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चीन ने स्वीकारा: एलएसी पर शांति से सुधरेंगे रिश्ते, एक जून से खुलेगा लिपुलेख व्यापार मार्ग
Fri, 29 May 2026 05:22 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 29 May 2026 05:22 AM IST
सार
डब्ल्यूएमसीसी की बैठक में भारत और चीन ने माना कि एलएसी पर शांति बनाए रखने से ही आपसी रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सकता है, जिसके बाद अब दोनों पक्ष चीन में होने वाली विशेष प्रतिनिधियों की अगली बड़ी बैठक की तैयारी में जुट गए हैं। इसी सकारात्मक माहौल के बीच, कोरोनाकाल के लंबे अंतराल के बाद 1 जून से उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग के जरिए भारत और तिब्बत के बीच पारंपरिक स्थानीय व्यापार फिर से शुरू होने जा रहा है।
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भारत चीन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति को लेकर रचनात्मक और भविष्योन्मुख बातचीत की। दोनों पक्षों ने माना कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने से द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति संभव हुई है। दोनों देशों ने बुधवार को बीजिंग में परामर्श एवं समन्वय कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की बैठक के दौरान सीमा की स्थिति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि बातचीत रचनात्मक और भविष्योन्मुख रहीं। दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष जताया, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति संभव हुई है। दोनों पक्ष विशेष प्रतिनिधियों की अगली बैठक की ठोस तैयारी के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए। यह बैठक चीन में होगी। पिछले वर्ष अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता की थी। इसमें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई परिणाम सामने आए थे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) सुजीत घोष ने किया।
नदियों पर विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र की जल्द बैठक पर भारत का जोर
डब्ल्यूएमसीसी बैठक पर मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही भारतीय पक्ष ने सीमा पार नदियों पर विशेषज्ञ स्तरीय अगले तंत्र की जल्द बैठक करने पर जोर दिया। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि वे कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नियमित संवाद और संपर्क बनाए रखेंगे। इसमें वे तंत्र भी शामिल होंगे जिन पर 24वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता के परिणामों के तहत सहमति बनी थी।
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पहली जून से लिपुलेख मार्ग से शुरू होगा भारत-चीन के बीच व्यापार
कोरोनाकाल के बाद इस वर्ष एक जून से फिर भारतीय कारोबारी तिब्बत से चीनी सामान भारत ला सकेंगे। धारचूला में व्यापारी अपने सामान की पैकिंग में जुट गए हैं। प्रशासन ने व्यापारियों और हेल्परों के लिए 300 पास मांगे हैं। एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि व्यापारियों के आवेदन आने शुरू हो गए हैं।
व्यापारी नाभीढांग या उससे आगे लिपुलेख पास तक वाहनों से जाएंगे। इस दौरान आईटीबीपी के जवान व्यापारियों के साथ रहेंगे। करीब 800 मीटर पैदल चलने के बाद व्यापारी चीन में प्रवेश करेंगे। वहां से वाहनों के जरिये वे व्यापारिक मंडी तिब्बत पहुंचेंगे। इस बार चीन सरकार ने भारतीय व्यापारियों के लिए तिब्बत में अलग से मंडी बनाई है।
सीमित सामान लेकर जाएंगे अभी व्यापारी
व्यापारी अभी भारी सामान ले जाने से भी गुरेज कर रहे हैं। अभी वे यहां से गुड़, मिश्री, मसाला, छुआरा, मिर्च, चायपत्ती, मिठाइयां आदि लेकर जाएंगे। तिब्बत से वे चंवर गाय की पूंछ, रेशम, ऊन जैसी सामग्री लेकर आएंगे। गौरतलब है कि 2019 में 265 पास जारी हुए थे।
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विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि बातचीत रचनात्मक और भविष्योन्मुख रहीं। दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष जताया, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति संभव हुई है। दोनों पक्ष विशेष प्रतिनिधियों की अगली बैठक की ठोस तैयारी के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए। यह बैठक चीन में होगी। पिछले वर्ष अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता की थी। इसमें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई परिणाम सामने आए थे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) सुजीत घोष ने किया।
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नदियों पर विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र की जल्द बैठक पर भारत का जोर
डब्ल्यूएमसीसी बैठक पर मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही भारतीय पक्ष ने सीमा पार नदियों पर विशेषज्ञ स्तरीय अगले तंत्र की जल्द बैठक करने पर जोर दिया। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि वे कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नियमित संवाद और संपर्क बनाए रखेंगे। इसमें वे तंत्र भी शामिल होंगे जिन पर 24वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता के परिणामों के तहत सहमति बनी थी।
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पहली जून से लिपुलेख मार्ग से शुरू होगा भारत-चीन के बीच व्यापार
कोरोनाकाल के बाद इस वर्ष एक जून से फिर भारतीय कारोबारी तिब्बत से चीनी सामान भारत ला सकेंगे। धारचूला में व्यापारी अपने सामान की पैकिंग में जुट गए हैं। प्रशासन ने व्यापारियों और हेल्परों के लिए 300 पास मांगे हैं। एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि व्यापारियों के आवेदन आने शुरू हो गए हैं।
व्यापारी नाभीढांग या उससे आगे लिपुलेख पास तक वाहनों से जाएंगे। इस दौरान आईटीबीपी के जवान व्यापारियों के साथ रहेंगे। करीब 800 मीटर पैदल चलने के बाद व्यापारी चीन में प्रवेश करेंगे। वहां से वाहनों के जरिये वे व्यापारिक मंडी तिब्बत पहुंचेंगे। इस बार चीन सरकार ने भारतीय व्यापारियों के लिए तिब्बत में अलग से मंडी बनाई है।
सीमित सामान लेकर जाएंगे अभी व्यापारी
व्यापारी अभी भारी सामान ले जाने से भी गुरेज कर रहे हैं। अभी वे यहां से गुड़, मिश्री, मसाला, छुआरा, मिर्च, चायपत्ती, मिठाइयां आदि लेकर जाएंगे। तिब्बत से वे चंवर गाय की पूंछ, रेशम, ऊन जैसी सामग्री लेकर आएंगे। गौरतलब है कि 2019 में 265 पास जारी हुए थे।