गुजरात चुनाव: विकास की बयार के बीच जातीय समीकरण साधने में जुटी भाजपा
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मिशन गुजरात फतह के लिए भाजपा कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसलिए विकास की बयार के बीच पार्टी ने जातीय समीकरण को भी दुरुस्त करने की रणनीति बनाई है।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नाराज चल रहे पटेलों से लेकर किसान और ओबीसी वर्ग तक को साधने का फूलप्रूफ खाका तैयार किया है। पीएम मोदी के जरिए भाजपा गुजरात के अविरत विकास को प्रचार में आगे करेगी। तो जातीय गणित साधने का जिम्मा शाह और उनकी टीम ने अपने हाथ में संभाल रखा है।
उम्मीद जताई जा रही है कि यूपी में सोशल इंजीनियरिंग का डंका बजाने वाले शाह गुजरात के सोशल गणित को साधकर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने की तैयारी में जुटे हैं।
जन्मदिन पर गुजरात में रहेंगे पीएम मोदी
सरकार और भाजपा ने देशभर में पीएम मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को 'सेवा दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। तो पीएम मोदी इस खास दिन भी अपने विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाते नजर आएंगे। इस बार जन्मदिन के मौके पर पीएम मोदी अपने गृह प्रदेश गुजरात में ही रहेंगे।
बुलेट ट्रेन का उद्घाटन करने के बाद वे अपने जन्मदिवस के दिन नर्मदा बांध परियोजना का अमरेली में लोकार्पण करेंगे। गुजरात चुनाव से पहले उनकी विकास योजनाओं को रफ्तार दिए जाने की कवायद को विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
विपक्ष ने भी भाजपा पर इस बात का आरोप लगाया है। लेकिन पार्टी की चुनावी रणनीति तय है। वह पीएम मोदी के विकासवादी चेहरे को ही गुजरात की जनता के सामने पेश करेगी। मिशन गुजरात के लिए अहम माने जा रहे जातीय समीकरण को साधने की कवायद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के इर्द-गिर्द रहेगी।
ओबीसी और किसानों को रिझाएंगे शाह
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अमित शाह के जरिए 150 सीट जीतने के तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा विकास के मुद्दे के अलावा जातीय से लेकर स्थानीय समीकरणों को साधने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी।
अपनी सभी कमजोर कड़ियों की पहचान करते हुए पार्टी ने उन्हें अभी से दुरुस्त करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। ओबीसी और पिछड़ी जाति को साधने का जिम्मा खुद शाह ने अपने हाथ में ले रखा है।
ओबीसी और कॉपरेटिव सम्मेलनों के जरिए वे पिछड़े वर्ग और किसानों को रिझाएंगे। तो पटेलों को साधने के लिए शाह ने सूबे के दो अलग-अलग हिस्सों से राजनीतिक रथयात्राओं के आयोजन का ताना-बाना बुना है।
18 सितंबर को भाजपा प्रदेश स्तरीय ओबीसी सम्मेलन, शाह होंगे शामिल
ओबीसी और किसानों को साधने के लिए गुजरात भाजपा ने 18 सितंबर को दो अलग-अलग सम्मेलनों का आयोजन रखा है। दोनों ही सम्मेलनों को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह संबोधित करेंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ महासचिव के अनुसार ओबीसी को साधने की कवायद में पार्टी ने 18 सितंबर को फागवेल में प्रदेश स्तरीय ओबीसी सम्मेलन का आयोजन रखा है।
इस सम्मेलन में खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उपस्थित रहकर पीएम मोदी के जरिए किए गए ओबीसी हितैषी कदमों की जानकारी देंगे और ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के केंद्र के प्रयास को भी वे जनता के सामने रखेंगे। सम्मेलन में प्रदेश भर से करीब 50 हजार से ज्यादा ओबीसी लोगों को जुटाने की योजना है।
पार्टी का फोकस खासतौर से पिछड़ा वर्ग के ठाकोर बिरादरी के लोगों को साधने पर है। जिसके नेता कभी माधव सिंह सोलंकी हुआ करते थे। इस बिरादरी की पकड आंनद, खेडा सरीखे मध्य गुजरात के करीब चार जिलों में है। इस इलाके में भाजपा बेहद कमजोर मानी जाती रही है।
लेकिन, शाह की रणनीति इन इलाकों में भी परचम लहराने की है। ओबीसी को लेकर पार्टी ने पूरी तरह से सूक्ष्म तैयारी की है। जिलवार ओबीसी बिरादरी के जातियों की पहचान कर उन्हें साधने के लिए नेताओं को मैदान में उतारा जा रहा है। करीब 174 जातियां गुजरात में ओबीसी में आती हैं।
कॉपरेटिव सम्मेलन के जरिए किसानों को भी साधेंगे शाह
किसानों को साथ जोडने की कवायद में भाजपा ने कॉपरेटिव क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं को जोड़ने का खाका तैयार किया है। अमूल डेयरी चलाने वाली संस्था पहले से ही भाजपा के समर्थन में है।
मगर किसानों में नाराजगी को भांपते हुए पार्टी ने अन्य कॉपरेटिव संस्थाओं को भी साधने की रणनीति बनाई है। इसे ध्यान में रखते हुए 18 सितंबर को अहमदाबाद में कॉपरेटिव सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। जिसे अमित शाह संबोधित करेंगे।
पटेलों को साधने के लिए नितिन पटेल और जीतू वाघाणी पर शाह का दांव
दोनों ही नेता सूबे के अलग-अलग हिस्से से राजनीतिक रथयात्रा लेकर चलेंगे। जिसका समापन 16 अक्टूबर को अहमदाबाद में होगा। पटेलों को साधने की कवायद में पार्टी ने इसकी दोनों ही बिरादरी लेउवा और कडवा को एक समान रूप से तवज्जो देने का निर्णय लिया है।
कडवा पटेल बिरादरी से संबंध रखने वाले नितिन पटेल 1 अक्टूबर से 15 दिवसीय रथयात्रा लेकर निकलेंगे। उनके नेतृत्व वाली यात्रा 1 अक्टूबर को सरदार पटेल के पैतृक गांव आनंद जिले के करमसाद से शुरू होगी।
तो जीतू भाई वाघाणी के नेतृत्व में शुरू होने वाली यात्रा 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन महात्मा गांधी के जन्मस्थान पोरबंदर से शुरू होगी। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी दोनों ही यात्राओं में शुरुआत के अवसर पर उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा अन्य बड़े नेता इन यात्राओं में जगह-जगह शामिल होंगे। दोनों ही यात्राओं के आयोजन का जिम्मा पूर्व मंत्री गोवर्धन झड़पिया को दिया गया है।