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बजट 2018: आधी आबादी की नहीं सुनी बात, महिलाएं निराश

Thu, 01 Feb 2018 08:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 01 Feb 2018 08:28 PM IST
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india budget 2018: Womens are totally neglected in India Budget 2018
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट पेश किया। यह पूरा बजट कृषि केंद्रित था। ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार सुषमा रामचंद्रन का। सुषमा रामचंद्रन ने कहा कि 2019 में आम चुनाव होने हैं तब सरकार का अंशकालिक बजट ही आएगा।
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सरकार से इस बार कई प्रकार की उम्मीदें लगाईं गईं थी और यह माना जा रहा था कि सरकार इसबार चुनाव को ध्यान में रखकर बजट पेश करेगी। लेकिन amarujala.com के बजट लाइव सेशन में इस बजट में महिलाओं के क्या मिला विषय पर मौजूद थीं वरिष्ठ पत्रकार सुषमा रामचंद्रन और चार्टेड एकाउंटेट शिखा सिंघल। 
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सुषमा ने कहा कि पूरा बजट सिर्फ किसान को फोकस किया है। जिसमें कई तरह की योजनाओं की भी बात की है लेकिन सरकार की बड़ी बात है नेशनल हेल्थ सेक्टर की।  
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10 करोड़ परिवार को 5 लाख का बीमा देने की घोषणा की है जो एक बड़ी बात के रूप में देखा जाना चाहिए। लेकिन ये बात नहीं भूलनी चाहिए कि अगर किसी परिवार में पांच लोग हैं तो बीमा का एक लाख रूपए दिया जाएगा जो गरीबों के लिए एक बड़ी योजना है। स्वास्थ्य हमारा बहुत पीछे था इससे गरीबों को बहुत बड़ा फायदा होगा।

जहां तक महिलाओं के लिए बजट की बात है तो पहले बजट को देंखे तो पिछले बजटों में महिलाओं के लिए काफी योजनाएं पेश की गई थीं लेकिन इस बार महिला के लिए इसमें कुछ खास नहीं रहा। लेकिन कुछ चीजें थोड़ी अलग जरूर हैं जैसे  बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के आम बजट में महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। सरकार के नए फैसले के तहत महिला कर्मियों के लिए पीएफ कटौती 8 पर्सेंट करने की बात की है।

बजट में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की संचालित योजनाओं में कामकाजी महिलाओं को भी अधिक बचत का तोहफा दिया है। इससे उन महिलाओं को काफी राहत मिलेगी जिनका वेतन कम है।

ऐसी महिलाएं कम वेतन कटवाकर खर्च के लिए ज्यादा सैलरी अपने पास रख सकती हैं। जेटली ने कामकाजी महिलाओं के ईपीएफ में योगदान को कम करके 12 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया है। लेकिन ये नौकरी के पहले 3 साल में दिया जाएगा। ये बात ध्यान देने की है।


 

मुद्रा लोन का उपयोग  75 फीसदी महिलाएं करती हैं

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सुषमा रामचंद्रन
वहीं गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी देने की बात कही जो महिलाओं को नया फायदा देगी और गरीब महिलाओं को चूल्हे की वजह से जो परेशानी होती है उनके हेल्थ पर प्रभाव पड़ता है उसपर भी खासा असर पड़ेगा। 

मुद्रा लोन का उपयोग  75 फीसदी महिलाएं करती हैं उसका लैंडिग रेट बढ़ा दिया है जिसका फायदा महिला इंटरपेन्योर को मिलेगा। लेकिन ये सारी चीजें इतनी अधिक नहीं है जिसके बारे में कहा जाए कि महिलाओं के लिए कुछ खास किया गया है। 

इस बातचीत में हमारी दूसरी गेस्ट शिखा सिंघल ने कहा कि टैक्स स्लैब में कामकाजी महिलाओं को छूट दिए जाने की योजना थी लेकिन  उसमें भी कोई फायदा नहीं दिया गया है।

लेकिन आधार से लिंक किए जाने के कारण कुछ कंपनियां जो पीएफ नहीं दिया करती थीं या कुछ गड़बड़ियां किया करती थीं वो आधार लिंक होने की वजह से नहीं कर पाएंगी और इसका फायदा महिलाओं को होगा कहीं न कहीं।

वहीं टैक्स स्लैब को लेकर भी महिलाओं के लिए कुछ खास नहीं रहा है। लेकिन सभी को 40,000 का स्टैंर्डड डिडक्शन दिया गया तो लगा कि अच्छा है लेकिन बारीकी से जानने के बाद पता चला कि आपको कोई फायदा नहीं मिला है। सीए शिखा ने बताया कि पूरा फायदा महज 5000 प्रति वर्ष की छूट मिलेगी जो न के बराबर होगा। 

 महिला स्वास्थ्य  सरकार का प्रमुख मुद्दा तो रही है लेकिन बजट में सेनीटरी नैपकिन को लेकर भी कोई छूट न देने की वजह से काफी निराशा रही है। महिला सुरक्षा मामले में भी सरकार ने विशेष योजना नहीं दी है। निर्भया फंड में क्या हुआ वन स्टॉप सेंटर पर भी कुछ नहीं गया। 

महिलाओं पर आए बजट पर  डॉ रंजना कुमारी, निदेशक सेंटर फॉर सोशल रिसर्च ने कहा कि सरकार महिला सशक्तीकरण पर जोर देकर आधी आबादी को खुश करने का प्रयास कर रही है।

यह आशा की जा रही थी कि सरकार महिलाओं के लिए खजाना खोलेगी लेकिन बजट में महिलाओं खासकर महिला सुरक्षा को अनदेखा किया गया है। दुर्भाग्य की बात है कि बजट में महिला सशक्तीकरण की बात कहीं नहीं दिख रही।

महिला सुरक्षा के लिए निर्भया फंड में बढ़ोतरी नहीं की गई। टैक्स स्लैब में बदलाव किए जाने, कामकाजी महिलाओं के लिए वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनाकर लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं की गई। महिलाओं के लिए ईपीएफ की सीमा को 8 फीसदी किया गया है। इससे और सेनिटेशन पर आए बजट से शायद महिलाओं को थोड़ा लाभ मिले।

वहीं स्वाति जयहिंद, अध्यक्ष दिल्ली महिला आयोग ने देश में महिलाओं की आधी आबादी है लेकिन बजट में इनका ध्यान नहीं रखा गया। जब बच्चियों व महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, तब भी बजट में महिला सुरक्षा की बात न करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सेस लगा दिया गया है। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के बजट में खास बढ़ोतरी नहीं की गई। निर्भया फंड के लिए भी कुछ खास नहीं किया गया। खास से महिलाओं व बच्चों को सेफ्टी दी जा सकेगी। इस बजट ने काफी हताश ही किया है।
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