आईआईटी-आईआईएम से भी हो रहा छात्रों का मोहभंग, पढ़िए चौंकाने वाला सच
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आईआईटी यानि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जहां पढ़ने का सपना देश का हर छात्र देखता है। कोटा सहित देशभर के हजारों संस्थानों में लाखों छात्र आईआईटी में पढ़ाई का सपना लिए रात दिन तैयारी करते हैं लेकिन जब इन्हीं आईआईटी से छात्र लगातार पढ़ाई छोड़ने लगे तब सवाल खड़े हो जाते हैं।
बीते एक साल में आईआईटी से 656 छात्र पढ़ाई छोड़ चुके हैं जबकि आईआईएम में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या 49 के करीब है। सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
एनडीटीवी की खबर के अनुसार सरकार ने जानकारी दी की इस अवधि में दिल्ली आईआईटी से 256 छात्रों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। जबकि आईआईटी खड़गपुर से 198 और आईआईटी कानपुर से 47 छात्रों ने पढ़ाई को बीच में ही अलविदा कह दिया।
आईआईटी और आईआईएम में बढ़ रही ड्रॉप आउट छात्रों की संख्या
इसके अलावा मद्रास आईआईटी के 35, मुंबई आईआईटी के 34 और पटना आईआईटी के 22 छात्र ऐसे रहे जो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। लोकसभा में मानव संसाधन विकास मंत्री महेन्द्र नाथ पांडे ने इस बात की लिखित जानकारी दी।
पढ़ाई बीच में ही छोड़ने का ट्रेंड देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में ही नहीं बढ़ रहा है, मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। जानकारी के अनुसार आईआईएम रोहतक से दस, आईआईएम इंदौर से 9, आईआईएम रायपुर से 8 और आईआईएम काझीकोड़ में सात छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके हैं। इसके अलावा कोलकाता और शिलाँग आईआईएम से दो और ट्रिची आईआईएम से एक छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ गया।
राज्यमंत्री पांडे ने बताया कि आईआईटी और आईआईएम से ड्रॉप आउट छात्रों का यह सिलसिला पिछले कुछ समय में थोड़ा कम हुआ है इसके लिए संस्थाओं ने कुछ खास कदम उठाए हैं। हालांकि एक जानकारी के अनुसार देश की 16 आईआईटी में साल 2014-15 में इंजीनियरिंग के कुल 1126 छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। जबकि इसी अवधि में 13 आईआईएम के कुल 55 छात्रों ने पढ़़ाई अधर में छोड़ दी।