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Manipur: हिंसा प्रभावित मणिपुर में विरोधी समूह कर रहे ड्रोन का इस्तेमाल; एक-दूसरे को बना रहे निशाना
Sun, 09 Jul 2023 06:54 PM IST
रोहित राज
नेशनल डेस्क, अमर उजाला, विष्णुपर (मणिपुर)
नेशनल डेस्क, अमर उजाला, विष्णुपर (मणिपुर)
Published by: रोहित राज
Updated Sun, 09 Jul 2023 06:54 PM IST
सार
अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण पश्चिमी मणिपुर के फौगाकचाओ, कांगवी बाजार और तोरबंग बाजार में इन क्वॉडकॉप्टर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। यहां दोनों समुदायों के गांव आस-पास बसे हुए हैं।
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मणिपुर हिंसा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हिंसा प्रभावित मणिपुर राज्य में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अच्छे और बुरे दोनों के लिए हो रहा है। एक तरफ हालात सुधारने के लिए सुरक्षा बल ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ लोग इसके जरिए (ड्रोन या क्वाडकॉप्टर) एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि एक-दूसरे से नफरत रखने वाले कुछ गुट क्वॉडकॉप्टर का इस्तेमाल एक-दूसरे की स्थिति का पता लगाने के लिए कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मेइती समुदाय के लोग अधिकतर इस क्वॉडकॉप्टर का इस्तेमाल इंफाल घाटी में कर रहे हैं, जबकि कुकी समुदाय के लोग इनका इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों में कर रहे हैं। दक्षिण पश्चिमी मणिपुर के फौगाकचाओ, कांगवी बाजार और तोरबंग बाजार में इन क्वॉडकॉप्टर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। यहां दोनों समुदायों के गांव आस-पास बसे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बावजूद सेनापति जिले का लोइबोल और विष्णुपुर जिले का लियेमारम हिंसा का केंद्र बना हुआ है। चिंता की बात यह है कि ये क्वॉडकॉप्टर बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं और दिन हो या रात लगातार समूहों द्वारा एक-दूसरे के क्वॉडकॉप्टर को गिराने के लिए गोलीबारी की जा रही है।
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सेना ड्रोन से लोगों की मदद कर रही
दूसरी ओर सेना और असम राइफल्स राहत एवं बचाव कार्य के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी मदद से दक्षिण-पूर्वी मणिपुर के काकचिंग जिले में करीब 2000 आम नागरिकों को बचाया भी गया है।
बाजार में खुलेआम मिलते हैं यह उपकरण
क्वाडकॉप्टर यानी हेलिकॉप्टर जैसे चार पंखों से उड़ने वाले यह उपकरण स्थानीय बाजारों में खुलेआम मिल रहे हैं। इनमें मोटर व प्रोपेलर लगे होते हैं जो इन्हें हवा में एक ही जगह रुकने की क्षमता देते हैं। इसी वजह से यह निगरानी के लिए उपयोगी माने जाते हैं। इनमें लगे कैमरे संचालक को सीधा प्रसारण कर सकते हैं। यह ड्रोन से अलग हैं, जिन्हें लगातार उड़ना पड़ता है, वे हवा में एक जगह रुक नहीं पाते।
पुलिस बंटी, कुकी संभाल रहे पहाड़ी इलाका तो घाटी में मैतेई
हिंसाग्रस्त मणिपुर में पिछले कुछ समय से कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि खुद मणिपुर की पुलिस दो हिस्सों में बंट गई है। कुकी समुदाय से संबंधित पुलिसकर्मी पहाड़ी क्षेत्रों में चले गए, जबकि मैतेई पुलिसकर्मी घाटी में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मणिपुर पुलिस के दो हिस्सों मे बंटने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही कई पुलिसकर्मी ड्यूटी छोड़कर चले गए। हालांकि, कई अधिकारी इस बात से इन्कार कर रहे हैं। हिंसा के बीच मणिपुर के डीजीपी को बदलते हुए राजीव सिंह को कमान दी गई। सूत्रों के मुताबिक पुलिस के दो हिस्सों में बंटी होने से उनको काफी समस्या हुई। राज्य में करीब 45 हजार पुलिसकर्मी हैं। पुलिस के दो हिस्सों में बंटे होने के कारण भारतीय सेना और सुरक्षाबलों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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अधिकारियों ने बताया कि मेइती समुदाय के लोग अधिकतर इस क्वॉडकॉप्टर का इस्तेमाल इंफाल घाटी में कर रहे हैं, जबकि कुकी समुदाय के लोग इनका इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों में कर रहे हैं। दक्षिण पश्चिमी मणिपुर के फौगाकचाओ, कांगवी बाजार और तोरबंग बाजार में इन क्वॉडकॉप्टर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। यहां दोनों समुदायों के गांव आस-पास बसे हुए हैं।
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उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बावजूद सेनापति जिले का लोइबोल और विष्णुपुर जिले का लियेमारम हिंसा का केंद्र बना हुआ है। चिंता की बात यह है कि ये क्वॉडकॉप्टर बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं और दिन हो या रात लगातार समूहों द्वारा एक-दूसरे के क्वॉडकॉप्टर को गिराने के लिए गोलीबारी की जा रही है।
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सेना ड्रोन से लोगों की मदद कर रही
दूसरी ओर सेना और असम राइफल्स राहत एवं बचाव कार्य के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी मदद से दक्षिण-पूर्वी मणिपुर के काकचिंग जिले में करीब 2000 आम नागरिकों को बचाया भी गया है।
बाजार में खुलेआम मिलते हैं यह उपकरण
क्वाडकॉप्टर यानी हेलिकॉप्टर जैसे चार पंखों से उड़ने वाले यह उपकरण स्थानीय बाजारों में खुलेआम मिल रहे हैं। इनमें मोटर व प्रोपेलर लगे होते हैं जो इन्हें हवा में एक ही जगह रुकने की क्षमता देते हैं। इसी वजह से यह निगरानी के लिए उपयोगी माने जाते हैं। इनमें लगे कैमरे संचालक को सीधा प्रसारण कर सकते हैं। यह ड्रोन से अलग हैं, जिन्हें लगातार उड़ना पड़ता है, वे हवा में एक जगह रुक नहीं पाते।
पुलिस बंटी, कुकी संभाल रहे पहाड़ी इलाका तो घाटी में मैतेई
हिंसाग्रस्त मणिपुर में पिछले कुछ समय से कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि खुद मणिपुर की पुलिस दो हिस्सों में बंट गई है। कुकी समुदाय से संबंधित पुलिसकर्मी पहाड़ी क्षेत्रों में चले गए, जबकि मैतेई पुलिसकर्मी घाटी में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मणिपुर पुलिस के दो हिस्सों मे बंटने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही कई पुलिसकर्मी ड्यूटी छोड़कर चले गए। हालांकि, कई अधिकारी इस बात से इन्कार कर रहे हैं। हिंसा के बीच मणिपुर के डीजीपी को बदलते हुए राजीव सिंह को कमान दी गई। सूत्रों के मुताबिक पुलिस के दो हिस्सों में बंटी होने से उनको काफी समस्या हुई। राज्य में करीब 45 हजार पुलिसकर्मी हैं। पुलिस के दो हिस्सों में बंटे होने के कारण भारतीय सेना और सुरक्षाबलों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।