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Independence Day: आजाद भारत के पांच घोटाले, अगर ये ना होते तो हमारा इतिहास और सुनहरा होता
Sun, 14 Aug 2022 09:39 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sun, 14 Aug 2022 09:39 PM IST
सार
75 साल में देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे। खूब तरक्की की। देश के नाम कई बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है, लेकिन कुछ दाग भी लगे। ये दाग हैं घोटालों के।
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आजादी का अमृत महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हमारी आजादी को 75 साल पूरे हो गए हैं। 75 साल में देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे। खूब तरक्की की। देश के नाम कई बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है, लेकिन कुछ दाग भी लगे। ये दाग हैं घोटालों के। यूं तो आजादी के बाद अब तक देश में लाखों करोड़ों के कई घोटाले हो चुके हैं, लेकिन हम आपको पांच बड़े घोटालों के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं...
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जीप घोटाला
- फोटो : अमर उजाला
1. जीप खरीद घोटाला (1948)
देश की आजादी के तुरंत बाद यानी 1948 में जीप घोटाला हुआ। दरअसल, पाकिस्तानी हमले के बाद भारतीय सेना को जीपों की जरूरत थी। उस वक्त 300 पाउंड प्रति जीप के हिसाब से 1500 जीपों के लिए आदेश दिए गए थे, लेकिन 1949 तक महज 155 जीपें पहुंच पाईं। इनमें भी ज्यादातर जीपें तय मानक पर खरी नहीं उतरीं। जांच में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वीके मेनन आरोप लगे। कई साल चली जांच के बाद 1955 में इस मामले को बंद कर दिया गया। जिन मेनन पर घोटाले के आरोप लगे थे उन्हें बाद में जवाहर लाल नेहरू ने अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया।
देश की आजादी के तुरंत बाद यानी 1948 में जीप घोटाला हुआ। दरअसल, पाकिस्तानी हमले के बाद भारतीय सेना को जीपों की जरूरत थी। उस वक्त 300 पाउंड प्रति जीप के हिसाब से 1500 जीपों के लिए आदेश दिए गए थे, लेकिन 1949 तक महज 155 जीपें पहुंच पाईं। इनमें भी ज्यादातर जीपें तय मानक पर खरी नहीं उतरीं। जांच में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वीके मेनन आरोप लगे। कई साल चली जांच के बाद 1955 में इस मामले को बंद कर दिया गया। जिन मेनन पर घोटाले के आरोप लगे थे उन्हें बाद में जवाहर लाल नेहरू ने अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया।
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बोफोर्स घोटाला
- फोटो : अमर उजाला
2. बोफोर्स घोटाला (1987)
जीप घोटाले के बाद 1951 में साइकिल आयात घोटाला सामने आया। इसके बाद 1956 में बीएचयू फंड घोटाला, 1958 में हरिदास मूंदड़ा मामला, 1960 में तेजा लोन स्कैम, 1963 में प्रताप सिंह कैरों स्कैम, 1965 में पटनायक 'कलिंग ट्यूब्स' मामला, 1974 में मारुति घोटाला, 1976 में कुओ ऑयल डील, 1981 में अंतुले ट्रस्ट, 1987 में एचडीडब्ल्यू दलाली मामला सामने आया।
ये वो मामले थे, जिनका खुलासा देश की आज़ादी के बाद सबसे पहले हुआ। इसके बाद हुआ बोफोर्स घोटाला। इसकी गूंज आज भी संसद से लेकर सड़क तक सुनाई देती है। इसमें देश की कई बड़ी दिग्गज हस्तियों का नाम आया था।
दरअसल 1986 में स्वीडन की एबी बोफोर्स कंपनी से भारत सरकार ने 155 तोपें खरीदने का सौदा तय किया गया। कहा जाता है कि इस सौदे को पाने के लिए 64 करोड़ रुपए की दलाली दी गई थी। ऑटोवियो क्वात्रोची और प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम इस घोटाले में सामने आया था। इस घोटाले को मुद्दा बनाकर विश्वनाथ प्रतापसिंह सत्ता में आए थे।
जीप घोटाले के बाद 1951 में साइकिल आयात घोटाला सामने आया। इसके बाद 1956 में बीएचयू फंड घोटाला, 1958 में हरिदास मूंदड़ा मामला, 1960 में तेजा लोन स्कैम, 1963 में प्रताप सिंह कैरों स्कैम, 1965 में पटनायक 'कलिंग ट्यूब्स' मामला, 1974 में मारुति घोटाला, 1976 में कुओ ऑयल डील, 1981 में अंतुले ट्रस्ट, 1987 में एचडीडब्ल्यू दलाली मामला सामने आया।
ये वो मामले थे, जिनका खुलासा देश की आज़ादी के बाद सबसे पहले हुआ। इसके बाद हुआ बोफोर्स घोटाला। इसकी गूंज आज भी संसद से लेकर सड़क तक सुनाई देती है। इसमें देश की कई बड़ी दिग्गज हस्तियों का नाम आया था।
दरअसल 1986 में स्वीडन की एबी बोफोर्स कंपनी से भारत सरकार ने 155 तोपें खरीदने का सौदा तय किया गया। कहा जाता है कि इस सौदे को पाने के लिए 64 करोड़ रुपए की दलाली दी गई थी। ऑटोवियो क्वात्रोची और प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम इस घोटाले में सामने आया था। इस घोटाले को मुद्दा बनाकर विश्वनाथ प्रतापसिंह सत्ता में आए थे।
3. हर्षद मेहता कांड (1992)
