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विवादों के बीच पहली बार भारत पहुंचे तीन राफेल विमान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Updated Sun, 02 Sep 2018 10:11 PM IST
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फ्रांस के साथ केंद्र सरकार के करार को लेकर कांग्रेस के हमलों के बीच तीन राफेल लड़ाकू विमान रविवार को पहली बार भारत पहुंचे। ये विमान तीन दिन तक ग्वालियर एयरबेस पर रहेंगे और वायुसेना के पायलट इन पर प्रशिक्षण हासिल करेंगे। ये लड़ाकू विमान ऑस्ट्रेलिया में एक अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में शामिल होने गए थे। वहां से लौटते हुए ग्वालियर आए।
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इस युद्धाभ्यास में वायुसेना ने भी हिस्सा लिया था। इस युद्धाभ्यास में वायुसेना के ट्रांसपोर्ट और सुखोई-30 विमान भी शामिल हुए थे। वायुसेना के पायलट राफेल लड़ाकू विमान तो फ्रांसीसी वायुसेना के पायलट मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को उड़ाएंगे। वायुसेना को उम्मीद है कि सितंबर 2019 तक 36 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति होने लगेगी।
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इन 36 विमानों को वायुसेना की दो स्क्वॉड्रन में बांटा जाएगा। एक स्क्वॉड्रन को हरियाणा के अंबाला में जबकि दूसरी पश्चिम बंगाल की हाशिमारा में तैनात की जाएगी। कांग्रेस समेत विपक्ष मोदी सरकार पर ज्यादा कीमत में राफेल सौदा करने का आरोप लगा रही है जबकि सरकार करार में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से लगातार इनकार कर रही है।
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राफेल के दस्तावेज मिलने पर कोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा : सिब्बल
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को दावा किया कि मोदी सरकार के पास राफेल विमान करार को लेकर उठाए जा रहे सवालों का कोई जवाब नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले को कोर्ट ले जाने से पहले पार्टी जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार करेगी। उन्होंने कहा कि राफेल करार बहुत बड़ा घोटाला है। यह करार विमान खरीद नीति को दरकिनार कर किया गया। रक्षा और विदेश मंत्रियों को भी इस करार के बारे में अंधेरे में रखा गया।