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El Nino: 1901 के बाद से इस साल भारत में होगा सबसे सूखा अगस्त; 32 प्रतिशत कम हुई बारिश

Tue, 29 Aug 2023 09:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 29 Aug 2023 09:19 PM IST
सार

आम तौर पर अगस्त माह में 254.9 मिमी बारिश होती है, जो मानसून के मौसम के दौरान होने वाली बारिश का लगभग 30 प्रतिशत है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार भारत में अगस्त 2005 में 25 प्रतिशत, 1965 में 24.6 प्रतिशत; 1920 में 24.4 प्रतिशत; 2009 में 24.1 प्रतिशत और 1913 में 24 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
 

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India braces for driest August since 1901 amid intensifying El Nino
सूखा। - फोटो : getty

विस्तार

बीते महीनों में भले ही देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा गई हो, बावजूद इसके वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञों ने कहा है कि इस साल अगस्त माह भारत के इतिहास में सबसे सूखे अगस्त में से एक हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा 1901 के बाद पहली बार होगा। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ये अल नीनो की स्थितियों के तीव्र होने का परिणाम है।

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 उन्होंने कहा कि इसके अलावा, इस साल का मानसून 2015 के बाद से सबसे अधिक शुष्क हो सकता है, जिसमें 13 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी ने बताया कि अगस्त में अब तक 32 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। साथ ही अगले तीन दिन में देश के एक बड़े हिस्से में बारिश कम होने की भविष्यवाणी की गई है। इन दोनों को देखते हुए भारत 1901 के बाद से सबसे सूखा अगस्त दर्ज किया जा सकता है। बता दें कि अगस्त को खत्म होने में अभी तीन दिन बाकी है। 
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आम तौर पर अगस्त माह में 254.9 मिमी बारिश होती है, जो मानसून के मौसम के दौरान होने वाली बारिश का लगभग 30 प्रतिशत है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार भारत में अगस्त 2005 में 25 प्रतिशत, 1965 में 24.6 प्रतिशत; 1920 में 24.4 प्रतिशत; 2009 में 24.1 प्रतिशत और 1913 में 24 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
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क्या होता है एमजेओ?
आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अगस्त में सामान्य से कम बारिश का मुख्य कारण अल नीनो है। इसके साथ ही ‘मैडेन जूलियन ऑसिलेशन’(एमजेओ) का प्रतिकूल चरण है। बता दें कि एमजेओ एक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है जो दुनियाभर में मौसम की गतिविधियों को प्रभावित करती है।

महापात्र ने कहा कि एमजेओ के अनुकूल चरण के कारण कम दबाव प्रणाली न होने पर भी बारिश होती है। एमजेओ के अनुकूल चरण के कारण जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी।

आगे उन्होंने कहा कि अगस्त में सामान्य से कम बारिश का एक दूसरा कारण दक्षिण चीन सागर में कम दबाव वाली प्रणालियों की कम संख्या भी है। दक्षिण चीन सागर के ऊपर विकसित होने वाली कम दबाव वाली प्रणालियां आमतौर पर पश्चिम की ओर बढ़ती हैं, वियतनाम और थाईलैंड को पार करने के बाद उत्तरी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचती हैं।

क्या होता है अल नीनो प्रभाव और यह कैसे जलवायु को प्रभावित करता है
सामान्य परिस्थितियों में प्रशांत महासागर में जब व्यापारिक हवाएं चलती हैं तो वह भूमध्य रेखा से होते हुए अपने साथ प्रशांत महासागर की सतह पर मौजूद गर्म पानी को दक्षिण अमेरिका से एशिया की तरफ ले जाती हैं। सतह के गर्म पानी की जगह समुद्र की गहराईयों का ठंडा पानी सतह पर आ जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को अपवेलिंग (उत्थान) कहा जाता है। अल नीनो प्रभाव में यह प्रक्रिया बदल जाती है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर होता है। 


अल नीनो प्रभाव के दौरान प्रशांत महासागर से व्यापारिक हवाएं धीमी चलती हैं, जिसके प्रभाव से प्रशांत महासागर की सतह का गर्म पानी अमेरिका के पश्चिमी तटों से होते हुए पूर्व की तरफ चला जाता है। इसके चलते पश्चिम से पूर्व की तरफ चलने वाली तेज हवाएं, जिन्हें प्रशांत जेट स्ट्रीम कहा जाता है, वह अपनी तटस्थ जगह यानी दक्षिण की तरफ चली जाती हैं। इसके चलते अमेरिका, कनाडा में सामान्य से ज्यादा गर्मी बढ़ जाती है। वहीं अमेरिका अरब तट और दक्षिण पूर्व के देशों में भारी बारिश होती है, जिससे बाढ़ की घटनाएं बढ़ जाती हैं। 

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