भारत-चीन: 12वें दौर की वार्ता भले ही नौ घंटे चली हो, लेकिन अभी मुश्किल दौर में है मुद्दे का समाधान  

शशिधर पाठक, नई दिल्ली  Published by: Amit Mandal Updated Sun, 01 Aug 2021 12:15 AM IST

सार

  • चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दुशांबे में नहीं दिया था कोई सकारात्मक संदेश
  • मुद्दे सुलझाने की बजाय वह भारत को रिश्ते सामान्य करने की दे रहे थे नसीहत
  • विदेश मंत्री ने दर्ज कराई थी चीन के विदेश मंत्री से अपनी शिकायत
भारत चीन गतिरोध
भारत चीन गतिरोध - फोटो : iStock
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विस्तार

भारत और चीन के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए 12 वें दौर की वार्ता की। वार्ता कोई नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एकतरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के उपायों पर सहमति बनी है, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉटस्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चीन की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को भी फिलहाल अभी इस मुद्दे का सीधा समाधान नहीं दिखाई दे रहा है।
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हॉटस्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चीन के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का  साझा किया था। विदेश मंत्री ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और शिकायत दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था। दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह वार्ता संघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर दुशांबे में हुई थी। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में भारत की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था।


....लेकिन चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दे दी नसीहत
विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के अंश को विदेश मंत्रालय द्वारा जारी करने के बाद चीनी दूतावास ने विदेश मंत्री वांग यी के बातचीत के अंश को जारी किया। वांग यी इसमें भारत को नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में भारत को रिश्ते को सामान्य बनाने की नसीहत दे दी है। वांग यी ने अपने बयान में साफ कहा कि पिछले साल भारत-चीन सीमा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उसके अधिकार और गलतियां बहुत स्पष्ट हैं और जिम्मेदारी चीनी पक्ष की नहीं है। चीन ने मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान पर सहमति जताई, लेकिन विसैन्यीकरण के मुद्दे पर विदेश मंत्री टाल मटोल करते नजर आए। इसके बजाय वह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, विस्तार पर जोर देते रहे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच में द्विपक्षीय संबंध निचले स्तर हैं। इस दिशा में सार्थक प्रयासों की आवश्यकता है।

पेंचीदगियां बढ़ रही हैं, चीन चल रहा चाल
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि मुख्य मुद्दा तो हॉट स्प्रिंग और गोगरा पोस्ट से चीन के  सुरक्षा बलों के पीछे जाने का है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि आगे क्या होगा और कब होगा? रंजीत कुमार कहते हैं कि पेंचीदगियां बढ़ रही हैं।पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी कहना है कि चीन अब विसैन्यीकरण के मुद्दे को टाल रहा है। विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव कहते हैं कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हो रही है। दोनों देश सीमा पर शांति, सौहार्द बनाए रखने के उपाय कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मामला कुछ तकनीकी होता जा रहा है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि बातचीत से इसका समाधान निकल आएगा। सूत्र का कहना है कि भारत और चीन के तमाम आर्थिक, राजनीतिक हित जुड़े हैं। इसलिए उम्मीद है कि जल्द ही इसका समाधान निकल आएगा।


 

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