस्तार, ड्रोन युद्ध से बढ़ी मांग; पहले भी हुए हैं सौदे

Sat, 31 Oct 2026 08:50 AM IST
आशुतोष भाटिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: आशुतोष भाटिया Updated Sat, 31 Oct 2026 08:50 AM IST
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India defence business expansion in Gulf nations amid Iran US conflict demand driven by drone warfare
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक

ईरान युद्ध के बीच पश्चिम एशिया के बदलते सुरक्षा हालात ने भारतीय रक्षा उद्योग के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। खाड़ी देशों में ड्रोन और मिसाइल हमलों से निपटने की बढ़ती मांग के बीच भारत इस क्षेत्र में रक्षा तकनीक के साझा उत्पादन में साझीदार बन रहा है। स्वदेशी कंपनी आईजी डिफेंस ने ओमान की एमएसए ग्लोबल के साथ अहम समझौता किया है, जिसके जरिए खाड़ी के बाजार में भारतीय रक्षा प्रणालियों की पैठ मजबूत होगी।

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मस्कट में आयोजित भारत-ओमान रक्षा उद्योग सहयोग संगोष्ठी के दौरान यह करार हुआ। इसके तहत दोनों कंपनियां ओमान में भारतीय रक्षा प्रणालियों के साझा व स्थानीय निर्माण पर काम करेंगी। इसमें 1,000 किलोमीटर तक वार करने वाला वन-वे अटैक ड्रोन काल, दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही रोकने के लिए बनाया गया मानवरहित एरियल इंटरसेप्टर सिस्टम बाज और छोटे हवाई खतरों से निपटने के लिए विशेष माइक्रो-मिसाइल सिस्टम ज्वाला शामिल है।
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ड्रोन युद्ध ने बढ़ाई मांग
ईरान संघर्ष ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मिसाइल हमलों की अहमियत बताई है। सैन्य ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए खाड़ी देशों को अपनी हवाई सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करनी पड़ रही है। ऐसे में एंटी-ड्रोन जैमर, छोटी मिसाइलें और यूएवी रक्षा बाजार के सबसे बड़े उत्पाद बन गए हैं।
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पहले भी हुए बड़े सौदे
खाड़ी देशों के साथ भारत का रक्षा कारोबार नया नहीं है। भारत ने ओमान को 2010 में स्वदेशी इंसास राइफलें दी थीं, जबकि यूएई को तोप के गोले और सैन्य कलपुर्जे निर्यात किए गए। बहरीन, कतर, सऊदी अरब और ओमान को बुलेटप्रूफ जैकेट  व सुरक्षा उपकरण मिल चुके हैं। म्यूनिशंस इंडिया लि. ने सऊदी अरब की नादरा कंपनी के साथ 22.5 करोड़ डॉलर में तोप के गोलों संबंधी अनुबंध किया था, जिसमें स्थानीय उत्पादन की संभावनाएं भी शामिल थीं। यानी भारत और खाड़ी देशों के बीच रक्षा संबंध अब खरीदार-विक्रेता के दायरे से आगे निकल चुके हैं। यूएई भी भारत की ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर खरीदने की संभावनाओं पर बातचीत कर रहा है। हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में है। 


ओमान के रास्ते भारतीय कंपनियों को सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे बाजारों तक सीधी पहुंच मिल सकती है। हालांकि अमेरिकी दबदबे वाले पश्चिम एशिया के रक्षा बाजार में भारत के समक्ष तकनीक की विश्वसनीयता और लागत के मोर्चे पर कड़ी चुनौतियां भी होंगी।

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