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दहेज हत्या साबित करने के लिए क्रूरता भी साबित करनी होगी: सुप्रीम कोर्ट

Sun, 20 Nov 2016 09:15 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 20 Nov 2016 09:15 PM IST
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in the case of dowry death cruelty evidence against the accused must sc
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गवाही अधिनियम के तहत दहेज हत्या के मामले में किसी आरोपी के खिलाफ अभियोग की धारणा तभी पुष्ट होगी जब इस बात का सबूत हो कि दहेज के लिए महिला को क्रूरता का शिकार बनाया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है दहेज हत्या के मामले में दोष सिद्ध करने का प्रावधान गवाही अधिनियम में है। इसमें कहा गया है कि दहेज हत्या के मामले में आरोपी के निर्दोष होने की धारणा की तुलना में उसे पहली नजर में ही दोषी तभी माना जाएगा जब महिला की मौत शादी के सात साल के भीतर हो जाए और क्रूरता के सबूत मिले।
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दहेज हत्या को लेकर एक बड़े फैसले में सुप्रीम कोर्ट जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अमिताभ राय की बेंच ने कहा है कि अगर अभियोजन पक्ष दहेज हत्या के आरोपी के खिलाफ यह साबित नहीं कर पाता है कि पत्नी के साथ क्रूरता की गई तो गवाही के अधिनियम के तहत उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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बेंच ने कहा कि इस संबंध में गवाही अधिनियम की धारा 113 बी तभी लागू होगी जब दहेज हत्या की शिकार महिला के साथ क्रूरता या प्रताड़ना का सबूत दिया जा सके। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि दहेज के लिए उसके साथ क्रूरता की गई और इसी वजह से उसकी मौत हुई। बेंच ने दहेज हत्या के एक मामले में एक महिला के ससुराल के कुछ सदस्यों को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि दहेज हत्या के मामले में क्रूरता साबित करनी होगी। 
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