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नेपाल की चीन से बढ़ती करीबी भारत के लिए चिंता, पीएम ओली के दौरे से भारत सतर्क
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Updated Mon, 02 Apr 2018 05:40 AM IST
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ओपी ओली
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नेपाल की चीन से बढ़ती नजदीकियों के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री ओपी शर्मा ओली की यात्रा को लेकर भारत काफी सतर्क है। भारत नई सरकार की भावी नीतियों की थाह लेना चाहता है। चीन के अलावा सार्क सम्मेलन पर उसकी मालदीव और श्रीलंका के साथ नया रुख अपनाने के संकेत से भी भारत चिंतित है। गौरतलब है कि ओली दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा पर भारत आ रहे हैं।
नेपाल में कांग्रेस के इतर वाम दलों का शासन हमेशा से भारत को असहज करता रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण वाम दलों के शासन में नेपाल की चीन से बढ़ती नजदीकी है। इस बार समस्या सार्क सम्मेलन को लेकर नेपाल की पाकिस्तान से नजदीकी है। नेपाल की नई सरकार मालदीव और श्रीलंका की तर्ज पर पाकिस्तान में सार्क सम्मेलन बुलाए जाने का इच्छुक है। इसके अलावा मालदीव में आपातकाल सहित अन्य राजनीतिक घटनाक्रम पर भी नेपाल का रुख पहले की तरह भारत के प्रति सकारात्मक नहीं है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर नेपाली पीएम ने सार्क सम्मेलन पाकिस्तान में कराए जाने का प्रस्ताव रखा, तो भारत की ओर से सख्त प्रतिक्रिया झेलनी होगी। निश्चित रूप से संविधान के सवाल पर पहले से उलझे कूटनीतिक रिश्ते और उलझेंगे। उड़ी आतंकी हमले के बाद भारत के विरोध के चलते इस्लामाबाद का 2016 का सार्क सम्मेलन रद्द होने के बाद अब श्रीलंका, मालदीव और नेपाल वहीं सम्मेलन कराना चाहते हैं। हालांकि भारत अपने पुराने रुख पर कायम है, लेकिन विभिन्न मसलों पर नेपाल के रुख के अनुरूप ही अपनी भावी रणनीति तय करेगा।
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नेपाल में कांग्रेस के इतर वाम दलों का शासन हमेशा से भारत को असहज करता रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण वाम दलों के शासन में नेपाल की चीन से बढ़ती नजदीकी है। इस बार समस्या सार्क सम्मेलन को लेकर नेपाल की पाकिस्तान से नजदीकी है। नेपाल की नई सरकार मालदीव और श्रीलंका की तर्ज पर पाकिस्तान में सार्क सम्मेलन बुलाए जाने का इच्छुक है। इसके अलावा मालदीव में आपातकाल सहित अन्य राजनीतिक घटनाक्रम पर भी नेपाल का रुख पहले की तरह भारत के प्रति सकारात्मक नहीं है।
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सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर नेपाली पीएम ने सार्क सम्मेलन पाकिस्तान में कराए जाने का प्रस्ताव रखा, तो भारत की ओर से सख्त प्रतिक्रिया झेलनी होगी। निश्चित रूप से संविधान के सवाल पर पहले से उलझे कूटनीतिक रिश्ते और उलझेंगे। उड़ी आतंकी हमले के बाद भारत के विरोध के चलते इस्लामाबाद का 2016 का सार्क सम्मेलन रद्द होने के बाद अब श्रीलंका, मालदीव और नेपाल वहीं सम्मेलन कराना चाहते हैं। हालांकि भारत अपने पुराने रुख पर कायम है, लेकिन विभिन्न मसलों पर नेपाल के रुख के अनुरूप ही अपनी भावी रणनीति तय करेगा।
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