फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   if Brij Bhushan sharan singh gets relief, will women wrestlers would be discouraged

Wrestlers Protest: बजरंग पूनिया को कुश्ती के गुर सिखाने वाले वीरेंद्र दलाल बोले- बस कुश्ती जिंदा रहनी चाहिए

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 15 Jun 2023 11:27 PM IST
सार

बृजभूषण शरण सिंह और पहलवानों के मामले में जो कुछ चल रहा है, उसका कुश्ती पर क्या असर होगा? खासतौर पर हरियाणा की महिला पहलवानों की सोच कितनी बदली है? हरियाणा के कुश्ती-अखाड़े या अकादमी में महिला पहलवानों की संख्या कम हो रही है या बढ़ी है? वीरेंद्र दलाल से ऐसे ही कई सवाल किए गए। उन्होंने बहुत खुलकर और सटीक जवाब दिए।

विज्ञापन
if Brij Bhushan sharan singh gets relief, will women wrestlers would be discouraged
जंतर-मंतर पर पहलवानों का प्रदर्शन (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बजरंग पूनिया और दीपक पूनिया जैसे अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को कुश्ती के गुर सिखा चुके वीरेंद्र दलाल ने पहलवानों के मुद्दे पर अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बात की। वीरेंद्र दलाल का झज्जर के छारा गांव में अखाड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच महीने में बृजभूषण शरण सिंह और पहलवानों को लेकर जो भी बातें हुईं, उसे सभी ने देखा। पहलवानों के आरोप गंभीर हैं। इसकी निष्पक्षता से जांच जरूरी है। इससे ही कुश्ती पर लोगों को भरोसा कायम रहेगा।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि हरियाणा में लड़कियां पहलवानी कर रही हैं, ये कोई ज्यादा पुरानी बात नहीं है। दो दशक हुए होंगे, जब छोरियों ने कुश्ती में कदम रखा। इससे पहले तो उनके लिए घर का कामकाज या स्कूल, दो ही जगह थी। कुश्ती में तो लड़के ही होते हैं। ये सोचकर मां-बाप भी लड़कियों को अखाड़े में नहीं भेजते थे। दो दशक पहले हरियाणे की छोरियों ने यह सोच बदली। फिर जब महिला पहलवान विदेश से मेडल जीतकर लाईं, तो बाकी लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ा। जो ये सोचती थी कि कुश्ती तो पुरुषों का ही खेल है, वे तो नाजुक हैं, उन्होंने भी अपनी धारणा को बदला। एकाएक महिला पहलवानों की बाढ़ आ गई। अब जब महिला पहलवानों ने ही यौन शोषण के आरोप लगाए हैं तो लड़कियों के मन में कई सवाल उठेंगे। इसके साथ ही उनके मां-बाप भी अपनी बच्चियों को अखाड़े में भेजने से कतराएंगे।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि कई अभिभावकों से बातचीत होती रहती है। उनके दिमाग में भी कई तरह की बातें चल रही हैं। कुछ लोगों ने इस मामले को जाति से जोड़ दिया। ये दुख की बात है। जब मेडल जीता तो ये देश की बेटी हुईं। हमारे अखाड़े में तो हर जाति-धर्म के पहलवान हैं। अखाड़े के पहलवान जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित दूसरे राज्यों में खेलने जाते हैं। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता। दूसरे राज्यों के खिलाड़ी भी हरियाणा आते हैं। अब जब पहलवानों की मांग के मुताबिक पुलिस ने तय समय में चार्जशीट दाखिल कर दी है तो उम्मीद करनी चाहिए कि न्याय होगा। उन्होंने कहा कि मामले का हर पहलू सामने आना चाहिए। जो सच है, वह बाहर आना चाहिए। कुश्ती जिंदा रहनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामले में झज्जर स्थित साई अखाड़ा के संचालक कहते हैं कि अभी यहां कोई महिला पहलवान तो नहीं है, मगर मामले की चर्चा बराबर होती है। जो अभिभावक अपने बच्चों के लिए पूछताछ करने आते हैं, तो वे कहते हैं ये बहुत बुरा हुआ है। हिसार में महिलाओं के बड़े कुश्ती सेंटर पर बातचीत की गई तो वहां से भी कुछ वैसा ही जवाब मिला, जैसा दूसरी जगहों से मिला है। इस सेंटर पर महिला कुश्ती खिलाड़ियों की बड़ी संख्या है।


चंडीगढ़ स्थित कुश्ती कोच दर्शनलाल बताते हैं कि बृजभूषण और महिला पहलवानों का मामला गर्माया हुआ है। ऐसे केसों की निष्पक्ष जांच पड़ताल होनी चाहिए। सच क्या है, सामने आए। पांच-छह माह में कुश्ती में एक हुल्ला गुल्ला सा मचा है। जूनियर खिलाड़ी सहमे से हैं। पेरेंट्स खुलकर बात नहीं कर रहे। हालांकि, बीते कुछ दिनों में जिस तरह से मामले में पहलवानों और सरकार ने बातचीत की। उनकी मांगों को सुना और उनसे किए वादों को तय समय में पूरा किया, उससे उम्मीद जगी है कि मामले में दोषियों को सजा मिलेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed