उत्तर प्रदेश चुनाव विश्लेषण: भाजपा के इस पैंतरे से कांग्रेस के सभी रास्ते हुए बंद! इस झटके से कैसे उबर पाएगी देश की सबसे पुरानी पार्टी
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विस्तार
पांच राज्यों में हुए चुनावों में भाजपा ने ऐसा दांव चला कि कांग्रेस के पैरों के नीचे से खिसकी हुई जमीन की गहराई और बढ़ गई। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि पैरों के नीचे से खिसकी हुई जमीन और उसकी गहराई को भरने में अब कांग्रेस को न सिर्फ मेहनत और मशक्कत ज्यादा करनी पड़ेगी, बल्कि भाजपा की उस खींची गई बड़ी लकीर से भी बड़ी लकीर खींचने के लिए उन्हें अपने सभी हथकंडे अपनाने पड़ेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर उत्तर भारत के राज्यों में भाजपा ने जितने करीने से कांग्रेस को किनारे लगाया है, उसकी भरपाई करने में फिलहाल कांग्रेस का यह नेतृत्व असफल ही दिख रहा है।
मौजूदा वोट बैंक को साधना बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में भाजपा में जो बिसात बिछाई उसमें निशाना तो बीएसपी का कोर वोटर था, लेकिन जबरदस्त नुकसान और अगले कई सालों तक न पूरी होने वाली मुसीबत कांग्रेस के लिए खड़ी कर दी। राजनीतिक विश्लेषण बीके पुनिया कहते हैं कि कांग्रेस के लिए इस वक्त सबसे बड़ा संकट नए वोटरों को जोड़ना नहीं है, बल्कि अपने बनाए हुए और वोट बैंक को साधना है। खासकर उत्तर प्रदेश में तो पार्टी के लिए बहुत बड़ा चैलेंज है। इसके अलावा पंजाब में हुई करारी शिकस्त भी कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पुनिया कहते हैं कि भाजपा ने जिस तरीके से राजनीतिक गोटियां सेट कीं, उससे बसपा का जनाधार खिसक कर भाजपा के पाले में आ गया और कांग्रेस के मजबूत होने की गुंजाइश पूरी तरीके से धराशाई हो गई।
वह कहते हैं यह बात सबको पता है कि कांग्रेस अपनी लचर नीतियों, रणनीतियों और नेतृत्व के कारण ही वह कमजोर होती रही और जैसे-जैसे कांग्रेस कमजोर होती रही, उसी दिशा में अलग-अलग राज्यों की छोटी-छोटी पार्टियां उनका वोट लेकर बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती रहीं। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि कांग्रेस का बड़ा वोट बैंक तीन दशक पहले से खिसकना शुरू हुआ, जो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मजबूती के साथ अपना बड़ा जनाधार होता चला गया।
कांग्रेस के वोट बैंक को तीसरी जगह बनाना पड़ा ठिकाना
उत्तर प्रदेश के चुनाव में सर्वे एजेंसी से जुड़े सचिन त्यागी कहते हैं कि आप उत्तर प्रदेश के वोट शेयर को अगर देखे तो आपको अंदाजा हो जाता है कि भाजपा ने किस तरीके से कांग्रेस और बसपा के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है। त्यागी कहते हैं कि भाजपा ने 42 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर हासिल किया है। बसपा 13 फ़ीसदी से कम पर आ गई है। वह कहते हैं यह वही बसपा है जो 22 फ़ीसदी के अपने दलित वोट बैंक की सबसे मजबूत दावेदारी करती रहती थी। उनका कहना है कि बसपा के 13 फीसदी वोट शेयर में मुस्लिमों की भी कुछ हिस्सेदारी है। जबकि कांग्रेस तीन फ़ीसदी वोट के साथ अपना उत्तर प्रदेश का जमा जमाया अस्तित्व तीन दशकों में खत्म करने के कगार पर पहुंच गई है। त्यागी कहते हैं कि भाजपा का बढ़ा हुआ वोट बैंक ही अब सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के लिए है। क्योंकि यह वोट बैंक सीधा कांग्रेस से खिसक कर बसपा में पहुंचा और बसपा से खिसक कर अब भाजपा की ओर पहुंचा है। वह कहते हैं इससे एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट हो गई है कि कभी कांग्रेस का रहा बड़ा वोट बैंक अब उसे अपनी पसंद नहीं मान रहा है। यही वजह है कि एक बड़े वोट बैंक को जब तीसरी बार अपना ठिकाना बनाना पड़ा तो उसने कांग्रेस की वजह भाजपा को चुनना शुरू कर दिया है।
