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महाभियोग प्रस्ताव खारिज, नायडू बोले- न्यायपालिका को जनता की नजरों में नहीं बनाना चाहता कमजोर

Mon, 23 Apr 2018 03:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 23 Apr 2018 03:56 PM IST
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Impeachment: Venkaiah Naidu rejects the motion against cji dipak misra
वेंकैया नायडू

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ 7 दलों की ओर से दिए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया है। सभापति ने 20 पेज के अपने आदेश में सीजेआई पर लगे आरोपों को आधारहीन और कल्पना पर आधरित बताते हुए नोटिस खारिज करने के 22 कारण गिनाए हैं।

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आदेश में नोटिस देने के बाद विपक्ष का इससे संबंधित मसौदे को मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक करने को संसदीय नियमों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि कानूनविदों से सभी पहलुओं पर विमर्श और व्यक्तिगत तौर पर सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद उन्होंने नोटिस को खारिज करने का फैसला किया।  
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विपक्ष के आरोपों का हवाला देते हुए सभापति ने कहा कि ज्यादातर आरोपों के संदर्भ में तथ्यों की जगह ऐसा लगता है, ऐसा अनुमान है, ऐसी संभावना है का जिक्र किया गया है। ऐसे में बिना किसी पुख्ता सबूत के आधार पर सीजेआई के खिलाफ जांच का आदेश देना एक संवैधानिक संस्था को जनता की नजरों में कमजोर करना होगा। इसके अलावा कदाचार के आरोप संविधान के अनुच्छेद 124(4) के बाहर होने के कारण इस मामले में अग्रिम जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते। सीजेआई पर महत्वपूर्ण मामलों को चुनिंदा बेंचों को सुनवाई के लिए स्थानांतरित किए जाने के आरोपों को भी सभापति ने खारिज कर दिया। इसके जवाब में आदेश में कहा गया है कि सीजेआई चीफ ऑफ रोस्टर होते हैं। कामिनी जायसवाल बनाम भारत सरकार के केस में भी यह तय हो चुका है कि केस केलिए बेंच चयन का अधिकार सीजेआई के ही पास है। 
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अपने आदेश में सभापति ने नोटिस देने वाले विपक्ष की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने के तत्काल बाद विपक्ष ने मीडिया के जरिए मसौदे का प्रचार किया। यह कदम राज्यसभा के नियमों का उल्लंघन है। 


 

पहले ही दिन खारिज कर देना चाहिए था प्रस्ताव : स्वामी 

Impeachment: Venkaiah Naidu rejects the motion against cji dipak misra
swami
नायडू ने दिमाग का सही इस्तेमाल किया : सोराबजी

 सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू के फैसले का पूर्व अटॉर्नी जनरल (एजी) सोली सोराबजी ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नायडू ने फैसला लेने से पहले विधि विशेषज्ञों से राय ली। इसके बाद महाभियोग के लिए ठोस आधार नहीं पाए जाने पर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस मामले में नायडू ने दिमाग का एकदम सही इस्तेमाल किया है। 

सोराबजी ने कहा कि ऐसे मामलों को लंबा नहीं लटकाया जा सकता। नायडू के फैसले को विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। नायडू ने फैसले में कहा है कि शासन के किसी भी स्तंभ को किसी के विचार के लिए कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पिछले शुक्रवार को कांग्रेस के नेतृत्व में सात विपक्षी दलों ने पांच आधार बताकर सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव नायडू को सौंपा। इस प्रस्ताव पर 71 राज्यसभा सदस्यों के हस्ताक्षर थे, जिनमें 7 हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं। इसके बाद विपक्ष ने मीडिया को इस प्रस्ताव के बारे में पूरी जानकारी दी। यह पहली बार है कि किसी मौजूदा सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है।

पहले ही दिन खारिज कर देना चाहिए था प्रस्ताव : स्वामी 
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को उसी दिन महाभियाग प्रस्ताव खारिज कर देना चाहिए था, जिस दिन इसे सौंपा गया था। दरअसल, उनका कहना है कि प्रस्ताव सौंपने के बाद सार्वजनिक कर देना संसदीय नियमों के खिलाफ है। इसी आधार पर प्रस्ताव खारिज किया जा सकता था। स्वामी ने नायडू के फैसले की सराहना की। संप्रग के समय अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरिन रावल ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। 
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