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30 साल में 6 बार कंपनी ने निकाला, कोर्ट ने हर बार मुआवजे के साथ वापस दिलाई नौकरी
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Thu, 28 Sep 2017 03:52 PM IST
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ये कहानी थोड़ी फिल्मी है। अक्सर अगर किसी कंपनी से किसी कर्मचारी को बार-बार निकाला जाए तो वो हार मान लेता है और दूसरी राह पकड़ लेता है लेकिन कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन में काम करने वाले 49 साल के वाईएन कृष्णमूर्ति को कॉरपोरेशन बार-बार नौकरी से निकाला जाता रहा और वो बार बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहे और नौकरी वापस पाते रहे। साथ ही कंपनी से मुआवजा भी लेते रहे।
मूर्ति ने 11 सितंबर 1987 को असिस्टेंट सेल्स ऑफिसर के पद पर कार्यभार संभाला था। कंपनी ने उन्हें पहले साल प्रोबेशन पर रखा लेकिन प्रदर्शन अच्छा न कह कर उनका प्रोबेशन पीरियड 1994 तक बढ़ा दिया। उसके बाद उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया। मूर्ति कॉरपोरेशन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। केस चला और मूर्ति को उनकी नौकरी वापस मिल गई।
पढ़ें: आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने का अधिकार डीजीपी को: हाईकोर्ट
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इसके बाद तो कॉरपोरेशन बार बार उन्हें निकालती रही और वो बार बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहे। यह सिलसिला करीब 30 सालों तक चला। मूर्ति को कॉरपोरेशन खराब व्यवहार बताकर नौकरी से निकाला था।
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मूर्ति ने 11 सितंबर 1987 को असिस्टेंट सेल्स ऑफिसर के पद पर कार्यभार संभाला था। कंपनी ने उन्हें पहले साल प्रोबेशन पर रखा लेकिन प्रदर्शन अच्छा न कह कर उनका प्रोबेशन पीरियड 1994 तक बढ़ा दिया। उसके बाद उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया। मूर्ति कॉरपोरेशन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। केस चला और मूर्ति को उनकी नौकरी वापस मिल गई।
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इसके बाद तो कॉरपोरेशन बार बार उन्हें निकालती रही और वो बार बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहे। यह सिलसिला करीब 30 सालों तक चला। मूर्ति को कॉरपोरेशन खराब व्यवहार बताकर नौकरी से निकाला था।
कोर्ट ने कहा 25 साल तक मूर्ति का प्रोबेशन पर रखना आश्चर्यजनक है
सबसे पहले 1997 में पहली बार निकाला था, 2001 में 5000 रुपए के मुआवजे के बाद नौकरी वापस हासिल की। फिर 2005 में निकाला गया और वो 10,000 रुपए मुआवजा के साथ वापस आए, 2006 में फिर निकाला और उन्होंने वापसी की। 2012 में फिर मूर्ति को निकाला और हाई कोर्ट ने फिर उनकी वापसी इबारत लिखी। छठी बार उन्हें 2013 में निकाला, उसका फैसला अब 22 सितंबर 2017 को आया है। और मूर्ति के पक्ष में आया है।
कोर्ट ने कहा 25 साल तक मूर्ति का प्रोबेशन पर रखना आश्चर्यजनक है। अगर मूर्ति का व्यवहार गलत था तो उसे उस आधार पर नौकरी से निकाला जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा कंपनी ने नहीं किया है।
कोर्ट का फैसला मूर्ति के हक में आया है और उसकी आय का 50 फीसदी देने को कहा है, साथ ही 25 हजार रुपये मुआवजा भी देने की बात कही है।
कोर्ट ने कहा 25 साल तक मूर्ति का प्रोबेशन पर रखना आश्चर्यजनक है। अगर मूर्ति का व्यवहार गलत था तो उसे उस आधार पर नौकरी से निकाला जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा कंपनी ने नहीं किया है।
कोर्ट का फैसला मूर्ति के हक में आया है और उसकी आय का 50 फीसदी देने को कहा है, साथ ही 25 हजार रुपये मुआवजा भी देने की बात कही है।