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पति का विवाहेतर संबंध हमेशा क्रूरता नहीं होती : सुप्रीम कोर्ट
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Fri, 25 Nov 2016 04:33 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक पुरुष का विवाहेतर संबंध और उसकी पत्नी का संदेह हमेशा मानसिक क्रूरता नहीं होती जिससे कि कोई आत्महत्या करने को मजबूर हो जाए। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति तलाक का आधार हो सकती है।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की। उक्त मामले में पति के विवाहेतर संबंध के कारण महिला ने आत्महत्या कर ली थी जबकि अपमानित किए जाने की वजह से दूसरी महिला ने भी अपनी जिंदगी खत्म कर ली थी। यह विपदा यहीं नहीं ठहरी और बाद में पुरुष की मां और भाई ने भी आत्महत्या कर ली। इस मामले में पुरुष ने अपने खुद के दोष और पत्नी के साथ मानसिक क्रूरता करने के कारण चार साल की दी गई सजा के खिलाफ अपील दाखिल कर रखी थी।
शीर्ष अदालत ने पुरुष को सभी आरोपों से बरी कर दिया। जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव राव की पीठ ने कहा कि विवाहेतर संबंध का मामला आईपीसी की धारा 498ए के तहत नहीं आता, जिसमें एक महिला को पति या उसके परिवार द्वारा प्रताड़ित करने की बात कही गई है। पीठ ने कहा कि यह एक अवैध या अनैतिक काम हो सकता है, लेकिन इसे एक अपराध साबित करने के लिए और चीजों की जरूरत पड़ेगी। केवल पति के विवाहेतर संबंध और पत्नी के दिमाग में इसको लेकर कुछ संदेह के आधार पर इसे मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।
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शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की। उक्त मामले में पति के विवाहेतर संबंध के कारण महिला ने आत्महत्या कर ली थी जबकि अपमानित किए जाने की वजह से दूसरी महिला ने भी अपनी जिंदगी खत्म कर ली थी। यह विपदा यहीं नहीं ठहरी और बाद में पुरुष की मां और भाई ने भी आत्महत्या कर ली। इस मामले में पुरुष ने अपने खुद के दोष और पत्नी के साथ मानसिक क्रूरता करने के कारण चार साल की दी गई सजा के खिलाफ अपील दाखिल कर रखी थी।
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शीर्ष अदालत ने पुरुष को सभी आरोपों से बरी कर दिया। जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव राव की पीठ ने कहा कि विवाहेतर संबंध का मामला आईपीसी की धारा 498ए के तहत नहीं आता, जिसमें एक महिला को पति या उसके परिवार द्वारा प्रताड़ित करने की बात कही गई है। पीठ ने कहा कि यह एक अवैध या अनैतिक काम हो सकता है, लेकिन इसे एक अपराध साबित करने के लिए और चीजों की जरूरत पड़ेगी। केवल पति के विवाहेतर संबंध और पत्नी के दिमाग में इसको लेकर कुछ संदेह के आधार पर इसे मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।
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