फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India-China Border Dispute: know more courageous stories about bihar regiment

जानिए बिहार रेजिमेंट के बहादुरी के कई और किस्सों के बारे में

Sat, 20 Jun 2020 11:39 AM IST
Jeet Kumar बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 20 Jun 2020 11:39 AM IST
विज्ञापन
India-China Border Dispute: know more courageous stories about bihar regiment
सांकेतिक तस्वीर

15/16 जून की उस सर्द रात में गलवान घाटी में जय कुंवर सिंह और जय बिरसा मुंडा का रणहुंकार (बिहार रेजिमेंट का गीत, जिसमें उसका इतिहास भी ।सामने आता है) बुलंद हुआ या नहीं, ये तो साफ नहीं पर पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में तकरीबन 14,000 फ़ुट ऊंचाई पर हुई चीनी और भारतीय सेना की भिड़ंत में मारे जाने वालों में अधिकतर भारतीय फौजी बिहार रेजिमेंट के थे।

विज्ञापन


वहां, गलवान घाटी में, तैनात टुकड़ी के कमांडिंग अफसर कर्नल बी संतोष बाबू का, जिनको उनके साथी फौजियों और अधिकारियों ने नर्म-जबान और सादगी पंसद बताया है, ताल्लुक़ भी इसी रेजीमेंट से था।
विज्ञापन


'एक कुशल लीडर' बताए जानेवाले कर्नल संतोष की सोमवार को हुई भिड़ंत में मौत हो गई थी।

हालांकि बिहार रेजिमेंट की स्थापना साल 1941 में हुई थी लेकिन भारतीय सेना की वेबसाइट पर इसके संबंध में लिखते हुए 'बंगाल नेटिव इंफ़ैंटरी' का जिक्र किया गया है, जो ईस्ट इंडिया कंपनी के समय में बनाई गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इंफैंटरी का शाब्दिक अर्थ पैदल सेना है। 1857 विद्रोह के मशहूर सिपाही मंगल पांडेय बंगाल नैटिव इंफैटरी से थे।

भारत की आजादी की पहली लड़ाई बताए जाने वाले, 1857 के विद्रोह में इस रेजिमेंट के सिपाहियों के बड़े पैमाने पर शामिल होने के 'संभावित और सामने मौजूद ख़तरों को भांपते हुए ब्रितानियों ने बिहार बटालियन के सभी अट्ठारह यूनिट्स को समाप्त कर दिया और ये सुनिश्चित किया कि बिहारियों की फौज में भर्ती न की जाए। ये रोक दूसरे विश्व युद्ध के समय ही समाप्त हो पाई।

अपने पहले अवतार - बंगाल नेटिव इंफैटरी में ब्रितानियों की तरफ से बंगाल के नवाब और मराठाओं के खिलाफ लड़नेवाली फौज ने 1941 के बाद से बर्मा (अब म्यांमार), मलाया (मलय प्रायदीप के कुछ मुल्क और सिंगापुर जो ब्रिटिश कब्जे में थे) से लेकर 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1999 के करगिल जंग में हिस्सा लिया है, जब पाकिस्तानी सेना लद्दाख के करगिल क्षेत्र में घुस आई थी।

भारत ने उस घुसपैठ को खत्म करने और अपने इलाके को वापस लेने के लिए जो ऑपरेशन विजय शुरू किया था उसमें बड़ी संख्या में इस रेजिमेंट के सिपाही और अधिकारी शामिल थे।

करगिल के बटालिक सेक्टर में जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई भीषण जंग के बाद भारतीय फौज ने फ़तह हासिल की, भारतीय फौज '1 बिहार रेजीमेंट को जुबार और थारू पहाड़ियों पर हुई विजय का श्रेय' देती है।

बिहार के राजकीय चिह्न को भारत के राजकीय चिह्न के तौर पर अपनाया
बटालिक की जीत के लिए प्रशस्ति पत्र से लेकर भारत के उपद्रवग्रस्त क्षेत्रों के ऑपरेशनों में हिस्सा लेने और उसे बेहतर तरीक़े से निभाने के लिए वीर चक्र और अशोक चक्र जैसे मेडल हासिल कर चुकी बिहार रेजिमेंट के कई कार्यों जैसे बांग्लादेश की आज़ादी के समय हुए अखौरा के युद्ध के लिए आज भी याद किया जाता है।

भारत-बांग्लादेश की सीमा के पास मौजूद अखौरा में आज भी वागा-अटारी की तरह फ्लैग सेरेमनी होती है जिसमें बीएसएफ और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश शामिल होते हैं।

साल 2008 के मुंबई हमले में हमलावरों की गोलियों का शिकार हुए संदीप उन्नीकृष्णन, जो बिहार रेजिमेंट से संबंधित रह चुके थे, इस टुकड़ी की बहादुरी की कहानियों को लोगों की जबान और दिल में जिदा रखा है।

और भी कहानियां हैं, 15 सिंतबर, 1941 में तैयार की गई इस रेजिमेंट की, जिसके कमांडिग अफसर कैप्टन हबीबुल्लाह ख़ान खटक थे, वो बाद में पाकितानी फौज में मेजर जनरल रहे।

बिहार के गर्वरन सर थॉमस रदरफोर्ड जब साल 1945 में शिलांग के दौरे में बिहार रेजिमेंट के चिह्न से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने कर्नल हबीबुल्लाह खान खटक (तरक्की के बाद) से बिहार सूबे के राजकीय चिह्न के तौर पर इसके इस्तेमाल की इजाजत माँगी।


मई 1945 में बिहार हुकूमत ने एक राजपत्रित अधिसूचना जारी कर कर्नल एम हबीबुल्ला और समस्त प्रथम बिहार बटालियन का शुक्रिया अदा किया और तीन सिरों वाले अशोक सिंह को बिहार के राजकीय चिह्न के तौर पर अपनाया गया।

आज़ादी के बाद इसी तीन सिरों वाले सिंह को भारत के राजकीय चिह्न के तौर पर अपनाया गया है.

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed