फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India China Ties: Will Jaishankar return with special from China? PM Modi visit proposed in August

India China Ties: क्या चीन से कुछ खास लेकर लौटेंगे जयशंकर? अगस्त में पीएम मोदी की चीन यात्रा प्रस्तावित

Wed, 16 Jul 2025 02:10 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 16 Jul 2025 02:10 PM IST
सार

विदेश मंत्री की इस यात्रा के बाद अगले महीने शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी चीन यात्रा प्रस्तावित है। इससे पहले विपक्ष के नेता ने भारत की विदेश नीति पर बड़ा सवाल उठा दिया है। राहुल गांधी ने यह तंज ठीक एक सप्ताह बाद (21 जुलाई) आरंभ हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले कसा है। 

विज्ञापन
India China Ties: Will Jaishankar return with special from China? PM Modi visit proposed in August
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से विदेश मंत्री जयशंकर की मुलाकात - फोटो : पीटीआई

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन में हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग, विदेश मंत्री और एनएसए वांग यी से मिले हैं। बड़ी अच्छी बातें कर रहे हैं और इन बातों में भारत-चीन की गाड़ी पटरी पर दौड़ाने की पूरी चाहत साफ झलक रही है। देखना है 2020 में गलवां झड़प के बाद चीन गए विदेश मंत्री एस जयशंकर उदार मन से क्या लेकर लौटते हैं? हालांकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनपर‘सर्कस चलाने’का जोरदार तंज कस दिया है।

विज्ञापन


विदेश मंत्री की इस यात्रा के बाद अगले महीने शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी चीन यात्रा प्रस्तावित है। इससे पहले विपक्ष के नेता ने भारत की विदेश नीति पर बड़ा सवाल उठा दिया है। राहुल गांधी ने यह तंज ठीक एक सप्ताह बाद (21 जुलाई) आरंभ हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले कसा है। 
विज्ञापन


जयशंकर की चीन में राष्ट्रपति, समकक्ष विदेश मंत्री से भेंट मुलाकात पर जहां दुनिया के देशों की निगाह है, वहीं राहुल गांधी का तेज भी तेजी सुर्खियां बटोर रहा है। राहुल गांधी के इस तंज पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नेता विपक्ष हमेशा अपरिपक्व बातें बोलते रहते हैं। उन पर अब जनता भी ध्यान नहीं देती, लेकिन खबर यह भी है राहुल के इस बयान पर भाजपा के प्रवक्ताओं ने उन्हें घेरने की रणनीति को तेज कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अगले महीने प्रधानमंत्री भी जाएंगे चीन
चीन के तियानजिन शहर में 25वां शिखर सम्मेलन होगा। इसके अगस्त में होने का प्रस्ताव है। इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अगले महीने प्रधानमंत्री मोदी भी चीन जाएंगे। माना जा रहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले उसकी प्रस्तावना रख दी है। ताकि भारत और चीन के बीच संबंधों की नई इबारत लिखी जा सके।
 
पहले बात एस जयशंकर के चीन यात्रा की...
विदेश मंत्री एस जयशंकर एसीओ की बैठक के सिलसिले में चीन गए हैं। वहां उनका स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति ने किया। सोमवार को एस. जयशंकर की मुलाकात अपने समकक्ष वांग यी से हुई और उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भेंट की। चीन के राष्ट्रपति को एस जयशंकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री का संदेश दिया। भारत और चीन के द्विपक्षीय रिश्तों में प्रगति की जानकारी से अवगत कराया। इसे विदेश मंत्री ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’पर साझा किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एससीओ की बैठक में भी अपनी बात को रखा। उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हुए हमले के मुद्दे को उठाया। एससीओ सदस्य देशों को इस हमले का मकसद बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को कमजोर करने तथा धार्मिक विभाजन बढ़ाने के लिए किया गया था। उन्होंने एससीओ के सदस्य देशों से आतंकवाद के विरूद्ध सख्त और ईमानदार रवैया अपनाने की अपील की। उन्होंने याद दिलाया कि एससीओ की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ने के लिए की गई थी। इसलिए एससीओ अपने उद्देश्यों के प्रति सच्चा बने और कोई समझौतावादी रुख न आपनाए।  

