IAS rules row: राज्यों की ओर से कम आईएएस अधिकारियों को नहीं भेजने से केंद्र का कामकाज प्रभावित, इसलिए नियम में बदलाव
डीओपीटी के सूत्रों के अनुसार, सीडीआर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या 2011 में 309 से घटकर 223 हो गई है।
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केंद्र सरकार ने सेवा नियमों में अपने प्रस्तावित बदलावों का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि राज्य प्रतिनियुक्ति के लिए पर्याप्त संख्या में आईएएस अधिकारियों को नहीं भेज रहे हैं, जिससे केंद्र सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सूत्रों ने कहा कि केंद्र में संयुक्त सचिव स्तर तक आईएएस अधिकारियों के घटते प्रतिनिधित्व का रुझान देखा गया है क्योंकि अधिकांश राज्य अपने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व (सीडीआर) को पूरा नहीं कर रहे हैं। दायित्वों और केंद्र में सेवा के लिए उनके द्वारा प्रायोजित अधिकारियों की संख्या बहुत कम है।
डीओपीटी ने किया आईएएस (कैडर) नियम में बदलाव
डीओपीटी ने हाल ही में आईएएस (कैडर) नियम, 1954 में बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों की मांग के लिए नई दिल्ली के अनुरोध को रद्द करने की राज्यों की शक्ति छीन लेगा। इस कदम की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी आलोचना की है जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा था कि इससे राज्यों का प्रशासन प्रभावित होगा।
आईएएस अधिकारियों की संख्या घटी
डीओपीटी के सूत्रों के अनुसार, सीडीआर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या 2011 में 309 से घटकर 223 हो गई है। उन्होंने कहा कि सीडीआर उपयोग का प्रतिशत 2011 में 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। सूत्रों ने कहा कि आईएएस में उप सचिव/निदेशक स्तर पर आईएएस अधिकारियों की संख्या 2014 में 621 से बढ़कर 2021 में 1130 हो जाने के बावजूद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर ऐसे अधिकारियों की संख्या 117 से घटकर 114 हो गई है।
इसलिए, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत उपलब्ध अधिकारियों की संख्या केंद्र की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र में पर्याप्त संख्या में अधिकारियों की अनुपलब्धता केंद्र सरकार के कामकाज को प्रभावित कर रही है क्योंकि केंद्र को नीति निर्माण और कार्यक्रम कार्यान्वयन में नए इनपुट प्राप्त करने के लिए इन अधिकारियों की सेवाओं की जरूरत है।