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CJI पर महाभियोग नोटिस रद्द करने को चुनौती, संविधान पीठ आज सुनेगी

Tue, 08 May 2018 10:32 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 08 May 2018 10:32 AM IST
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impeachment motion against CJI Dipak Misra 5 judges Constitution Bench Will Heard On Today

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को संविधान पीठ सुनवाई करेगी। 

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने मास्टर ऑफ रोस्टर होने के नाते देर शाम पीठ और उसके पांच जजों का चयन कर दिया। इसमें वो चार वरिष्ठ जज शामिल नहीं हैं, जिन्होंने 12 जनवरी को प्रेस कांफ्रेंस कर चीफ जस्टिस मिश्रा पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। 
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सोमवार सुबह इस याचिका का उल्लेख जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया था। इस पर, पीठ ने मंगलवार को कोई फैसला लेने की बात कही थी। लेकिन इससे पहले कि वह निर्णय ले पाते, सुनवाई के संविधान पीठ गठित कर दी गई। 
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संविधान पीठ में वरिष्ठता क्रम में छह से दसवें नंबर के न्यायाधीशों को शामिल किया गया है। इस पीठ की अध्यक्ष वरिष्ठता में छठवें नंबर के जस्टिस एके सीकरी करेंगे। जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एनवी रमन, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एके गोयल पीठ के अन्य जज हैं। कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसदों प्रताप सिंह बाजवा और अमी याज्ञनिक ने यह याचिका दायर की है।

सिब्बल की दलील, प्रावधानों की तत्काल व्याख्या करने की दरकार 
इससे पहले, जस्टिस चेलमेश्वर की पीठ के समक्ष पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए तारीख और पीठ तय करने की अपील की। उन्होंने कहा, जिस तरीके से महाभियोग नोटिस को रद्द किया गया है, उसमें गंभीर संवैधानिक मुद्दे जुड़ गए हैं। इसमें संवैधानिक प्रावधानों की तत्काल व्याख्या करने की दरकार है।

यह फैसला राजनीति से प्रेरित, मनमाना और गैरकानूनी है, इसे खारिज किया जाना चाहिए। सीजेआई पर एक आरोप यह भी है कि वह सत्तारूढ़ दल से संबंधित संवेदनशील मामलों को कुछ खास पीठों के पास भेजते हैं, जिससे अपेक्षित नतीजे निकल सकें।

जस्टिस चेलमेश्वर ने पूछा, सीजेआई के समक्ष याचिका क्यों नहीं लगाई
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि मास्टर ऑफ रोस्टर के संबंध में संविधान पीठ ने फैसला दिया है, ऐसे में याचिका सीजेआई के सामने ही रखी जाए। इस पर सिब्बल और प्रशांत भूषण ने कहा कि महाभियोग नोटिस और यह मामला सीजेआई दीपक मिश्रा से जुड़ा है, इसलिए मास्टर ऑफ रोस्टर होने के बाद भी चीफ जस्टिस रजिस्ट्री को यह निर्देश नहीं दे सकते हैं कि याचिका पर सुनवाई कब और किस पीठ के समक्ष हो। ऐसे में कोई भी वरिष्ठतम न्यायाधीश याचिका को सूचीबद्ध करने का निर्देश दे सकता है।


पहले जताई थी अनिच्छा
तीन अन्य जजों के साथ जनवरी में सीजेआई के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस करने वाले जस्टिस चेलमेश्वर ने शुरुआत में याचिका पर सुनवाई करने पर अनिच्छा जताई। उन्होंने यह भी कहा कि वह सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लेकिन सिब्बल ने कहा कि यह संवैधानिक महत्व का मामला है। पहले कभी ऐसे हालात पैदा नहीं हुए। इसलिए पीठ को आदेश देना चाहिए मामले की सुनवाई कौन और कैसे करेगा। 

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