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'भारतीय साहित्य की गहराई में है अपार संभावनाएं, विश्व का दृष्टिकोण बदल सकता है भारत'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 23 Mar 2018 09:41 PM IST
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भारतीय साहित्य पर अपनी पैंनी नजर रखने वाले प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने उभरते भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बात कही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े उदयपुर एवं पेसिफिक यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. शर्मा ने भारत को चीन से सीख लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह चीन ने अपने साहित्य के बेहतर शोध से विश्व में अपना अहम स्थान बनाया है, उसी तरह भारत को भी काम करने की जरूरत है।
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प्रो. शर्मा ने कहा कि भारतीय साहित्य में वो गहराई है जिससे देश चाहे तो विश्व का दृष्टिकोण बदल सकता है। प्राचीन साहित्य का भारत के पास वो खजाना है जिसका बस सही पुनर्मूल्यांकन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पर आज भी पश्चिमी नजरिया हावी है। लेकिन अगर अपने साहित्य पर और श्रम किया जाए तो हम दुनिया का भरोसा और नजरिया दोनों भारत के प्रति और मजबूत कर पाएंगे।
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डीयू में शिक्षा में उभरती वैश्विक तकनीकी, सांस्कृतिक चुनौतियों के विषय पर नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) द्वारा एक संगोष्ठी आयोजित की गई थी। जिसमें प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने ये बाते कही। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भागीदारी की।
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