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दहेज उत्पीड़न मामला: अपने ही आदेश को पलटने की तैयारी में सुप्रीम कोर्ट

Thu, 30 Nov 2017 06:00 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Nov 2017 06:00 AM IST
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In Dowry harassment cases Supreme Court says Can not frame guidelines for police on FIRs
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : SOCIAL MEDIA

सुप्रीम कोर्ट दहेज उत्पीड़न के मामलों में कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए दिशानिर्देश बनाने के अपने ही आदेश को पलटने की तैयारी में है। यह दूसरी बार है जब चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दो सदस्यीय पीठ के फैसले पर पुन: परीक्षण करने की बात कही है। जनवरी के तीसरे हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा।

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अमाइकस क्यूरी नियुक्त किए गए वरिष्ठ वकील वी शेखर और इंदू मल्होत्रा ने भी तीन सदस्यीय पीठ की राय पर सहमति जताते हुए कहा कि हर मामले को अलग-अलग तरीके से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एकसमान गाइडलाइंस नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत दो गैर सरकारी संगठनों की याचिका पर सुनवाई कर रही है। 28 जुलाई को राजेश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश मामले में दो सदस्यीय पीठ ने कई दिशानिर्देश जारी किए थे।
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इनमें दहेज उत्पीड़न मामले में बिना जांच-पड़ताल के पति और ससुरालियों की गिरफ्तारी पर रोक की बात कही गई थी। साथ ही पीठ ने कहा था हर जिले में कम से एक परिवार कल्याण समिति का गठन करने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि 498 ए की हर शिकायत को समिति के पास भेजा जाए और समिति की रिपोर्ट आने तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। साथ ही इस काम के लिए सिविल सोसाइटी को शामिल करने का निर्देश दिया गया था।


अदालत ने कहा था कि धारा-498ए के तहत पुलिस या मजिस्ट्रेट तक पहुंचने वाली शिकायतों को इस तरह की समिति के पास रेफर कर दिया जाना चाहिए। एक महीने में समिति की रिपोर्ट देनी होगी।

रिपोर्ट आने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। इसके बाद रिपोर्ट पर जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट मेरिट के आधार पर विचार करेंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि धारा-498 ए की शिकायत की जांच विशिष्ट अधिकारी द्वारा होनी चाहिए। 

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