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India vs China: भारत-चीन की वायु सेनाओं के बीच स्थापित होगी हॉटलाइन!, विवादों को रोकने के लिए ये जरूरी
Tue, 09 Aug 2022 08:06 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 09 Aug 2022 08:06 PM IST
सार
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले हफ्ते चुशूल मोल्डो सीमा बैठक बिंदु पर वार्ता हुई थी। इसमें चीनी और भारतीय वायु सेना के बीच सीधी हॉटलाइन होने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई थी। हॉटलाइन की संरचना और स्तर पर दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर भविष्य की बैठकों में चर्चा होने की संभावना है।
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भारत चीन गतिरोध
- फोटो : iStock
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विस्तार
भारत और चीन LAC पर स्थिति के किसी भी संभावित विवाद या टकराव को रोकने के लिए और सीमा पर दोनों देशों के बीच मुद्दों पर खुली और सीधी वार्ता करने के लिए कदम उठा रहे हैं। इन सबके बीच संभावना जताई जा रही है कि दोनों देश अपनी-अपनी वायु सेना के बीच एक हॉटलाइन स्थापित कर सकते हैं।
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हाल में हुई बैठक में हुई थी चर्चा
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले हफ्ते चुशूल मोल्डो सीमा बैठक बिंदु पर वार्ता हुई थी। इसमें चीनी और भारतीय वायु सेना के बीच सीधी हॉटलाइन होने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई थी। हॉटलाइन की संरचना और स्तर पर दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर भविष्य की बैठकों में चर्चा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच हॉटलाइन बहुत जरूरी है। ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकी लड़ाकू विमानों से जुड़े मुद्दे बहुत तेजी से एक बड़े संघर्ष का कारण बन सकते हैं।
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चीनी वायुसेना की गतिविधियों के बाद ये जरूरी
सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच हॉटलाइन पर चर्चा पूर्वी लद्दाख सेक्टर में हाल ही में चीनी वायु सेना की गतिविधियों को देखते हुए जरूरी हो गई है। यहां वे 10 किलोमीटर की कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर लाइन का अकसर उल्लंघन करते रहते हैं।
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भारत और चीन के बीच गत मंगलवार को पूर्वी लद्दाख स्थित चुशूल मोल्डो में सैन्य स्तरीय विशेष वार्ता हुई थी। इसमें भारत ने बीते 45 दिनों में चीन की वायु सेना द्वारा किए गए हवाई सीमा के उल्लंघन पर सख्त ऐतराज जताया। भारतीय वायुसेना ने चीन के लड़ाकू विमानों को इलाके से खदेड़ दिया था। भारत और चीन की बीच विश्वास कायम रखने के उपायों के तौर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के 10 किलोमीटर के अंदर ही लड़ाकू विमान उड़ाने पर सहमति है, लेकिन चीनी विमानों ने बीते डेढ़ माहों में इसका उल्लंघन किया है। भारत ने इसे भड़काने वाले हरकत बताते हुए चीनी सैन्य अधिकारियों के समक्ष सख्त आपत्ति प्रकट की। सरकारी सूत्रों ने विशेष सैन्य वार्ता के बारे में शुक्रवार को मीडिया को जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने चीन से कहा कि वह वायु क्षेत्र के उल्लंघन जैसी उकसाने वाली गतिविधियों से परहेज करे।
विशेष वार्ता में एयर कमाडोर शर्मा मौजूद थे
विशेष सैन्य वार्ता में दोनों देशों के वायुसेना अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। उनके अलावा सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे। भारतीय पक्ष की ओर से एयर कमाडोर अमित शर्मा ने मौजूद थे, वहीं चीनी पक्ष की ओर से उनके समकक्ष अधिकारी थे। सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व फायर एंड फ्यूरी कोर के तहत लेफ्टिनेंट जनरल ए सेनगुप्ता के नेतृत्व में मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी ने किया।
चीन के अधिकारियों ने की यह शिकायत
चर्चा के दौरान चीनी पक्ष ने तिब्बत में अपनी वायु सेना के विमानों का पता लगाने की भारतीय वायुसेना की क्षमता पर ऐतराज जताया। चीन इसकी लगातार शिकायत कर रहा है। भारत व चीन की वायु सेना के बीच टकराव जून में शुरू हुआ था। 25 जून को चीनी वायुसेना का एक J-11 लड़ाकू विमान पूर्वी लद्दाख में तनाव वाले क्षेत्र के बहुत करीब से सुबह 4 बजे उड़ा था। इसे वायुसेना के जवानों और रडार ने तुरंत पकड़ कर सतर्क किया था।
मिराज व मिग ने दिया था चीन को जवाब
चीनी वायुसेना द्वारा हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की गतिविधियां एक माह से अधिक समय तक जारी रही थीं। इसी दौरान भारतीय वायु सेना के मिराज 2000 और मिग-29 सहित अन्य लड़ाकू विमानों को मौके पर भेजकर जोरदार जवाब दिया था। सूत्रों ने कहा कि चीन ने भारतीय वायुसेना की इतनी तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की थी। दरअसल, वायुसेना पीएलएएएफ के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने को तैयार थी। सूत्रों ने कहा कि भारतीय वायुसेना यह सावधानी भी बरत रही है कि जमीन पर मामला न बढ़े और साथ ही चीन की हवाई गतिविधियों पर भी नजर रखी जाए।