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राष्ट्रीय सुरक्षा मंचः कार्यक्रम जुड़े सैंकडों लोग, डॉ. इंद्रेश कुमार बोले- वतन से मोहब्बत आधा ईमान है

Fri, 04 Nov 2022 10:24 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 04 Nov 2022 10:24 PM IST
सार

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रहे इंद्रेश कुमार ने अपने भाषण में कहा कि आज की यह सभा ना सियासी है ना मजहबी बल्कि आपसी भाईचारे की सभा है। इस्लाम में भी वतन के लिए कहा गया है कि वतन की मुहब्बत आधा ईमान है। 

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hundreds of people gathered in Rashtriya suraksha manch program read Indresh Kumar speech
राष्ट्रीय सुरक्षा मंच - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर “आजादी का अमृत महोत्सव” के उपलक्ष्य में एक भारत श्रेष्ठ भारत तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए  राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच,दिल्ली प्रदेश एवं जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में एक भारत, आत्मनिर्भर भारत, श्रेष्ठ भारत, नामक व्याख्यान का आयोजन शुक्रवार 4 नवंबर 2022 को सायं 4:00 बजे नई दिल्ली स्थित जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इंद्रेश कुमार थे। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं पौधे में जल प्रदान कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने के संदेश के साथ किया गया। 

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कार्यक्रम की विषय प्रस्तावना गोलोक बिहारी राय  (राष्ट्रीय संगठन मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच) ने देते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा विषयों पर चर्चा और राष्ट्र के लिए हितकारी निर्णय को निकालने का काम राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच विगत साठ आठ सालों से कर रहा है। यह निर्णय सरकार और सिस्टम के लिए लाभदायक है। आगे के 25 सालों में हम कैसे चले इसके लिए 75 वें वर्ष में एक भारत श्रेष्ठ भारत आत्म निर्भर भारत की बात कर रहे हैं। अपने वक्तव्य में उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के आलेख का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भारत मर गया तो विश्व मर जाएगा। ये बात अभी दो साल पहले कोरोना काल में प्रासंगिक हो गई जब बाकी के देश दवाओं के नाम पर बिजनेस की बात कर रहे थे तब विश्व के तीन चौथाई देशों को भारत ने निशुल्क दवाएं भेज रहा था।
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मुख्य अतिथि के रूप में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था आयोग, भारत सरकार के सदस्य प्रो. शाहिद अख्तर ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थान देश में अच्छा काम कर रहे हैं और वे नेशन फर्स्ट की तर्ज पर चल रहे हैं। भारत की एक मिसाल यह है कि दुनिया में मुसलमानों के 72 फिरके हैं वे सभी हिन्दुस्तान में रहते हैं। हमें श्रेष्ठ भारत पर फक्र होना चाहिए । हमारी जड़ें एक हैं एवं हमारा डीएनए एक है।  कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. मो. अफशार आलम ने कहा कि 31 अक्तूबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की पहल की थी। एकता के बल पर ये देश बना है। जामिया हमदर्द भी अनेकता में एकता का विश्वास रखता है। 31 अक्तूबर 2020 को इसमें आत्म निर्भर भारत भी जुड़ गया  है। पाकिस्तान में भी भारत के फेडरल सिस्टम की काफी तारीफ होती है।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रहे इंद्रेश कुमार ने अपने भाषण में कहा कि आज की यह सभा ना सियासी है ना मजहबी बल्कि आपसी भाईचारे की सभा है। इस्लाम में भी वतन के लिए कहा गया है कि वतन की मुहब्बत आधा ईमान है और इसे जन्नत जाने का रास्ता खुलता है। पैगंबर साहब ने भी हिन्दुस्तान के बारे में कहा है कि जब-जब मैं तन्हा और तन्हाई में होता हूं, पूर्व में हिन्द नाम की जगह है उसकी तरफ देखता हूं जहां से सुकून की हवा आती है। डीएनए पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी नजर में डीएनए है डी मतलब ड्रीम, एन मतलब नेटिव नेशन और ए मतलब एनसेस्टर और इस बात को साबित करने के लिए मैंने 25 हजार लोगों पर एक प्रयोग किया जिसमें कराची और ढाका भी शामिल थे। इसमें हमने इन सबसे बात की थी कि आपको सपने किस भाषा में आते हैं तो सबने कहा कि हिन्दुस्तानी में। इस बात से यह साबित होता है  सबके सपनों का मालिक एक है। खुदा आपको रोज आकर सपनों में बताता है कि आप हिन्दुस्तानी हो। यह प्रयोग पूरी तरह सफल  रहा था। 


उन्होंने कहा कि  हम भारतीय/भारतीय मूल राष्ट्र के हैं, जिसका एक उदाहरण ऋषि सुनक हैं, जो हमारी भारतीय जड़ों की गवाही है। वे इस बात का उदाहरण हैं कि हमारे वंश और परंपराएं जो हमारे पूर्वजों से ली गई हैं, वे कभी मिटती नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दुनिया के सभी धार्मिक ग्रंथ हमें दयालु होने का निर्देश देते हैं। कार्यक्रम में दिल्ली प्रदेश की कार्यकारणी की घोषणा की गई जिसमें मेजर जनरल सोरेश भट्टाचार्य को  दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष घोषित किया गया। कार्यक्रम का  संयोजन एवं संचालन विक्रमादित्य सिंह ने किया।

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