{"_id":"5e28df868ebc3e4b4f228e00","slug":"in-old-judgments-article-370-case-will-be-sent-to-larger-bench-only-on-direct-confrontation","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुराने फैसलों में सीधे टकराव पर ही बड़ी पीठ को भेजेंगे अनुच्छेद-370 का मामला : सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पुराने फैसलों में सीधे टकराव पर ही बड़ी पीठ को भेजेंगे अनुच्छेद-370 का मामला : सुप्रीम कोर्ट
Thu, 23 Jan 2020 05:19 AM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 23 Jan 2020 05:19 AM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट कहा कि अनुच्छेद-370 का मुद्दा फिलहाल सात सदस्यीय बड़ी सांविधानिक पीठ को नहीं भेजा जाएगा। पांच सदस्यीय सांविधानिक पीठ ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ताओं की तरफ से अनुच्छेद-370 से जुड़े शीर्ष अदालत के दोनों फैसलों (1959 का प्रेमनाथ कौल बनाम जम्मू-कश्मीर और 1970 का संपत प्रकाश बनाम जम्मू-कश्मीर) के बीच कोई सीधा टकराव साबित नहीं किया जाता, वह इस मुद्दे को वरिष्ठ पीठ को नहीं भेजेगी। बता दें कि दोनों ही फैसले पांच सदस्यीय सांविधानिक पीठ ने ही सुनाए थे।
विज्ञापन
पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों को बृहस्पतिवार को शीर्ष अदालत के पिछले दोनों फैसलों के बीच सीधा टकराव होने से जुड़े तथ्य दाखिल करने का आदेश दिया और सुनवाई को स्थगित कर दिया। अब अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को की जाएगी। रेफरेंस के मुद्दे पर सुनवाई कर रही जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ से जम्मू-कश्मीर बार संघ ने कहा था कि केंद्र सरकार की तरफ से पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को खत्म करने का फैसला अवैध था और इसकी समीक्षा की आवश्यकता है।
विज्ञापन
जस्टिस रमना के साथ जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की मौजूदगी वाली पीठ ने बार संघ की तरफ से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता जफर अहमद शाह से कहा कि उन्हें पिछले दोनों फैसलों में सीधा टकराव साबित करना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, भारत और जम्मू-कश्मीर के संविधान एक-दूसरे के समानांतर हैं और अनुच्छेद-370 इनके साथ चल रहा था।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि संपत प्रकाश मामले में दिए गए शीर्ष अदालत के निर्णय में खासतौर पर कहा गया है कि परिस्थितियों की निरंतरता को ध्यान में रखकर अनुच्छेद-370 को बने रहना होगा। जफर अहमद ने कहा, दोनों संविधान एकसाथ काम कर रहे थे और दोनों के बीच टकराव रोकने के लिए अनुच्छेद-370 की उपधारा (2) मौजूद थी।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में यदि कोई कानून बनाना था तो यह केवल राज्य की सहमति या परामर्श से ही बनाया जा सकता था। अनुच्छेद-370 इसी सहमति या परामर्श के लिए रखा गया था। अनुच्छेद-370 को हटाकर सरकार ने राज्य के साथ संबंध खत्म कर लिए हैं। जफर अहमद शाह के बाद एक एनजीओ की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने भी अपने तर्क रखे। दोनों ही अधिवक्ताओं ने मामले को सात सदस्यीय पीठ को भेजने की मांग की।