मशहूर फैशन डिजाइनर सत्य पॉल का 79 साल की उम्र में निधन
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मशहूर फैशन डिजाइनर सत्य पॉल का गुरुवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर में निधन हो गया। वह 79 साल के थे। उन्हें दिसंबर में नए स्ट्रोक का सामना करना पड़ा था। ईशा योग केंद्र के संस्थापक सद्गुरु ने ट्वीट कर मशहूर फैशन डिजाइनर सत्य पॉल के निधन की जानकारी दी।
सत्य पॉल के निधन की खबर देते हुए ईशा योग सेंटर के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने ट्वीट किया, ''सत्य पॉल, जोशीले उत्साह और अविश्वसनीय भागीदारी के साथ जीने का एक चमकता उदाहरण थे, भारतीय फैशन उद्योग में सत्य पॉल द्वारा लाया गया विशिष्ट दृष्टिकोण उनके लिए सच्ची और सुंदर श्रद्धांजलि है। हमारे बीच आपका होना सौभाग्य की बात है। संवेदना और आशीर्वाद।''
#SatyaPaul, a shining example of what it means to live with immeasurable passion and unrelenting involvement. The distinct vision you brought to the Indian #fashion industry is a beautiful tribute to this. A privilege to have had you amongst us. Condolences & Blessings. -Sg pic.twitter.com/DNMZ0DXvOf
विज्ञापन विज्ञापन— Sadhguru (@SadhguruJV) January 7, 2021
सत्य पॉल के बेटे पुनीत नंदा ने बताया कि उन्हें दिसंबर में स्ट्रोक आया था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें ईशा योगा सेंटर लाया गया, जहां बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। सत्य पॉल के निधन की खबर को सोशल मीडिया पर फैशन डिजाइनर दिव्यम मेहता ने भी शेयर कर दुख जताया।
दिव्यम मेहता बोले, अपने संरक्षक को खो दिया
दिव्यम मेहता ने लिखा, ''आज मैंने अपने मामा, संरक्षक और मार्गदर्शक को खो दिया। मेरे नाना रेस्तरां के व्यवसाय में थे। मेरे मामा ही थे, जिन्होंने परिवार को फैशन डिजाइनर के परिवार के तौर पर पहचान दिलाई। जब मैंने इस क्षेत्र में आने की इच्छा जताई, तो उन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया। वह नहीं चाहते थे कि मैं उनके नाम के सहारे चलूं, वे चाहते थे कि मैं अपना मार्ग अलग बनाऊं।''
डिजाइनर से अधिक साधक थे पिता : पुनीत
पुनीत ने बताया कि ज्यादातर लोगों को पता नहीं है कि एक डिजाइनर या एक उद्यमी से अधिक एक साधक थे। 70 के दशक में उनके भीतर की यात्रा शुरू हुई, जब उन्होंने दार्शनिक जे कृष्णमूर्ति की वार्ता में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने ओशो से मार्गदर्शन मांगा। वर्ष 1990 में ओशो के चले जाने के बाद वे दूसरे की गुरु की तलाश में नहीं थे। उसके बाद 2007 में एक दिन सद्गुरु से मिले। उन्होंने तुरंत योग का आनंद लेना शुरू कर दिया और आखिरकार 2015 में यहां चले आए।