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Meghalaya: मेघालय को भी इनर लाइन परमिट में शामिल करें, सीएम संगमा बोले- इससे अवैध अप्रवासियों पर लगेगी रोक
Thu, 22 Feb 2024 06:55 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिलांग
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 22 Feb 2024 06:55 AM IST
सार
एजेंसी से बातचीत में संगमा ने बताया कि सीएए को लेकर उनकी कुछ चिंताएं थीं, लेकिन केंद्र सरकार ने छठी अनुसूची के क्षेत्रों को इससे बाहर रखकर चिंताओं को खत्म किया। मेघालय के अधिकतर क्षेत्र इसके तहत बाहर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले सीएए में यह छूट नहीं थी।
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मेघालय के सीएम कोनराड संगमा
- फोटो : Social Media
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विस्तार
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा चाहते हैं कि इनर लाइन परमिट (आईएलपी) व्यवस्था में उनके राज्य को भी शामिल किया जाए। ऐसा करने से जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होगा, तो विदेशी अप्रवासी उनके राज्य में नहीं फैल सकेंगे। आईएलपी विशेष अनुमति व्यवस्था है, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर में लागू है। यह देश के दूसरे हिस्सों से यहां आने वालों के लिए बनी है।
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एजेंसी से बातचीत में संगमा ने बताया कि सीएए को लेकर उनकी कुछ चिंताएं थीं, लेकिन केंद्र सरकार ने छठी अनुसूची के क्षेत्रों को इससे बाहर रखकर चिंताओं को खत्म किया। मेघालय के अधिकतर क्षेत्र इसके तहत बाहर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले सीएए में यह छूट नहीं थी। जब उन्होंने चिंता जताई और गृह मंत्री से मिले तो यह प्रदान की गई। अब केवल यूरोपीय वार्ड कहा जाने वाला शिलांग का कुछ वर्ग किमी क्षेत्र गैर-अनुसूचित है।
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चुनाव से पहले जारी होंगे सीएए के नियम
संसद दिसंबर 2019 में सीएए पारित कर चुकी है। इसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 के पहले भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी व ईसाई समुदायों को नागरिकता दी जाएगी। हाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि जल्द होने जा रहे लोकसभा चुनाव से पहले सीएए लागू करने के नियम जारी होंगे। इसे छठी अनुसूची में शामिल असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के जनजातीय हिस्सों में लागू नहीं किया जाएगा।
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इसलिए जरूरी
संगमा ने कहा कि मेघालय की बांग्लादेश के साथ 400 किमी लंबी सीमा है। पड़ोसी राज्यों में भी कुछ चीजें होती हैं, तो उनके राज्य पर असर डाल सकती हैं। वे चाहते हैं कि गैर-अनुसूचित क्षेत्रों को भी सीएए के तहत मिली छूट के दायरे में लाया जाए। भले यह छोटा क्षेत्र है, फिर भी इसके लिए केंद्र से निवेदन किया गया है।