{"_id":"688190db27b2e5080f027c08","slug":"impeachment-process-in-justice-verma-case-will-start-soon-in-lok-sabha-speaker-will-form-an-inquiry-committee-2025-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lok Sabha: जस्टिस वर्मा मामले में लोकसभा में महाभियोग की प्रक्रिया जल्द, स्पीकर बनाएंगे जांच समिति","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Lok Sabha: जस्टिस वर्मा मामले में लोकसभा में महाभियोग की प्रक्रिया जल्द, स्पीकर बनाएंगे जांच समिति
Thu, 24 Jul 2025 07:18 AM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Thu, 24 Jul 2025 07:18 AM IST
सार
कानून के जानकारों का कहना है कि जब अध्यक्ष को लोकसभा सांसदों की तरफ से नोटिस मिला और उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया तभी जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यसभा के तत्कालीन सभापति जदगीप धनखड़ ने नोटिस स्वीकार नहीं किया था, सदन में उसका जिक्र भर किया था।
विज्ञापन
संसद।
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की प्रक्रिया जल्द लोकसभा में शुरू की जाएगी। लोकसभा स्पीकर समिति के गठन की घोषणा करेंगे। समिति उन आधारों की जांच करेगी जिन पर जस्टिस वर्मा को हटाने की मांग की गई है।
विज्ञापन
जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से मार्च में अधजले नोटों की गड्डियां मिली थीं। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट से उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था। जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया के तौर तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के कार्यवाहक सभापति हरिवंश की बैठक हुई। दोनों सदनों के महासचिव और अन्य अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। बाद में गृह मंत्री अमित शाह भी बैठक में शामिल हुए। जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा स्पीकर को सोमवार को एक नोटिस दिया गया। इस पर 152 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही तरफ के सांसद शामिल हैं। वहीं, राज्यसभा में दिए गए नोटिस पर सिर्फ विपक्ष के 63 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के अनुसार, जब एक ही दिन संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया जाता है तो दोनों सदनों के अध्यक्ष संयुक्त रूप से जांच समिति का गठन करते हैं। ब्यूरो
विज्ञापन
धनखड़ के नोटिस स्वीकारने पर संदेह
कानून के जानकारों का कहना है कि जब अध्यक्ष को लोकसभा सांसदों की तरफ से नोटिस मिला और उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया तभी जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यसभा के तत्कालीन सभापति जदगीप धनखड़ ने नोटिस स्वीकार नहीं किया था, सदन में उसका जिक्र भर किया था। अगर दोनों सदनों के अध्यक्ष नोटिस स्वीकार करते तो उसे दोनों सदनों में पारित करना पड़ता। इसके बाद दोनों संयुक्त समिति गठित करते। हालांकि, एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि सभापति रहते धनखड़ ने नोटिस का उल्लेख किया था। इसलिए समिति के गठन के लिए राज्यसभा के कार्यवाहक सभापति हरिवंश से परामर्श किया जाएगा। हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति हैं।
विज्ञापन
संसद भवन में पीएम से मिले गृह मंत्री शाह
जस्टिस वर्मा को लेकर संसद में हंगामा प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद भवन में उनके कार्यालय में मुलाकात की। शाह और पीएम मोदी की यह बैठक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे और एसआईआर समेत विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के विरोध के कारण संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही में लगातार व्यवधान की पृष्ठभूमि में हुई है।
समिति ने दोषी पाया तो आएगा प्रस्ताव
सूत्रों ने बताया कि तीन सदस्यीय वैधानिक समिति की घोषणा जल्द होगी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक कानूनविद् शामिल होंगे। अगर समिति जस्टिस वर्मा को दोषी पाती है तो लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जाएगा। विस्तृत चर्चा के बाद इस पर मतदान होगा और उसके पारित होने के लिए दो तिहाई मत की जरूरत होगी। लोकसभा में पारित होने के बाद उसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा और फिर वही प्रक्रिया दोहराई जाएगी।