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देश के 52 फीसदी जिलों में किसानों से ज्यादा हुए खेतिहर मजदूर, बीते चार सालों में पांच गुना बढ़े किसानों के आंदोलन

Thu, 10 Jun 2021 02:39 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 10 Jun 2021 02:39 PM IST
सार

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार, केरल व पुडुचेरी के सभी जिलों में किसानों की तुलना में खेतिहर मजदूर अधिक हो गए हैं। बिहार के 38 जिलों में कुल 78 फीसदी खेतिहर मजदूर हो गए हैं और केवल 22 फीसदी (2 करोड़ 55 लाख) किसान हैं...

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In 52 percent of the districts of the country, the number of agricultural labourers has exceeded that of the farmers
खेतीहर मजदूर - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

देश के 52 फीसदी जिलों में खेतिहर मजदूरों की संख्या किसानों की तुलना में ज्यादा हो गई है। सरकार ने 2017 में किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया लेकिन बीते चार वर्षों में देश में किसानों के आंदोलन पांच गुना बढ़ गए हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की सालाना रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट’ में यह आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में मौसमी आपदाओं के चलते 39 लाख लोगों को विस्थापित किया गया और 21 बड़ी मौसमी घटनाओं में 1374 लोगों की जान चली गई।

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रिपोर्ट के मुताबिक बिहार, केरल व पुडुचेरी के सभी जिलों में किसानों की तुलना में खेतिहर मजदूर अधिक हो गए हैं। बिहार के 38 जिलों में कुल 78 फीसदी खेतिहर मजदूर हो गए हैं और केवल 22 फीसदी (2 करोड़ 55 लाख) किसान हैं। झारखंड में 54 फीसदी (14 जिलों) खेतिहर मजदूर व 46 फीसदी (10 जिले) में (83 लाख) किसान हैं।
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मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 20 लाख किसान हैं, यहां 13 जिलों में किसान व 37 जिलों में खेतिहर मजदूर अधिक हैं। पश्चिम बंगाल में भी 33 फीसदी किसान व 67 खेतिहर मजदूर हैं, राज्य के 19 में से केवल 2 जिलों में ही किसानों की संख्या खेतिहर मजदूरों से ज्यादा है। देश में प्रतिदिन 28 किसान या खेतिहर मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं, यह संख्या महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में सबसे ज्यादा है।
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2017 में जब सरकार ने किसान की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था, तब देश के 15 राज्यों में 34 बड़े किसान आंदोलन या प्रदर्शन हुए थे, जबकि 2020-21 तक 22 राज्यों में 165 किसान आंदोलन या प्रदर्शन हुए, इनमें से 96 विरोध प्रदर्शन केवल सरकार की आर्थिक व कृषि नीतियों के खिलाफ हुए हैं। सबसे अधिक 19 प्रदर्शन ओडीशा में हुए।


रिपोर्ट में यह उल्लेख भी है कि देश की 14 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि में से केवल दो फीसदी पर ही ऑर्गेनिक खेती होती है। देश में आपदाओं के चलते 39 लाख लोगों को विस्थापन करना पड़ा जो चीन, फिलीपींस व बांग्लादेश के बाद सबसे बड़ी संख्या है। सबसे अधिक लोग भारतीय तटों पर आए समुद्री तूफान से प्रभावित हुए। 1971 से 2020 तक 50 वर्षों के दौरान नवंबर महीने में 38 तूफान आए जबकि मई के महीने 15 तूफान आए।

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