जीडी शुक्ला कहते हैं कि कांग्रेस खुद को मजबूत करने के लिए अपने खोए हुए वोट बैंक को वापस अपने पास ला सकती थी। इसके लिए ही पार्टी प्रयास तो कर रही थी लेकिन वह नाकाफी रहे। लेकिन भाजपा ने ऐसी चाल चली कि कांग्रेस का टूटा हुआ बड़ा वोट बैंक भाजपा के खाते में आता चला गया। वह कहते हैं कि कांग्रेस के लिए यही पर सबसे बड़ी समस्या खड़ी होने लगी। शुक्ला कहते हैं कि दरअसल कांग्रेस का टूटा हुआ वोट बैंक एक वक्त में अगर कांग्रेस के पास आ जाता तो ठीक था, लेकिन वह बड़े लंबे वक्त तक बहुजन समाज पार्टी के साथ जुड़ा रहा और जब उसका खिसकना शुरू हुआ तो वापस अपनी पुरानी पार्टी यानी कांग्रेस की बजाय भाजपा में शिफ्ट होना शुरू हो गया। वह कहते हैं यही बहुत बड़ा परिवर्तन है और कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा चैलेंज। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस के लिए बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी से अपना वोट बैंक लेने के लिए जितनी मशक्कत करनी पड़ रही थी उससे कई गुना ज्यादा भाजपा से वापस अपने वोट बैंक को लाने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी।
कई मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में जीती भाजपा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मार्च को भाजपा मुख्यालय से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सभी जाति विशेष के लोगों को अपने साथ जोड़ने का भरोसा दिलाया। सत्ता पाने वाले दिन यह एक बहुत बड़ा संदेश था। यह संदेश बहुजन समाज पार्टी के सबसे बड़े वोट बैंक यानी कि दलितों और मुस्लिमों के लिए भी था। भाजपा के वरिष्ठ नेता का कहना है कि वह यह बात बिल्कुल सिरे से खारिज नहीं करते हैं कि उन्हें मुस्लिम समुदाय का वोट नहीं मिलता है। वह कहते हैं यह बात अलग है कि पार्टी खुल कर न तो इस बात को स्वीकार करती है और न ही मुस्लिम खुल करके इस बात को कहते हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भी भाजपा ने सीटें जीती हैं और मुस्लिम महिलाओं का जिस तरीके से पिछले चुनाव में भाजपा को समर्थन मिला वही समर्थक इस बार भी बरकरार रहा।
सेंटर फॉर पॉलिटिकल रिसर्च एंड डाटा एनालिसिस से जुड़े प्रवीण शर्मा कहते हैं कि राजनीति में यह बहुत मायने रखता है कि आप की नीतियां और योजनाएं सबसे ज्यादा किस को लाभान्वित करती हैं। खासतौर से उनका कहना है केंद्र में किसकी सरकार होती है वही ज्यादातर दूसरे राज्यों में अपनी सरकारों के माध्यम से या अपनी योजनाओं के माध्यम से सीधे तौर पर जनता को लाभान्वित करता है। प्रवीण के मुताबिक भाजपा को इस मामले में माइलेज मिल रहा है और वह अपनी नीतियों योजनाओं और एजेंडे के साथ आगे भी बढ़ाई है। वह कहते हैं कि आप कांग्रेस को ही अगर देखें, तो जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी, तो राज्यों में भी उनकी सरकारें थीं और एक बहुत बड़े वोट बैंक पर उनका कब्जा होता था। प्रवीण कहते हैं कि यह बात बिल्कुल सच है कि भाजपा ने जिस तरीके से बसपा पर निशाना साध कर कांग्रेस को पूरी तरीके से खोखला कर दिया है वह बसपा जैसी पार्टी के लिए तो चिंताजनक है ही, लेकिन देश की सबसे बड़ी पार्टियों में शुमार कांग्रेस के लिए उससे भी ज्यादा चिंताजनक है।