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डिलीवरी ब्वॉय का धर्म पूछकर खाना लेने से इनकार करने वाले के खिलाफ हैदराबाद में FIR दर्ज

Sat, 26 Oct 2019 08:46 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: योगेश साहू Updated Sat, 26 Oct 2019 08:46 AM IST
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Hyderabad Police registered Case against Ajay Kumar refusing food delivery by Muslim boy Mudassir
स्विगी - फोटो : अमर उजाला

हैदराबाद में डिलीवरी ब्वॉय का धर्म पूछकर खाने की डिलीवरी लेने से इनकार करने वाले ग्राहक के खिलाफ स्थानीय पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस मामले में फूड डिलीवरी एप स्विगी ने शिकायत दर्ज कराई थी।

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जानकारी के अनुसार पुलिस ने हैदराबाद के अलीयाबाद इलाके में रहने वाले अजय कुमार नाम के शख्स पर इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि अजय ने खाने की डिलीवरी देने आए मुस्लिम युवक मुदस्सिर सुलेमान के हाथों से डिलीवरी लेने से इनकार कर दिया था। मुदस्सिर की ओर दी गई शिकायत के बाद स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज किया है और जांच कर रही है।
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बता दें कि आरोपी ग्राहक अजय कुमार ने गुरुवार को खाना पहुंचाने वाली एप स्विगी के जरिए ऑर्डर किया था। जिसे मुस्लिम युवक डिलीवरी करने पहुंचा था। लेकिन आरोपी अजय ने उसके हाथों से खाना लेने से इनकार कर दिया था।

पुलिस निरीक्षक पी.श्रीनिवास ने जानकारी दी थी कि आरोपी ने मोबाइल एप से खाने में चिकन मंगाया था। जब डिलीवरी ब्वॉय से धर्म के बारे में पूछा गया तो मुदस्सिर सुलेमान ने खुद को मुस्लिम बताया। इसके बाद ग्राहक ने उससे खाना वापस ले जाने को कहा। 

इस बीच मजलिस बचाओ तहरीक अध्यक्ष अमजद उल्ला खां ने अपने ट्विटर पर इस मामले को पोस्ट कर दिया था। खान ने बताया कि यह ऑर्डर ऐसे रेस्टोरेंट को दिया था जिसे एक मुसलमान ही चलाता है। 

आरोपी ग्राहक ने चिकन-65 का ऑर्डर देते हुए हिंदू लड़के के जरिए भेजने की बात कही थी, पर स्विगी ने खाना एक मुसलमान डिलीवरी ब्वॉय के हाथों भेज दिया। 

स्विगी ने जारी किया था कड़ा बयान
उधर, मामले को लेकर फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी ने भी एक बयान जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि बतौर संगठन, हम भी इस बात को लेकर अपने ग्राहकों और सहयोगियों से भेदभाव नहीं करते। हर आर्डर ऑटोमैटिक ढंग से डिलीवरी करने वाले के पास जाता है। यह सबकुछ उसकी लोकेशन और उपलब्धता पर निर्भर करता है।


जोमैटो भी कर चुकी है ऐसे मामले का सामना
इससे पहले मध्यप्रदेश में भी एक ऐसा ही मामला सामने आ चुका है। उस समय खाना पहुंचाने वाली कंपनी जोमैटो ने भी तार्किक रवैया अपनाते हुए कहा था कि खाने का कोई मजहब नहीं होता। जोमैटो के इस काम की चौतरफा प्रशंसा हुई थी। 

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