चीन से संबंध पर भी बोले जयशंकर
2020 में लद्दाख की गलवां घाटी में भारत और चीन की सेना के खूनी संघर्ष के बाद पहली बार विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन के साथ संबंध को लेकर बहुत उदार दिखाए दिए। सोमवार को विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात में उन्होंने बिना रुकावट के कारोबार पर जोर दिया। व्यापार बाधाओं को हटाने, लोगों के बीच में संपर्क मजबूबत बनाने की वकालत की। सीमा संबंधी विवाद को शांति और स्थिरता के साथ हल करने के प्रति प्रतिबद्धता जताई। तकनीकी, व्यापारिक सहयोग पर बल दिया। 2020 के बाद से यह पहला अवसर है जब भारतीय विदेश मंत्री ने चीन के साथ संबंध पर इतने अच्छे वाक्य का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों को आपसी सम्मन, साझा हित और एक दूसरे की संवेदनाओं को समझकर आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2023 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भेंट के बाद पिछले 9 महीने में भारत और चीन संबंध में अच्छा सुधार हुआ है और बातचीत के जरिए हम सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।  

....लेकिन भड़क गए विपक्ष के नेता राहुल गांधी
अभी एस जयशंकर भारत नहीं लौटे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदा नीति के वह शिल्पकार माने जाते हैं। जयशंकर को विदेश सचिव बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की पहली सरकार ने तत्कालीन विदेश सचिव सुजाता सिंह को कार्यकाल से पहले मुक्त कर दिया था। एस जयशंकर को विदेश सचिव के रूप में सेवा विस्तार भी मिला था। बाद में प्रधानमंत्री के दूसरे कार्यकाल में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया। यह विदेश मंत्री के तौर पर उनका दूसरा कार्यकाल है और विदेश मामले में सरकार के संकट मोचक माने जाते हैं। लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनकी चीन यात्रा के दौरान ही उन पर तंज कस दिया। उन्हें भारत की विदेश नीति के मामले में ‘सर्कस’चलाने वाला करार दिया है। राहुल गांधी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा है कि ‘मुझे (राहुल गांधी)लग रहा है कि अब चीन के विदेश मंत्री (वांग यी) आएंगे और मोदी (प्रधानमंत्री) को चीन-भारत संबंधों में हाल के घटनाक्रमों से अवगत कराएंगे। विदेश मंत्री (एस जयशंकर) अब भारत की विदेश नीति को बर्बाद करने के मकसद से एक पूरी तरह से सर्कस चला रहे हैं।’


चीन से विदेश मंत्री एस जयशंकर क्या कुछ खास लेकर लौटेंगे?
अभी भी भारत चीन के लोगों को सेलेक्टेड वीजा देता है। विदेश, व्यापार, कारोबार समेत तमाम क्षेत्र में भारत संवेदनशील बना है। चीन ने भी कई मामले में करीब-करीब जैसे को तैसा की रणनीति अपना रखी है। पिछले पांच साल में भारत इस दिशा में चीन के आग्रह पर टका सा जवाब देता आ रहा था कि पहले चीन लद्दाख की सीमा पर विसैन्यीकरण करे। अंतरराष्ट्रीय समझौता, सहमति को अपनाए। आपरेशन सिन्दूर के दौरान चीन खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़ा था। सामरिक और रणनीतिक मामलों वरिष्ठ जानकार ने कहा कि हाल में हमारे उप सेना प्रमुख राहुल आर सिंह ने बयान दिया था। उन्होंने पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश से मिल रही चुनौती को रेखांकित किया था। दूसरा बड़ा मामला भी है। बुलट ट्रेन प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है। इसकी स्पेशल डिजाइन वाली टनल मशीन को भारत आने से रोक दिया है। विशेष आयातित यूरिया पर प्रतिबंध है। तमाम भारतीय कंपनियों की चीन की कंपनियों पर निर्भरता ने अर्थव्यवस्था को तनाव में रखा है। ऐसे में भारत और चीन के बीच में संबंधों का सुधरना विदेश मंत्री एस जयशंकर का बहुत बड़ा तोहफा होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed