इस कॉलेज में पढ़ने के लिए आईएएस अधिकारी को देनी पड़ती है चार लाख रुपये की फीस, ये है वजह
डीओपीटी के मुताबिक, 61वां राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय कोर्स, जनवरी-फरवरी 2021 से शुरू होकर नवंबर-दिसंबर 2021 तक चलेगा। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा गया है कि इस कोर्स की ट्यूशन फीस 2,10,000 रुपये तय की गई है...
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अभी तक हम विद्यार्थियों के स्कूल कालेज या दूसरे शैक्षणिक संस्थानों की फीस के बारे में चर्चा करते रहे हैं। इन सबके बीच देश में एक ऐसा कालेज भी है, जिसमें पढ़ाई और कोर्स करने के लिए आईएएस अधिकारी को चार लाख रुपये की फीस देनी पड़ती है। इस कालेज में रक्षा अधिकारी और आईपीएस अफसर भी कोर्स करने के लिए आते हैं। दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, जिसे भारतीय सेना का उच्च शिक्षण संस्थान माना जाता है, यहां रक्षा और सिविल सेवा के अधिकारी 47 सप्ताह का कोर्स करने के लिए आते हैं।
डीओपीटी के मुताबिक, 61वां राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय कोर्स, जनवरी-फरवरी 2021 से शुरू होकर नवंबर-दिसंबर 2021 तक चलेगा। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा गया है कि इस कोर्स की ट्यूशन फीस 2,10,000 रुपये तय की गई है। इसके अलावा देश के आंतरिक हिस्सों और विदेशों के टूर प्रोग्राम के लिए दो लाख रुपये जमा कराने होंगे। इस राशि में दो विदेशी टूर और पांच आंतरिक टूर शामिल हैं।
हालांकि जिस अधिकारी का चयन इस कोर्स के लिए होता है, उसकी फीस संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश द्वारा वहन की जाती है। स्पांसर राज्य द्वारा कोर्स से संबंधित कई दूसरे खर्च भी वहन किए जाते हैं। प्रत्येक अधिकारी को संबंधित मंत्रालय या विभाग द्वारा कोर्स के दौरान पांच हजार रुपये बतौर एड हॉक अलाउंस दिए जाने की सुविधा मिलती है। कोर्स के लिए आने वाले अधिकारियों को संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में ऑन ड्यूटी माना जाएगा।
अधिकारियों को कोर्स में आने से पहले राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के साथ एक करारनामे पर दस्तखत करने पड़ते हैं। इसमें उसे लिखना होता है कि वे पांच वर्ष तक सरकारी नौकरी करेंगे और कोर्स की समाप्ति पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, एनएससीएस और सुरक्षा से संबंधित अन्य संगठनों में काम करने के लिए तैयार रहेंगे। इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी के पास कम से कम 14 साल का अनुभव होना चाहिए।
शानदार प्रदर्शन के अलावा संबंधित अधिकारी को विजिलेंस से भी क्लीयरेंस मिलनी चाहिए। कोर्स के दौरान अधिकारियों को रक्षा रणनीति के हिसाब से आर्थिक, वैज्ञानिक, राजनीतिक और औद्योगिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा विषयों को लेकर अधिकारियों को रिसर्च का भरपूर मौका मिलता है।