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IGNCA: आईएनजीसीए ने शुरू किए चार नए कोर्स, हिंदू अध्ययन, वेद और रामायण-महाभारत भी शामिल

Fri, 02 Sep 2022 09:35 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 02 Sep 2022 09:35 PM IST
सार

आईजीएनसीए ने कहा कि छात्रों को बौद्धिक चर्चाओं में भाग लेने और क्षेत्र के प्रमुख विद्वानों के साथ आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया जाएगा, जिससे हिंदू अध्ययन की समकालीन प्रासंगिकता सामने आएगी।

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IGNCA's new diploma courses on Hindu studies, Vedas, Indian epics
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र - फोटो : IGNCA

विस्तार

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने नए स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए हैं जो हिंदू अध्ययन, भारतीय महाकाव्य रामायण और महाभारत और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि लगभग 500 आवेदन मिले हैं और जल्द ही पाठ्यक्रम शुरू होने की उम्मीद है। संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करने वाला आईजीएनसीए 11 पाठ्यक्रम पेश कर रहा है, जिसमें चार नए पाठ्यक्रम - हिंदू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय साहित्य और संग्रहालय शामिल हैं। जिन्हें इस साल लॉन्च किया गया है।

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रामायण, महाभारत, वेदों  और पुराण पर केंद्रित होंगे कोर्स 
अधिकारी ने कहा कि कोविड महामारी के कारण हमारे एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम ठप हो गए थे। हमने उन्हें इस साल फिर से शुरू कर दिया है। साथ ही चार नए पाठ्यक्रम भारतीय महाकाव्यों - रामायण और महाभारत, वेदों  और पुराण पर केंद्रित होंगे। हिंदू अध्ययन में तत्व विवाद, पुरुषार्थ विवाद, प्रमाण, और रामायण और महाभारत जैसे विषय शामिल होंगे।
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आईजीएनसीए ने कहा कि छात्रों को बौद्धिक चर्चाओं में भाग लेने और क्षेत्र के प्रमुख विद्वानों के साथ आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान किया जाएगा, जिससे हिंदू अध्ययन की समकालीन प्रासंगिकता सामने आएगी। भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता बिना किसी बंधन के बाहर और परे सोचने की क्षमता में निहित है। इसमें वेदों, पुराणों और उपवेदों सहित अन्य विषय होंगे। ये पाठ्यक्रम बड़े पैमाने पर मिड-करियर पेशेवरों पर लक्षित हैं जो अपने ज्ञान को बढ़ाना चाहते हैं और इस वर्ष पाठ्यक्रमों के लिए अधिकांश आवेदक कामकाजी लोग हैं, जिनमें शोधकर्ता और कला और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। यहां तक कि विदेश में रहने वाले भी आवेदन कर सकते हैं। लेकिन ध्यान दिल्ली-एनसीआर से आवेदकों को लाने पर है। 
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मौजूदा पुराने पाठ्यक्रम हैं- सांस्कृतिक सूचना विज्ञान में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, सांस्कृतिक प्रबंधन, बौद्ध अध्ययन, डिजिटल पुस्तकालय और डेटा प्रबंधन, दक्षिण-पूर्व (अग्नेया) एशियाई अध्ययन। आईजीएनसीए की स्थापना 1987 में भारतीय कलाओं की खोज, अध्ययन और प्रसार, भारत और उसके पड़ोसियों के बीच विशेष रूप से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में कला से संबंधित क्षेत्रों में संवाद को पुनर्जीवित करने के लिए की गई थी।

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