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जल्द हाइड्रोजन से दौड़ेगी भारतीय सड़कों पर कार, हुआ सफल ट्रायल

Sun, 11 Oct 2020 01:48 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sun, 11 Oct 2020 01:48 AM IST
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Hydrogen Car will run soon on Indian roads, successful trial done
प्रतीकात्मक

जल्द ही देश में हवा से ली गई ऑक्सीजन और हाइड्रोजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनी बिजली से कारों को सड़कों पर दौड़ाना संभव हो पाएगा। वैज्ञानिक व औद्योगिक शोध परिषद (सीएसआईआर) और केपीआइटी टेक्नोलॉजी की तरफ से किया गया भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल (एचएफसी) प्रोटोटाइप कार का ट्रायल सफल हो गया है। 

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सीएसआईआर ने शनिवार को बताया कि इस ट्रायल में स्वदेश निर्मित फ्यूल सेल स्टेक का परीक्षण सफल रहा है। ट्रायल एक बैटरी से चलने वाली 5 सीटर इलेक्ट्रिक सीडॉन कार के प्लेटफॉर्म पर किया गया, जिसमें फ्यूल सेल स्टेक को बाद में फिट किया गया था। बता दें कि एचएफसी तकनीक में हाइड्रोजन और हवा से ली गई ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिये विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है। इसके उपयोग से पेट्रोल, डीजल आदि जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता को खत्म किया जा सकता है। साथ ही इस तकनीक में कार के ईंजन से धुएं के बजाय महज पानी निकलता है। इसके चलते यह वाहनों के धुएं से निकलने वाली हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों और प्रदूषण फैलाने वाले अन्य तत्वों को वातावरण में घटाने में योगदान देगी।
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इस तकनीक को बसों और ट्रकों जैसे व्यवसायिक वाहनों के लिए ज्यादा अच्छा माना जा रहा है। फिलहाल बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों या ट्रकों में आवश्यक ऑपरेटिंग रेंज हासिल करने के लिए बहुत बड़ी बैटरी की आवश्यकता होती है। लेकिन नई तकनीक के बाद बेहद छोटी बैटरी से भी बहुत लंबी दूरी तक गाड़ियां चलाना संभव हो जाएगा। 
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इस तकनीक को विकसित करने के लिए 2016 में पुणे स्थित नेशनल कैमिकल लैब (एनसीएल) और कराईकुडी स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रो कैमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीईसीआरआई) ने एनएमआईटीएलआई योजना के तहत केपीआईटी के साथ पीईएम फ्यूल सेल तकनीक विकसित करने के लिए साझेदारी की थी। एनसीएल और सीईसीआरआई, दोनों ही सीएसआईआर की लैब हैं। 

60 की गति से 250 किमी चलेगी कार
सीएसआईआर के मुताबिक, कार में करीब 1.75 किग्रा हाइड्रोजन को 350 बार प्रेशर पर स्टोर करने की क्षमता वाला फ्यूल टैंक लगाया गया था, जो भारतीय सड़कों जैसे हालात में 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा की मध्यम गति से करीब 250 किलोमीटर तक चल सकती है। 

इन उपकरणों से दौड़ाई गई कार
सीएसआईआर ने अपनी खोजी तकनीक से केपीआईटी के साथ मिलकर 10 केडब्ल्यूई (किलोवाट-इलेक्ट्रिक) ऑटोमॉटिव ग्रेड एलटी-पीईएमएफसी (कम तापमान पीईएम फ्यूल सेल) स्टेक तैयार किया है। इसे इलेक्ट्रिक कार का दिल भी कहा जा सकता है। दरअसल फ्यूल सेल वास्तव में एक कम तापमान वाला पीईएम (प्रोटॉन एक्सचेंज मेंबरेंन) है, जो 65 से 75 डिग्री सेल्सियस पर संचालित होने के कारण वाहनों के उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। केपीआईटी ने स्टेक इंजीनियरिंग में अपनी विशेषज्ञता की बदौलत बेहद हल्की मैटल बायपोलर प्लेट व गैस्केट डिजाइन तैयार किए। साथ ही बैलेंस ऑफ प्लांट (बीओपी) विकसित करने के अलावा सिस्टम इंटिग्रेशन, कंट्रोल सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन तैयार की ताकि फ्यूल सेल वाहन को चलाया जा सके। स्टेक का वजन करीब दो तिहाई कम करने के लिए बायपोलर प्लेट बेहद पतली धातु से बनाई गई। 


यह भविष्य की तकनीक है और इसका स्वदेशी विकास होने के कारण यह व्यवसायिक तौर पर ज्यादा उपयोगी साबित होने की उम्मीद है।
- रवि पंडित, चेयरमैन, केपीआईटी

हाइड्रोजन आधारित अक्षय ऊर्जा का देश के यातायात में ईंधन के तौर पर शक्ति देने का समय आ गया है। इससे पेट्रोल और डीजल आयात का बिल घटेगा। साथ ही हाइड्रोजन महज पानी देने के साथ ही स्वच्छ ईंधन भी साबित होगी।
- अश्विनी नांगिया, निदेशक, सीएसआईआर-एनसीएल

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