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India-China: पांच साल बाद भारत-चीन के बीच सीधी हवाई सेवा, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर होगी शुरूआत

Mon, 27 Jan 2025 07:59 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 27 Jan 2025 07:59 PM IST
सार

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग ई से मुलाकात की और द्विपक्षीय हितों के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। भारत-चीन संबंध को बेहतर करने के लिए मिस्री बीजिंग के दो दिवसीय दौरे पर हैं।

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India, China decide to resume Kailash Mansarovar Yatra: MEA.
विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के विदेश मंत्री वांग यी - फोटो : एक्स/ @MEAIndia

विस्तार

विदेश सचिव विक्रम मिस्री दो दिवसीय चीन दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। यह बैठक विदेश सचिव और चीनी उप विदेश मंत्री के बीच संवाद के लिए आयोजित की गई थी। बैठक में भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई और भविष्य में संबंधों को मजबूत बनाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने पर सहमति जताई गई। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को यह जानकारी दी। 
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विदेश मंत्रालय ने कहा, “जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच अक्टूबर में कज़ान में हुई बैठक में सहमति बनी थी, दोनों पक्षों ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की व्यापक समीक्षा की और संबंधों को स्थिर और बहाल करने के लिए कुछ जन-केंद्रित कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।
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गर्मियों में शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा
मंत्रालय के मुताबिक, बैठक के दौरान दोनों देशों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को इस साल गर्मियों में फिर से शुरू करने का फैसला लिया। इस यात्रा को फिर से शुरू करने के लिए मौजूदा समझौतों के तहत जरूरी व्यवस्थाओं पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, भारत और चीन ने जलवायु आंकड़ों के आदान-प्रदान और सीमा पार नदियों से जुड़े अन्य सहयोग पर बातचतीत के लिए दोनों देशों के बीच विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की जल्द बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई। 
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हवाई सेवा शुरू करने के लिए बैठक करेंगे अधिकारी
दोनों देशों ने लोगों के आपसी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मीडिया और विचार मंचों की बातचीत को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू करने का भी फैसला लिया गया। इसके लिए जल्द ही दोनों देशों के तकनीकी अधिकारी बैठक करेंगे और एक नया ढांचा तैयार करेंगे।  

2020 में खराब हुए रिश्ते
भारत और चीन के बीच 2020 से ही रिश्ते तनावपूर्ण बने थे। उस साल जून में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा था। भारत ने कई चीनी एप पर पाबंदी लगा दी थी। चीनी कंपनियों की तरफ से आने वाले निवेश पर भी निगरानी बढ़ा दी गई थी। यात्री विमान सेवाएं बंद कर दी गई थीं, लेकिन कार्गो यानी मालवाहक विमानों की सीधी सेवाएं बरकरार थीं।

भारत और चीन के कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ
इस साल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ होगी। दोनों देशों ने इस मौके पर कूटनीतिक प्रयासों को और मजबूत करने और आपसी भरोसे और समझ को बढ़ाने का फैसला लिया है। इसके तहत सांस्कृतिक और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। विदेश सचिव ने इस दौरे के दौरान चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री से भी मुलाकात की। 

आपसी रिश्ते बेहतर करने पर चर्चा
मिस्री से मुलाकात के बाद वांग ने कहा, पिछले साल रूस के कजान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक के बाद से दोनों देशों के बीच काफी सहमति बनी है। सभी स्तरों पर संबंधों में सुधार की प्रक्रिया में तेजी आई है। दोनों पक्षों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। एक-दूसरे से मिलना चाहिए और अधिक ठोस उपाय तलाशने चाहिए। उन्होंने कहा, हमें संदेह, अलगाव और उपभोग के बजाय आपसी समझ, समर्थन और उपलब्धि के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और विकास दोनों तरफ के लोगों के हित में है। यह वैश्विक दक्षिण देशों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए भी अनुकूल है। वांग ने कहा, भारत-चीन के बीच अच्छे रिश्ते एशिया और विश्व में दो प्राचीन सभ्यताओं की शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि में योगदान करने के लिए भी फायदेमंद हैं।


रविवार को चीन पहुंचने के बाद मिस्री ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के प्रमुख लियू जियानचाओ से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं की बीच बनी सहमति को संयुक्त रूप से लागू करने, संवाद मजबूत करने, विकास को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया था।

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