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हिमाकत: तनाव घटाने के बजाय चीन ने तिब्बत से कालापानी तक तैनात कीं तोपें
Tue, 18 Aug 2020 09:01 AM IST
योगेश साहू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 18 Aug 2020 09:01 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
दुनिया को अपनी विस्तारवादी नीतियों से सांसत में डालने वाले चीन ने भारत से सटी सीमाओं पर तिब्बत से लेकर कालापानी घाटी के ऊपर तक बड़ी संख्या में तोपों और सैनिकों की तैनाती कर दी है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इन तोपों की तैनाती तिब्बत की 4,600 मीटर की ऊंचाई पर जुलाई के अंतिम हफ्ते में की गई।
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इतना ही नहीं चीन ने तिब्बत के सैन्य जिले में 77 कांबैट कमांड के 150 लाइट कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड की तैनाती भी कर दी है। इस कदम से दुनिया के सामने शांति का राग अलापने वाले चीन की मंशा पर शंका हो रही है।
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चीन ने कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड का गठन अमेरिका की नकल करके किया है। यह अमेरिकन ब्रिगेड कांबैट टीम का एडेप्टेशन है जिससे विभिन्न सैन्य बलों को एक साथ काम करने में मदद मिलती है। सूत्रों का कहना है कि चीन ने तिब्बत के काफी ऊंचाई वाले क्षेत्र में तैनाती कई गुना बढ़ा दी है।
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चीन ने कंबाइन्ड आर्म्स ब्रिगेड की तैनाती भारत से लगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पास की है। दुनिया के सामने बातचीत और सीमा पर शांति की बात करने वाले चीन की मंशा उसके इसी कदम से साफ हो जाती है।
नेपाल के तिराहे पर काला पानी घाटी के ऊपर तक तैनाती की
सूत्रों ने बताया कि चीन ने इन तोपों और दूसरे भारी शस्त्रों की तैनाती वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के तीन सेक्टरों पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश) और पूर्व के सेक्टरों (सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश) में की है।
यही नहीं चीनी सेना ने अपने जवानों को भारी संख्या में उत्तराखंड के लिपुलेख पास में भारत, चीन और नेपाल के तिराहे पर कालापानी घाटी के ऊपर भी तैनात कर दिया है। चीन ने यह तैनाती तनाव घटाने को लेकर जारी वार्ता प्रक्रियाओं के बीच की है।
परमानेंट स्ट्रक्चर भी बनाए
सूत्रों का यह भी कहना है कि चीन ने वादा खिलाफी करते हुए इन तैनातियों के साथ ही सीमावर्ती इलाकों में परमानेंट स्ट्रक्चर भी बना लिए हैं। बता दें कि सीमा से सैनिकों की वापसी को लेकर भारत और चीनी सेना के बीच कई राउंड की बातचीत हो चुकी है। लेकिन चीन की ओर से उकसावे वाली कार्रवाईयां अभी भी जारी हैं।
चीन ने वादा किया था कि वह सीमा पर पूर्व की स्थिति को बहाल करते हुए आपत्ति वाले इलाकों से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा। बता दें कि 15 जून को चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। इसमें चीनी सेना के भी कई जवान मारे गए थे। हालांकि शातिर चीन ने दुनिया के सामने आज तक मारे गए अपने जवानों की संख्या नहीं बताई है।
भारत करेगा नई रणनीति पर मंथन
सैन्य वार्ताओं के कई दौर होने के बावजूद चीन फिंगर एरिया देब सॉन्ग और 2 ग्राम में पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में आगे की योजना के लिए भारत के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेता बैठक करेंगे। बता दें कि चीनी सैनिक फिंगर एरिया में 3 महीने से ज्यादा समय से मौजूद हैं और बंकर निर्माण करने के साथ अपनी स्थिति भी मजबूत कर रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में वर्तमान स्थिति से निपटने के लिए जहां चीनी सैनिक कई स्थानों पर आगे बढ़ आए हैं, शीर्ष राजनीतिक नेताओं की सैन्य अफसरों के साथ बैठक तय हुई है। बैठक में इस बात पर चर्चा होने की संभावना है कि उन स्थितियों से कैसे निपटा जाए, जहां चीनी सैनिकों ने कठोर रुख अपना रखा है और भारतीय सैनिकों के साथ झड़पों में शामिल रहे हैं।
देश के वरिष्ठ नेतृत्व की यह बैठक चीन और भारत के बीच हुई दौलतबेग ओल्डी में हुई मेजर जनरल स्तर की वार्ता के करीब एक सप्ताह होने जा रही है। इस वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने चीनी पक्ष से कहा था कि पैट्रोलिंग प्वाइंट 10, 11, 12 और 13 पर भारतीय पैट्रोल में बाधा उत्पन्न करना बंद कर दें। बता दें कि बीते कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव चरम पर है।