Justice BR Gavai: 'देश खतरे में हो तो सुप्रीम कोर्ट अलग नहीं रह सकता', पहलगाम आतंकी हमले पर बोले जस्टिस गवई
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि जब देश खतरे में हो तो सुप्रीम कोर्ट अलग नहीं रह सकता, हम भी इसी देश का हिस्सा हैं। जब हमने इस घटना के बारे में सुना तो हम स्तब्ध रह गए। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना उस समय देश में नहीं थे। मैंने उनसे अनुमति लेकर पूरी अदालत की बैठक बुलाई।हमने हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दो मिनट का मौन रखने की घोषणा की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भूषण रामकृष्ण गवई (बीआर गवई) ने पहलगाम आतंकी हमले पर कहा कि जब देश खतरे में हो तो सुप्रीम कोर्ट अलग नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा कि हम भी देश का हिस्सा हैं। सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी पद को ग्रहण करने से इन्कार किया और संविधान को सर्वोच्च बताकर इस बहस को समाप्त कर दिया कि संसद या न्यायपालिका में से कौन श्रेष्ठ है।
जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि जब देश खतरे में हो तो सुप्रीम कोर्ट अलग नहीं रह सकता, हम भी इसी देश का हिस्सा हैं। जब हमने इस घटना के बारे में सुना तो हम स्तब्ध रह गए। न्यायमूर्ति गवई ने कहा, चीफ जस्टिस संजीव खन्ना उस समय देश में नहीं थे, इसलिए मैंने उनसे अनुमति लेकर पूरी अदालत की बैठक बुलाई। बैठक के बाद हमने तुरंत हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दो मिनट का मौन रखने की घोषणा की।
उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों से लेकर रिक्त पदों, न्यायाधीशों की राजनेताओं सहित आम लोगों से मुलाकात और न्यायपालिका के खिलाफ बयानों जैसे मुद्दों पर भी बात की। संसद को सर्वोच्च बताने के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और राजनेताओं के बयान से जुड़े सवाल पर जस्टिस गवई ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है। केशवानंद भारती मामले में 13 न्यायाधीशों की पीठ ने यह फैसला सुनाया है।
ये भी पढ़ें: मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के दिल्ली में दो फ्लैट, 55 लाख की एफडी, जानिए नए सीजेआई के पास कितनी संपत्ति
सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों के राज्यपाल जैसे राजनीतिक पद स्वीकार करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। सेवानिवृत्त होने के बाद वह कोई पद ग्रहण नहीं करेंगे। एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद प्रोटोकॉल में सीजेआई के पद से नीचे है।
14 मई को संभालेंगे सीजेआई का पदभार
न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई को मंगलवार को भारत का अगला प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) नियुक्त किया गया। न्यायमूर्ति गवई 14 मई को सीजेआई का पदभार संभालेंगे। मौजूदा सीजेआई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का 13 मई को कार्यकाल समाप्त हो रहा है। जस्टिस गवई उनकी जगह लेंगे। जस्टिस गवई देश के दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश हैं।
ये भी पढ़ें: सीजेआई खन्ना ने दिया याचिकाओं को स्पष्ट बनाने पर जोर, कहा- 'कम ही अधिक है' के सिद्धांत को अपनाया जाए
कानून मंत्रालय ने जस्टिस गवई की भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका नाम 16 अप्रैल को सीजेआई खन्ना द्वारा केंद्र सरकार को सिफारिश के रूप में भेजा गया था। जस्टिस गवई का कार्यकाल छह महीने का होगा और वह 23 दिसंबर को 65 वर्ष की आयु पूरी करने पर सेवानिवृत्त होंगे।
संबंधित वीडियो
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.