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Hindi News ›   India News ›   Independence Day 2020 : On The Way To The Country, The Whole Sky Near Your Freedom

वतन की राह में... अपनी आजादी के पास सारा आकाश

Sat, 15 Aug 2020 07:21 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Sat, 15 Aug 2020 07:21 AM IST
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Independence Day 2020 : On The Way To The Country, The Whole Sky Near Your Freedom
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

मन में हो उड़ान तो हमें चाहिए होता है आसमान। उस आसमान में जब हम अपनी उम्मीदों, सपनों, और मेहनत के इंद्रधनुष को खिलते देखते हैं तो हमें लगता है, हमने अपनी आजादी को पा लिया है। इस आजादी को अभी और खिलना है...क्योंकि एक ठहरी हुई आजादी के आकांक्षी नहीं हैं हम...! स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपनी आजादी के तीन चेहरे- रंगों में आजादी, हंसी में आजादी और तकनीक में आजादी।

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आकाश से पाताल तक अपनी पहुंच: वी.सी. रॉयब्रॉडबैंड साइंटिस्ट
तकनीक का साथ हो तो आजादी का आसमान अधिक खुला नजर आता है। जो चीज हमारे दायरे में नहीं थी या जिसे हासिल करने की हमारी क्षमता सीमित थी, वहां तक हमारी पहुंच बढ़ गई है। इससे हमारी वास्तविक आजादी का दायरा पहले से व्यापक हुआ है।
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सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इंटरनेट से शुरू कर भारत अब डेटा इमेजिंग की तरफ बढ़ रहा है। अंतरिक्ष से लेकर समुद्र की अतल गहराइयों तक हमने अपना लोहा मनवाया है। तकनीक पर नियंत्रण की बात करें या उसके विकास की, भारत का परचम लहरा रहा है।    

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जिंदगी को खुलकर जीने का रास्ता: जॉनी लीवर मशहूर, हास्य अभिनेता

मन की आजादी, सुकून की नींद और पेट भर भोजन के अलावा जिंदगी को खुलकर जीने के लिए और क्या-क्या चाहिए, यह सवाल हर इंसान को कभी न कभी परेशान जरूर करता है। आंखों में कभी-कभी इतने सपने मंडराने लगते हैं कि सोच का दायरा छोटा लगने लगता है।

आजादी की किलकारियां होठों से निकलकर चेहरे की हर लकीर से खुशबू बिखेरती हैं। इसी खुशबू में आजादी के रंग भी खिलते महसूस होते हैं। ऐसा लगता है कि जीवन से हंसने की आजादी छिन सी गई है। पहले जिंदगी बहुत स्वाभाविक थी, इसलिए आदमी खुलकर हर पल को जीता था। अब लोग इस तरह की जीवनशैली से परहेज करने लगे हैं।

डर रहता है कि खुलकर जीने से कहीं कमजोरियां बाहर न आ जाएं। हम किसी से मिलते भी हैं तो होंठों को एक इंच फैलाते हुए सिर झुकाकर 'हेलो' बोलने को ही अभिवादन समझ लेते हैं। बात-बात पर लगने वाले ठहाके नफासत की बनावटी मुस्कान में गुम हो गए हैं। जिंदगी की छोटी-मोटी घटनाओं में अब भी हंसी के लिए काफी गुंजाइश बची है, बशर्ते हम चेहरे की लकीरों से इसे आजाद करें।

उम्मीद के सभी चेहरे हैं यहां: अर्पणा कौर, सुप्रसिद्ध चित्रकार

रंग हमेशा अपने साथ उम्मीद का एक व्याकरण लेकर चलते हैं और उम्मीद का सीधा संबंध मनुष्य के स्वाभिमान, हक और आजादी से जुड़ा हुआ है। रंग जिंदगी का एक तजुर्बा है। किसी न किसी रंग से घिरे हैं हम। कई बार ये रंग हमें रास्ता भी दिखाते हैं और कई बार हमारे रास्ते को धुंधला भी करते हैं।

लेकिन रंग के बिना कोई संसार नहीं बसता और उम्मीदों के बिना किसी आजादी की बात पूरी नहीं हो सकती। इस उम्मीद के कई चेहरे हो सकते हैं। एक चेहरा धरती का भी हो सकता है। आकाश का भी। पानी, आग और हवा का भी। ध्यान से देखेंगे तो उस चेहरे में हरियाली का आंगन और पड़ोस की पगडंडी भी हो सकती है।

वहां जानवर, इंसान, और ईश्वर भी होंगे। सच की धूप होगी अपनी परछाई भी होगी और दूसरे की छाया भी। इन चेहरों के बीच से ही आजादी की राह निकलती है...जिस दिन जिंदगी के रंगों में डूबकर उम्मीदों के ये चेहरे सबके सामने होंगे...हमारी आजादी का वह सबसे बड़ा दिन होगा...और उस दिन आकाश में रंगों का सबसे बड़ा इंद्रधनुष खिलेगा।

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