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मोदी सरकार ने अपने बजट के जरिए दूर कर दी 'प्रणब दा' की यह चिंता

Fri, 05 Jul 2019 09:37 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Fri, 05 Jul 2019 09:37 PM IST
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In Budget 2019 Narendra Modi  government solve  Pranab Mukherjee's higher education concern
प्रणव मुखर्जी, नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और उसके स्तर को लेकर खासी चिंता जताई थी। उन्होंने कई अवसरों पर खरे शब्दों में कहा था कि देश में उच्च शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है। भले ही दुनिया में भारत की शैक्षणिक व्यवस्था को विशाल शिक्षा प्रणाली बताया जाता हो, लेकिन विश्व के सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में हमारा नंबर बहुत पीछे है। दिसंबर 2015 में उन्होंने कहा था, यह चिंता की बात है कि हमारे पास वैश्विक स्तर के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में से एक भी नहीं है। 

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मोदी सरकार 2.0 ने अब अपने पहले ही बजट में प्रणब दा की यह चिंता दूर कर दी है। यानी शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए नई शिक्षा नीति लाई जाएगी। शिक्षा नीति के लिए अनुसंधान केंद्र भी बनेगा। साथ ही दुनिया के टॉप 200 कॉलेज, जिनमें भारत के सिर्फ 3 कॉलेज हैं, अब इनकी संख्या को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। शुक्रवार को पेश हुए आम बजट में लिखा है कि पांच साल पहले तक दुनिया के टॉप 200 कॉलेजों की सूची में एक भी भारतीय कॉलेज का नाम नहीं था। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी ने यह बात कई दफा कही थी। 
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उनकी चिंता थी कि हमारे उच्च शिक्षा संस्थानों में जो पढ़ाया-लिखाया जाता है, उसकी गुणवत्ता में कमी है। संख्या में भले ही ये संस्थान बढ़ रहे हों, मगर विश्व में उनका नाम टॉप संस्थानों की सूची में नहीं आ पा रहा है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया था। प्रणब दा ने गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए प्राचीन काल से प्रेरणा लेने की बात कही थी। उनका मानना था कि प्राचीन समय में भारत प्रसिद्ध उच्च शिक्षण संस्थानों का घर था। 
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तक्षशिला (अब पाकिस्तान) और नालंदा जैसे संस्थान दुनिया के विश्वविद्यालयों में आगे थे। ये संस्थान भारत और पड़ोसी देशों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का केंद्र थे। भारतीय आर्थिक संघ के 98वें वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा था, हमारे यहां लगभग 700 विश्वविद्यालय, जिनमें 44 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं और करीब 36,000 कॉलेज हैं। वैश्विक स्तर पर भारत की इस उच्चतर शिक्षा प्रणाली को विशाल कहा जा सकता है। 

चिंता की बात यह है कि हमारे पास विश्व के टॉप 200 संस्थानों में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय नहीं था। सहकारी प्रयासों और नीतिगत हस्तक्षेपों के बाद, हमारे दो संस्थान, आईआईएससी बैंगलोर और आईआईटी-दिल्ली ने यह धारणा तोड़ी है। प्रणब दा का कहना था, कौशल विकास सीधे हमारे युवाओं के रोजगार से जुड़ा है, इसलिए हमें कौशल विकास के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर भी ध्यान केंद्रित करना है। 

मोदी सरकार के बजट में मौजूदा शिक्षा ढांचे को बदलने की कवायद
आम बजट में राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान बनाने की घोषणा की गई है। दुनिया के टॉप 200 कॉलेज में भारत के सिर्फ 3 कॉलेज हैं, ऐसे में सरकार इनकी संख्या को बढ़ाने पर जोर देगी। पांच साल पहले इस लिस्ट में एक भी भारतीय कॉलेज का नाम नहीं था। देश में ऑनलाइन कोर्स को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।  


साथ ही देश में 'अध्ययन' कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके तहत विदेशी छात्रों को भारत में बुलाया जाएगा। उच्च शिक्षा के लिए अलग से कानून का मसौदा पेश होगा। इसके लिए 400 करोड़ रुपये का आवंटन भी किया जाएगा। नई शिक्षा नीति लागू होगी। शिक्षा नीति पर काम करने के लिए अलग से एक अनुसंधान केंद्र भी बनेगा। देश में बेहतर शोध हों, इसे ध्यान में रखकर राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान बनाने का निर्णय लिया गया है।  

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