आईआईटी-मद्रास में कोरोना के अब तक 183 मामले, आखिर कहां रह गई चूक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईआईटी-मद्रास में मंगलवार को कोरोना संक्रमण के 79 और मामले सामने आए। इसके बाद यहां अब संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 183 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्राथमिक तौर पर आईआईटी में वायरस के अधिक प्रसार की वजह मेस में लोगों का जमावड़ा और शेयरिंग टॉयलेट को बताया है।
वहीं, इस मामले में तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव जे. राधाकृष्णन का कहना था कि आईआईटी मद्रास में एक दिसंबर को दो मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद अगले 15 दिन में यहां संक्रमण दर बढ़कर 19 फीसदी हो गई थी। ऐसे में आइए जानते हैं कि संक्रमण के प्रसार को रोकने में आईआईटी मद्रास से आखिर कहां चूक रह गई?
मामले सामने आने के बाद क्या नियम बनाने चाहिए थे?
- कैंपस में आने वाले छात्रों को 14 दिन क्वारंटीन में रहना होगा।
- कोरोना टेस्ट में निगेटिव पाए जाने के बाद ही छात्रों को होस्टल में भेजा जाएगा।
- एक समय पर केवल दो छात्रों को एक साथ लैब में काम करने दिया जाएगा।
- होस्टल में एक समय में छात्रों की संख्या 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
आईआईटी से कहां रह गई चूक
- एक दिसंबर को दो मामले आने के बाद सभी छात्रों को अलर्ट नहीं किया गया।
- नौ दिसंबर तक छात्रों को अंधेरे में रखा गया और कैंपस में कोरोना का प्रसार है, इसके बारे में अवगत नहीं कराया गया।
- सभी होस्टल में छात्रों को संक्रमित स्टाफ द्वारा खाना खिलाया गया।
- छात्रों से कोरोना के क्या क्या लक्षण हो सकते हैं, यह साझा नहीं किया गया।
बता दें कि सात दिसबंर से चेन्नई में शिक्षण संस्थानों को खोलने की अनुमति मिलने के बाद आईआईटी मद्रास कोरोना वायरस के सबसे बड़े हॉटस्पॉट के तौर पर सामने आया है।
अस्थायी लॉकडाउन के अगले ही दिन..
अस्थायी तौर से लॉकडाउन लगने के अगले ही दिन मंगलवार को 79 और छात्र एवं स्टाफ सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव जे. राधाकृष्णन ने बताया कि आईआईटी मद्रास से एक दिसंबर से अब तक एकत्र किए गए 978 नमूनों में से कुल 183 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है और 25 नमूनों की जांच के नतीजे आना बाकी हैं। इससे पहले सोमवार को संस्थान के 104 लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
संक्रमित लोगों में ज्यादातर छात्र और..
राधाकृष्णन ने कहा कि सोमवार को जांच के लिए कर्मचारियों और छात्रों के 539 नमूने लिए गए थे और इनमें से 79 में संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि संक्रमित होने वालों में ज्यादातर छात्र हैं और अन्य कैंटीन में काम करने वाले कर्मचारी हैं।
सभी का इलाज सरकारी अस्पताल ‘किंग्स इंस्टिट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन एंड रिसर्च’ में किया जा रहा है। क्षेत्र में वायरस के और अधिक प्रसार की आशंका पर अधिकारी ने कहा कि आईआईटी, संक्रमण प्रभावित एक स्थानीय क्षेत्र (लोकलाइज्ड क्लस्टर) है।