हिम्मत हार जाता तो न मैं बचता और न साथी: सुमन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आतंकी हमले में घायल हुए हिरन गांव निवासी सीआरपीएफ के जवान सुमनशंकर शर्मा बुधवार को देर रात घर लौट आए। आतंकियों की गोली पेट में लगने से घायल सुमन शंकर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि 25 जून को 161 बटालियन के करीब एक सैकड़ा से अधिक जवान एनुअल फायरिंग करके लौट रहे थे।
तीन गाड़ियों में सबसे आगे ट्रक, बीच में हमारी बस और पीछे स्वराज माजदा थी। बस में 40 जवान सवार थे। सामने खड़े पांच आतंकियों ने सबसे पहले आगे चल रहे ट्रक को निशाना बनाने का प्रयास किया। लेकिन चालक ने तेजी से गाड़ी को आगे बढ़ा दिया। बीच में हमारी बस फंसते ही सामने खड़े पांच आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया। हम लोग हिम्मत नहीं हारे, हिम्मत हार जाता तो न मैं बचता और न हमारे साथी।
ऊपर वाले ने बचा लिया मेरा सिंदूर
गोली का जवाब तुरंत देना शुरू कर दिया। पीछे से आ रही स्वराज माजदा के भी जवान उतरे और फायरिंग की। करीब 25 मिनट में दो आतंकियों को ढेर कर दिया। हालांकि इस दौरान तीन अन्य भागने में सफल रहे। आतंकियों को मारने के बाद घायल हुए पांच साथियों को मैंने खुद गाड़ी में चढ़ाया था। स्वराज माजदा गाड़़ी का चालक कुलविंदर भी घायल हो गया। हमारी गाड़ी में 12 जवान ही सुरक्षित बचे थे।
आठ जवान आतंकी हमले में मारे गए और शेष घायल हो गए।
सीआरपीएफ के जवान सुमन शंकर शर्मा के घर वापस आने पर पत्नी पूनम शर्मा ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रही थी। उन्होंने कहा कि मेरी मांग का सिंदूर तो ऊपर वाले ने बचा लिया। उसी पर भरोसा था। मैं तो हमेशा ईश्वर को याद करती रही।
सुमन शंकर शर्मा बुधवार को देर रात्रि करीब 1.30 बजे निजी वाहन से घर लौटे तो परिजन जाग रहे थे। बड़ी बेटी जाहन्वी एवं मान्वी ने पिता को देखा तो वह गले से लिपट गई। सुमन शंकर के चोट लगे होने के बाद भी बेटियों को गले लगा लिया। पत्नी पूनम शर्मा ने बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।