बोफोर्स के बाद साल 1992 में हर्षद मेहता कांड सामने आया। स्टॉक मार्केट में हर्षद का बड़ा नाम था। आरोप है कि हर्षद ने धोखाधाड़ी से बैंकों का पैसा स्टॉक मार्केट में निवेश कर दिया, जिससे स्टॉक मार्केट को करीब 5000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। इस पर कई फ़िल्म भी बन चुकी है। बैंक अफसरों के मिलीभगत से हर्षद ने इतने बड़े स्कैम को अंजाम दिया था।
बोफोर्स के बाद साल 1992 में हर्षद मेहता कांड सामने आया। स्टॉक मार्केट में हर्षद का बड़ा नाम था। आरोप है कि हर्षद ने धोखाधाड़ी से बैंकों का पैसा स्टॉक मार्केट में निवेश कर दिया, जिससे स्टॉक मार्केट को करीब 5000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। इस पर कई फ़िल्म भी बन चुकी है। बैंक अफसरों के मिलीभगत से हर्षद ने इतने बड़े स्कैम को अंजाम दिया था।
4.कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला (2011)
2010 में भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की थी। भव्य स्तर पर इसका आयोजन हुआ था। पूरी दुनिया से खिलाड़ी आए थे। आयोजन के एक साल बाद यानी 2011 में इसपर बड़ा दाग लगा। आरोप लगा कि इसमें
करीब 70 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है। इस मामले में मुख्य तौर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी और उनके सहयोगियों के नाम शामिल रहे।
2010 में भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की थी। भव्य स्तर पर इसका आयोजन हुआ था। पूरी दुनिया से खिलाड़ी आए थे। आयोजन के एक साल बाद यानी 2011 में इसपर बड़ा दाग लगा। आरोप लगा कि इसमें
करीब 70 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है। इस मामले में मुख्य तौर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी और उनके सहयोगियों के नाम शामिल रहे।
5. टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला (2010)
ये बात 2010 की है। देश में इंटरनेट स्पीड को बढ़ाने के लिए मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की गई। कहा जाता है कि इस पूरे मामले में देश के खजाने को 176 हजार करोड़ की हानि हुई। इस मामले के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व संचार मंत्री ए. राजा को जिम्मेदार ठहराया गया। दिसंबर 2017 में सीबीआई कोर्ट ने इस मुकदमे के सभी आरोपियों को रिहा कर दिया। कोर्ट ने कहा की ये गलत मुकदमा किया गया था। ऐसा माना गया कि यह घोटाला हुआ ही नहीं था।
ये बात 2010 की है। देश में इंटरनेट स्पीड को बढ़ाने के लिए मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की गई। कहा जाता है कि इस पूरे मामले में देश के खजाने को 176 हजार करोड़ की हानि हुई। इस मामले के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व संचार मंत्री ए. राजा को जिम्मेदार ठहराया गया। दिसंबर 2017 में सीबीआई कोर्ट ने इस मुकदमे के सभी आरोपियों को रिहा कर दिया। कोर्ट ने कहा की ये गलत मुकदमा किया गया था। ऐसा माना गया कि यह घोटाला हुआ ही नहीं था।
इन घोटालों की भी खूब हुई चर्चा
1. विजय माल्या प्रकरण : कई बैंकों से करीब नौ हजार करोड़ रुपए का उद्योगपति विजय माल्या ने लिया था। माल्या ने समय पर लोन का भुगतान नहीं किया। बैंकों ने उसे डिफॉल्ट घोषित करना शुरू किया तो वह देश छोड़कर भाग गया। अभी विजय माल्या ब्रिटेन में रह रहा है। केंद्र सरकार की एजेंसियां माल्या से रिकवरी में जुटी हैं। माल्या की संपत्तियों को सीज कर दिया गया है और उसकी नीलामी भी हो रही है। माल्या के खिलाफ एक केस ब्रिटेन की अदालत में भी चल रहा है।
2. पीएनबी घोटाला : इस मामले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी हैं। दोनों ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए पंजाब नैशनल बैंक में 11,300 करोड़ रुपए का घोटाला कर डाला। देश के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड के बाद दोनों फरार हैं। केंद्र सरकार की एजेंसियों ने इन दोनों की संपत्ति सीज कर दी है। उसे नीलम करके भरपाई की कोशिश की जा रही है।
1. विजय माल्या प्रकरण : कई बैंकों से करीब नौ हजार करोड़ रुपए का उद्योगपति विजय माल्या ने लिया था। माल्या ने समय पर लोन का भुगतान नहीं किया। बैंकों ने उसे डिफॉल्ट घोषित करना शुरू किया तो वह देश छोड़कर भाग गया। अभी विजय माल्या ब्रिटेन में रह रहा है। केंद्र सरकार की एजेंसियां माल्या से रिकवरी में जुटी हैं। माल्या की संपत्तियों को सीज कर दिया गया है और उसकी नीलामी भी हो रही है। माल्या के खिलाफ एक केस ब्रिटेन की अदालत में भी चल रहा है।
2. पीएनबी घोटाला : इस मामले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी हैं। दोनों ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए पंजाब नैशनल बैंक में 11,300 करोड़ रुपए का घोटाला कर डाला। देश के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड के बाद दोनों फरार हैं। केंद्र सरकार की एजेंसियों ने इन दोनों की संपत्ति सीज कर दी है। उसे नीलम करके भरपाई की कोशिश की जा रही है।