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आईआईटी में जल्द ही प्रवासी छात्रों का भी दाखिला
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Wed, 24 Aug 2016 05:15 AM IST
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आईआईटी
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आईआईटी में वर्ष 2020 तक सीटों की संख्या एक लाख करने के लक्ष्य के साथ प्रवासी छात्रों के दाखिले के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में आईआईटी परिषद की मंगलवार को हुई बैठक में आप्रवासी भारतीय छात्रों के आईआईटी में दाखिले के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। अब विभिन्न आईआईटी संस्थान प्रबंधनों को अतिरिक्त छात्रों के दाखिले की संख्या तय बाकी है। जावड़ेकर ने कहा कि अगले तीन वर्षों में आईआईटी में सीटों की संख्या एक लाख तक करने की तैयारी है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके अलावा इंडक्शन प्रोग्राम कोर्स की अवधि पांच सप्ताह का करने का निर्णय लिया गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि आईआईटी संस्थानों में फिलहाल लगभग 72 हजार छात्र हॉस्टलों में रहकर अंडरग्रैजुएट, पोस्टग्रैजुएट या डॉक्टरेट कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि, योजना है कि हॉस्टल में नहीं रहने वाले छात्रों को भी इन संस्थानों में दाखिला दिया जाए। हर साल सीटों की संख्या 10 हजार बढ़ाने की योजना है ताकि 2020 तक इसे एक लाख किया जा सके। अधिकारी के मुताबिक, बैठक में सुझाव दिया गया कि अंडरग्रैजुएट कोर्स के लिए हर साल 4000 और पोस्ट ग्रैजुएट तथा पीएचडी कोर्स के लिए 6000 सीटें बढ़ाई जाए। बैठक के बाद जावड़ेकर ने घोषणा की कि आईआईटी परिषद ने प्रधानमंत्री शोध फेलोशिप शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
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जावडेकर ने कहा कि फेलोशिप को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि भारत में अधिक से अधिक शोध किए जा सके। यही नहीं हॉस्टल और कक्षा के नियम को और आसान बनाया जाएगा ताकि छात्रों को बेवजह तनाव का सामना न करना पड़े। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि छात्र अपने घर से भी क्लासेज करने आ सकें।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने यह भी कहा कि 11वीं और 12वीं के छात्रों का एप्टीट्यूट टेस्ट होगा ताकि उनकी दक्षता को बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि किसी भी छात्र को पढ़ाई के लिए विदेश न जाने पड़े, इसके लिए पूरी व्यवस्था की जाएगी। आईआईटी काउंसिल की बैठक में 19 आईआईटी के निदेशक और चेयरमैन ने हिस्सा लिया। आईआईटी में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य और अन्य संसाधनों के लिए निदेशकों और चेयरमैन की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री के पास कुछ मांगें रखी गई जिस पर उन्होंने गंभीरता से विचार करने और पूरा करने का आश्वासन दिया है।
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वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में आईआईटी परिषद की मंगलवार को हुई बैठक में आप्रवासी भारतीय छात्रों के आईआईटी में दाखिले के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। अब विभिन्न आईआईटी संस्थान प्रबंधनों को अतिरिक्त छात्रों के दाखिले की संख्या तय बाकी है। जावड़ेकर ने कहा कि अगले तीन वर्षों में आईआईटी में सीटों की संख्या एक लाख तक करने की तैयारी है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके अलावा इंडक्शन प्रोग्राम कोर्स की अवधि पांच सप्ताह का करने का निर्णय लिया गया है।
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एक अधिकारी ने बताया कि आईआईटी संस्थानों में फिलहाल लगभग 72 हजार छात्र हॉस्टलों में रहकर अंडरग्रैजुएट, पोस्टग्रैजुएट या डॉक्टरेट कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि, योजना है कि हॉस्टल में नहीं रहने वाले छात्रों को भी इन संस्थानों में दाखिला दिया जाए। हर साल सीटों की संख्या 10 हजार बढ़ाने की योजना है ताकि 2020 तक इसे एक लाख किया जा सके। अधिकारी के मुताबिक, बैठक में सुझाव दिया गया कि अंडरग्रैजुएट कोर्स के लिए हर साल 4000 और पोस्ट ग्रैजुएट तथा पीएचडी कोर्स के लिए 6000 सीटें बढ़ाई जाए। बैठक के बाद जावड़ेकर ने घोषणा की कि आईआईटी परिषद ने प्रधानमंत्री शोध फेलोशिप शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
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जावडेकर ने कहा कि फेलोशिप को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि भारत में अधिक से अधिक शोध किए जा सके। यही नहीं हॉस्टल और कक्षा के नियम को और आसान बनाया जाएगा ताकि छात्रों को बेवजह तनाव का सामना न करना पड़े। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि छात्र अपने घर से भी क्लासेज करने आ सकें।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने यह भी कहा कि 11वीं और 12वीं के छात्रों का एप्टीट्यूट टेस्ट होगा ताकि उनकी दक्षता को बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि किसी भी छात्र को पढ़ाई के लिए विदेश न जाने पड़े, इसके लिए पूरी व्यवस्था की जाएगी। आईआईटी काउंसिल की बैठक में 19 आईआईटी के निदेशक और चेयरमैन ने हिस्सा लिया। आईआईटी में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य और अन्य संसाधनों के लिए निदेशकों और चेयरमैन की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री के पास कुछ मांगें रखी गई जिस पर उन्होंने गंभीरता से विचार करने और पूरा करने का आश्वासन दिया है।